गाय-सांड जैसे आवारा पशुओं पर BJP सरकार लाई विधेयक, कांग्रेस विरोध में, कुछ लोग बोले- 'ये काला कानून'
गांधीनगर। गाय-सांड जैसे आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए गुजरात में भाजपा सरकार एक विधेयक लाई, जो विधानसभा में पास हो गया है। इस विधेयक को 'गुजरात मवेशी नियंत्रण विधेयक (शहरी इलाक़ों में)-2022' के शीर्षक से पारित किया गया। इसके प्रावधानों के अनुसार, अब नगरपालिका और शहरी क्षेत्रों में मवेशियों की टैगिंग अनिवार्य होगी। उन मवेशी पालकों के ख़िलाफ़ भी सख़्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जो अपने पशुओं को आवारा भटकने के लिए छोड़ देते हैं।

भाजपा लाई विधेयक, कांग्रेस कर रही विरोध
ताज्जुब की बात है कि, गाय-सांड ऐसे पशु हैं, जो बीते कुछ बरसों से भाजपा और गैरभाजपाइयों के बीच सियासत का मुद्दा रहे हैं। भाजपा और उसके समर्थक गाय को पूजनीय मानते हैं, और सार्वजनिक मंचों पर इस जानवर के खिलाफ सुनना पसंद नहीं करते। वहीं, कांग्रेस-वामपंथी और इस्लामिक विचारधारा से जुड़े लोगों की सोच इसके उलट रही है। ऐसा होते हुए भी कांग्रेस ने गाय-सांड जैसे पशुओं की समस्या से निपटने के लिए गुजरात विधानसभा में लाए गए विधेयक का विरोध किया है। कांग्रेस के अलावा सत्तारूढ़ भाजपा के भी कई विधायक इस विधेयक से सहमत नहीं है और उन्होंने भी विधेयक के प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है।

कांग्रेस कर रही विरोध, आखिर क्यों ?
कांग्रेस से विधायक एवं मालधारी समुदाय के नेता रघु देसाई ने कहा कि, हम ऐसे विधेयक को अनुमति नहीं दे सकते। हमारी पार्टी इस मुद्दे पर शांत नहीं बैठेगी और हमारी ओर से इस बिल के ख़िलाफ़ राज्यव्यापी प्रदर्शन किये जाएंगे। कांग्रेस नेता ने विधानसभा कहा, "गुजरात में लगभग 70 लाख मालधारी हैं। जिनमें से 70% अनपढ़ और ग़रीब हैं। भाजपा सरकार जो विधेयक लाई है, उससे उन्हें नुकसान होगा। यह विधेयक पशु-संपत्ति रखने के उनके मूल अधिकार का उल्लंघन करेगा।"

भाजपाइयों में आपस में नहीं सहमति, फिर भी पारित
वहीं, इस विधेयक का समर्थन करने वाले भाजपाई विधायकों ने विधानसभा में बहस के दौरान विधेयक का बचाव किया। ज्यादातर भाजपाइयों ने कहा कि, इस विधेयक का मक़सद आवारा पशुओं को नियंत्रित करना है। भाजपा का दावा किया कि इस क़ानून के बनने से मवेशी-मालिकों को कोई समस्या नहीं होगी।
गुजरात के क़ानून और न्याय मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी का कहना है कि, हमने कांग्रेस से अपील की है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करे।"












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