गुजरात की 182 सीटों के लिए BJP ने बनाया ये मेगा प्लान, इतने ही नेताओं को दी गई जिम्मेदारी

अहमदाबाद, 5 जून: साल के आखिर में भारतीय जनता पार्टी के सामने गुजरात की सत्ता बचाए रखने की चुनौती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर गुजरात जीतने का दावा कर रहें तो पंजाब की जीत से उत्साहित दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों में करारी हार का गम भुलाकर प्रदेश में कांग्रेस की जगह भरना चाहती है। लेकिन, बीजेपी ने इस बार गुजरात में 150 से भी ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर रखा है। पार्टी के लिए यह कोई 'जुमला' नहीं है, क्योंकि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में वह दो बार से लोकसभा चुनावों में ऐसा करके दिखा भी रही है। इसलिए पार्टी ने गुजरात की सभी 182 सीटों के लिए इतने ही नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपकर जमीन पर उतार दिया है।

182 नेताओं को सौंपी गुजरात की सभी सीटों की जिम्मेदारी

182 नेताओं को सौंपी गुजरात की सभी सीटों की जिम्मेदारी

गुजरात में विधानसभा की कुल 182 सीटें हैं और बीजेपी ने जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों तक पहुंचने के लिए इतनी ही संख्या में नेताओं को उतारने का फैसला किया है। इन 182 नेताओं में पार्टी के सभी सांसद और पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व एमएलए भी शामिल किए गए हैं। गुजरात में विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर में होने हैं, लेकिन पार्टी पिछले कई महीनों से इलेक्शन मोड में आ चुकी है। फरवरी-मार्च में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद ही खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में रोड शो करके इसमें और गर्माहट ला दी थी।

पार्टी की ओर से दी गई ये जिम्मेदारी

पार्टी की ओर से दी गई ये जिम्मेदारी

जानकारी के मुताबिक जिन 182 नेताओं को बीजेपी ने यह जिम्मेदारी सौंपी है, उनमें से प्रत्येक को एक विधानसभा क्षेत्रों में तीन दिनों तक यात्रा करनी है। इस दौरान ये नेता क्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुजुर्ग नेताओं और बाकी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को लगता है कि यदि 150 से ज्यादा सीटों को जीतने का लक्ष्य हासिल करना है तो जमीनी कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों और पुराने कार्यकर्ताओं को अब ज्यादा सक्रिय करने का वक्त आ चुका है। अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि अगर कोई कार्यकर्ता असंतुष्ट है या सक्रिय नहीं है तो नेताओं के साथ आमने-सामने की बातचीत से किसी भी समस्या का समाधान निकल सकता है।

बीजेपी को जमीनी हालात समझने में भी आसानी की उम्मीद

बीजेपी को जमीनी हालात समझने में भी आसानी की उम्मीद

पार्टी नेताओं की ओर से क्षेत्रों का शुरू हो चुका है और इस दौरान लंबित कार्यों पर बातचीत होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कार्यों को पूरा करने को प्राथमिकता देनी है। बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है अगर कार्यकर्ताओं को यह लगेगा कि प्रदेश के नेता निष्पक्ष हैं, तो वे उनके सामने खुलकर अपनी बात रखेंगे, जिससे पार्टी को भी जमीनी हालात को समझने में और आसानी होगी। इसी कड़ी में मेहसाणा से पार्टी के राज्यसभा सांसद जुगालसिंह लोखंडवाला ने कच्छ जिले की अंजार विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने एग्रीकल्चर प्रोड्यूस कॉपरेटिव मार्केट के सदस्यों के अलावा विभिन्न समाज के नेताओं और बाकी स्थानीय नेताओं से भी मुलाकात की है। जानकारी के मुताबिक उनकी सहायता के लिए सिर्फ दो स्थानीय नेता मौजूद थे।

कार्यकर्ताओं से आपसी संबंध बेहतर करने पर जोर

कार्यकर्ताओं से आपसी संबंध बेहतर करने पर जोर

लोखंडवाला ने बताया है कि जब वे कार्यकर्ताओं के यहां जाते हैं, तो उनके घर खाना भी खाते हैं और चाय-नाश्ता भी करते हैं। यही नहीं अगर उन्हें दिक्कत नहीं है, तो उनके घर रात्रि विश्राम भी करते हैं। इससे दूरियां खत्म होती हैं और आपसी संबंधों में और मजबूती आती है। यह निजी सरोकार पार्टी के लिए लंबे वक्त तक मददगार साबित होती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े लोगों में यह विशेषता पाई जाती है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब शिमला दौरे पर गए थे, तब उन्होंने पार्टी के एक ऐसे सामान्य कार्यकर्ता का जिक्र किया था, जो 90 के दशक में वहां पर उनसे मिलते थे। बाद में उस स्थानीय नेता की पत्नी ने बताया कि कैसे मोदी जी ने फोन पर उन्हें खिचड़ी बनानी सिखायी थी, जो वह आज भी उसी तरह से बनाती हैं।

असली फीडबैक लेने पर जोर

असली फीडबैक लेने पर जोर

इसी कड़ी में सूरत उत्तर के बीजेपी विधायक कांतिभाई बल्लर अहमदाबाद शहर में घूम रहे हैं। उन्हें घाटलोदिया क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। इस समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल इसका प्रतिनिधित्व करते हैं और 2012 में यहां उत्तर प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल चुनाव जीती थीं। बल्लर यहां पर स्थानीय कॉर्पोरेटरों और वार्ड कमिटी के सदस्यों से मुलाकात कर रहे हैं। उनका कहना है कि नेताओं को अलग-अलग जिलों या क्षेत्रों में भेजने का कारण यह है कि पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नेता बिना किसी दिक्कत के अपने मुद्दे बता सकें। (तस्वीरें- फाइल)

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