Gujarat Election: पिछली बार बीजेपी-कांग्रेस में हुई थी कड़ी टक्कर, AAP की एंट्री के बाद क्या हैं समीकरण?
चुनाव आयोग (Election Commission) आज गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Election 2022) की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस बार ये चुनाव त्रिकोणीय हो गया है, क्योंकि आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पंजाब सीएम भगवंत मान वहां पर मोर्चा संभाले हुए हैं। वैसे पिछली बार भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर हुई थी, लेकिन AAP के आने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। आइए जानते हैं गुजरात के राजनीतिक समीकरण-

गुजरात में 2017 का चुनाव दो चरणों में हुआ था। जिसके तहत 9 दिसंबर को पहले चरण में 89 सीटों पर वोट डाले गए। इसके बाद 14 दिसंबर को बाकी की 93 सीटों पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 66.75 और दूसरे में 68.70 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस बार भी दो चरणों में मतदान होने की उम्मीद है।
क्या थे नतीजे?
अब बात करते हैं नतीजों कीं, तो गुजरात में विधानसभा की कुल 182 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी ने 99 सीटें हासिल की थीं। इसके बाद उसने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने 77 सीटें हासिल कीं। ऐसे में देखा जाए तो दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई थी, क्योंकि दोनों की सीटों का अंतर सिर्फ 22 था।
1995 से सत्ता में है बीजेपी
गुजरात पहले महाराष्ट्र का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन 1960 में उसका विभाजन हो गया। वहां पर 1995 में बीजेपी सत्ता में आई थी, तब से उसका साम्राज्य बरकरार है। हालांकि कई चुनावों में उसकी सीटें ऊपर-नीचे हुईं। 2017 में पहली बार ऐसा हुआ, जब बीजेपी की सीटों का आंकड़ा 100 से नीचे पहुंचा। पार्टी इस चुनाव में भी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा कर रही, लेकिन इस बार उसके सामने कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी खड़ी है।
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AAP ने किया काफी प्रचार
प्रचार के मामले में आम आदमी पार्टी गुजरात में आगे है। सीएम केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, भगवंत मान समेत तमाम नेता वहां पर नॉनस्टॉफ रैलियां कर रहे। इसके अलावा पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी गोपाल इटालिया को दी है, जो खुद पाटीदार आंदोलन से जुड़े हैं। पाटीदारों का वोट गुजरात में 15 से 17 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में AAP की नजर उन पर है।
निकाय चुनाव के प्रदर्शन से उत्साहित
आपको बता दें कि पिछले साल सूरत में निकाय चुनाव हुए थे, जहां AAP ने दूसरे नंबर पर जगह बनाई। हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस का खाता भी वहां पर नहीं खुला। ये AAP का पहला प्रयास था। इस वजह से AAP ज्यादा उत्साहित है।












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