Gujarat Earthquake: गुजरात में भूकंप से दहली धरती, रिक्टर स्केल पर 4.3 दर्ज की गई तीव्रता
गुजरात के राजकोट से 270 किमी उत्तर-उत्तर पश्चिम में 4.3 की तीव्रता के साथ भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, आज दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर भूकंप आया था।

Earthquake in Gujarat: गुजरात के राजकोट से 270 किमी उत्तर-उत्तर पश्चिम में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 दर्ज की गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, आज दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर भूकंप आया था। हालांकि, इस दौरान किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है।
गुजरात में 4.3 की तीव्रता से आया भूकंप
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Center for Seismology) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि, गुजरात में आज रिक्टर स्केल पर 4.3 की तीव्रता से भूकंप के झटके महसूस किए गये। रिपोर्ट में बताया गया कि, ये झटके राजकोट से 270 किलोमीटर उत्तर उत्तर पश्चिम में दर्ज किए गये। आज दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर भूकंप आया था। हालांकि, इस दौरान किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना नहीं आई है।
पिछले हफ्ते भी गुजरात में लगे भूकंप के झटके
पिछले हफ्ते, गुजरात के अमरेली जिले में भूकंप के झटके मगसूस किए गये थे। इस दौरान दो दिनों में तीन मामूली झटके महसूस किए गए थे। इस दौरान अमरेली जिले के सावरकुंडला तालुका में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.1 दर्ज की गई है।
उत्तराखंड में भी तुर्की जैसे बड़े भूकंप की चेतावनी
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) में भूकंप विज्ञान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एन. राव ने उत्तराखंड में भी तुर्की जैसे बड़े भूकंप की चेतावनी जारी की है। जोशीमठ आपदा के बीच अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी कर दी है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, राव ने बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र में सतह के नीचे बहुत तनाव पैदा हो रहा है, और तनाव को दूर करने के लिए एक 'बड़ा भूकंप' (great earthquake) अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भूकंप की तारीख और समय की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है, और विनाश कई कारकों पर निर्भर करेगा जो एक भौगोलिक क्षेत्र से दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में भिन्न होते हैं।
उत्तरखंड में हर गतिविधि पर रखी जा रही नजर
उन्होंने कहा कि, 'हमने उत्तराखंड पर केंद्रित हिमालयी क्षेत्र में लगभग 80 भूकंपीय स्टेशन स्थापित किए हैं। हम वास्तविक समय पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। हमारा डेटा दिखाता है कि तनाव बड़े पैमाने पर जमा हो रहा है।' 'हमारे पास क्षेत्र में जीपीएस नेटवर्क हैं। जीपीएस बिंदु चल रहे हैं, जो सतह के नीचे हो रहे परिवर्तनों का संकेत दे रहे हैं।'
उत्तराखंड में भी तुर्की जैसे बड़े भूकंप की चेतावनी
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) में भूकंप विज्ञान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एन. राव ने उत्तराखंड में भी तुर्की जैसे बड़े भूकंप की चेतावनी जारी की है। जोशीमठ आपदा के बीच अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी कर दी है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, राव ने बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र में सतह के नीचे बहुत तनाव पैदा हो रहा है, और तनाव को दूर करने के लिए एक 'बड़ा भूकंप' (great earthquake) अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भूकंप की तारीख और समय की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है, और विनाश कई कारकों पर निर्भर करेगा जो एक भौगोलिक क्षेत्र से दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में भिन्न होते हैं।
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राव ने कहा कि, पृथ्वी के साथ क्या हो रहा है, यह निर्धारित करने के लिए वेरियोमेट्रिक जीपीएस डाटा प्रोसेसिंग विश्वसनीय तरीकों में से एक है। राव ने जोर देकर कहा कि, 'हम सटीक समय और तारीख की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन उत्तराखंड में कभी भी भारी भूकंप आ सकता है।' वेरियोमीटर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में भिन्नता को मापते हैं।












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