पृथ्वी के आंतरिक कोर में एक नई परत की खोज, किस चीज से बनी है ? जानिए
पृथ्वी की आंतरकि संरचना चार की जगह अब 5 हिस्सों में बंटी हुई है। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक रिसर्च के आधार पर यह खोज की है। पता चला है कि धरती की आंतरिक कोर के अंतर भी एक आंतरिक कोर है।

वैज्ञानिकों ने रहस्यों से भरी पृथ्वी के आंतरिक हिस्से में एक बहुत बड़ी खोज की है। अभी तक यह मानकर चला जा रहा था कि पृथ्वी का आंतरिक भू-भाग चार हिस्सों में विभाजित है। लेकिन, करीब एक दशक के भूकंप से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि धरती की आंतरकि कोर ही खुद में दो भागों में बंटी हुई है। मतलब, नई खोज के बाद धरती का आंतरिक भू-भाग पांच हिस्सों में है, जिनमें से सभी की प्रकृति अलग-अलग है। यह खोज ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने की है, एक अंतरराष्ट्रीय साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

पृथ्वी के अंतर पांचवीं परत की खोज
शोधकर्ताओं की एक टीम ने पृथ्वी के आंतरिक कोर के अंदर एक नई परत की खोज की है। इस खोज में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को यह सफलता मिली है। यहां के भूकंपविज्ञानियों ने भूकंप की वजह से पैदा होने वाले भूकंपीय तरंगों से प्राप्त डेटा जुटाकर इस खोज को अंजाम दिया है, जिससे पृथ्वी के आंतरिक कोर के अंदरूनी हिस्सों को लेकर नई जानकारी सामने आई है। हाल तक यह माना जाता था कि पृथ्वी की संरचना, पपड़ी या इसके पृष्ठ भाग (crust),मैंटल, बाहरी कोर (outer core) और आंतरिक कोर (inner core) से मिलकर बनी है। लेकिन, नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाश नए शोध में इस बात की पुष्टि की गई है कि वास्तव में इसकी एक पांचवी परत भी है।

लोहे और निकल से बना है ठोस गोला
शोधकर्ताओं का कहा है कि बड़े भूकंपों के भूकंपीय तरंगों के बर्ताव पर आधारित धरती के अंदरूनी हिस्से के गहन अध्ययन में इसके आंतरिक कोर में विशिष्ट संरचना की पुष्टि हुई है। यह बहुत ही गर्म आंतरिक भाग में लोहे और निकल का ठोस गोला है, जो कि करीब 1,350 किलोमीटर चौड़ा है। यह ठोस गोला पृथ्वी के आंतरिक कोर के केंद्र में है। एएनयू रिसर्च स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के भूकंपविज्ञानी थान्ह-सन फैम ने कहा है, 'आंतरिक कोर के अंदर धातु के गोले की मौजूदगी कि परिकल्पना करीब 20 साल पहले ही की गई थी। अब हमने उस अवधारना को साबित करने का एक सबूत उपलब्ध करा दिया है।'

पृथ्वी के अंदर और रहस्य खुलने की पैदा हुई संभावना
इस खोज के लिए वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों को देखा जो पृथ्वी की कोर से सीधे गुजरते हुए पृथ्वी की दूसरी ओर निकल जाते हैं। यह तब होता है, जब धरती के किसी भी भू-भाग में भूकंप आते हैं। इसे antipode भी कहा जाता है। यह तरंगें फिर वापस भूकंप के केंद्र तक लौटकर आती हैं। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया की तुलना पिंग पोंग बॉल से की है, जो उछलकर आगे-पीछे होते हैं। फैम ने कहा है कि 'यह निष्कर्ष उत्साहजनक है, क्योंकि यह धरती के आंतरिक कोर और इसके बेहद केंद्रीय-क्षेत्र की पड़ताल के लिए नया रास्ता देता है।'

आंतरिक कोर करीब 2,440 किलोमीटर चौड़ी है
पृथ्वी का व्यास करीब 12,750 किलोमीटर है। इस ग्रह की आंतरिक संरचना चार परतों में है- बाहर की तरफ एक चट्टानी पपड़ी वाला भाग, इसके बाद एक चट्टानी मेंटल, मैग्मा से बनी बाहरी कोर और एक ठोस आंतरिक कोर। मेटैलिक आंतरिक कोर करीब 2,440 किलोमीटर चौड़ी है, जिसकी खोज भी भूकंपीय तरंग के माध्यम से ही 1930 में की गई थी। इस शोध के लीड ऑथर और भूकंपविज्ञानी फैम ने कहा है, 'अपने ग्रह के गहरे आंतरिक भाग की तुलना में हम अन्य दूर स्थित खगोलीय पिंडों की सतह के बारे में ज्यादा जान सकते हैं।'

इतिहास की एक टाइम कैप्सुल है आंतरिक कोर
शोधकर्ताओं का कहना है, 'पृथ्वी की आंतरिक कोर, जो कि धरती के आयतन का 1% से भी कम है, यह हमारे ग्रह के इतिहास की एक टाइम कैप्सुल है। जैसे-जैसे आंतरिक कोर बढ़ता है, जमने की प्रक्रिया के माध्यम से छोड़ी गई अंतर्निहित गर्मी और प्रकाश तत्व तरल बाहरी कोर के संवहन को संचालित करते हैं, जो बदले में, जियोडाइनेमो को नियंत्रित रखता है।' इसी कारण पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बनता है।
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ज्यादा भूकंप केंद्र बनने से सफल हुई यह खोज
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज के लिए उन्होंने पिछले दशक के बड़े भूकंपों में पृथ्वी की गति के डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है, जिसे सीस्मोग्राम कहते हैं। उनका यह भी कहना है कि यह शोध इसलिए संभव हो पाया है, क्योंकि दुनियाभर में भूकंप संबंधी नेटवर्क का विस्तार हो चुका है। खासकर अमेरिका के अलास्का प्रायद्वीप और यूरोप के एल्प्स के ऊपर।












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