संघ प्रमुख मोहन भागवत के ' कम से कम 3 बच्चे पैदा करना जरूरी' बयान पर कुछ ऐसी रही युवाओं की प्रतिक्रिया
Gorakhpur News: संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान इन दिनों काफी चर्चा में है। उन्होंने हिंदुओं का नाम लिए बिना उनकी घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करना जरूरी है। इनके इस बयान पर वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के छात्रों से बातचीत की एवं युवाओं के विचार जाने।
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छात्र राजन गौड़ कहते हैं कि मोहन भागवत जी ने जो कहा है उसमें कुछ तथ्य अवश्य होंगे। लेकिन हम जिस परिवेश या समाज से आते हैं वहां एक या दो बच्चों की परवरिश अच्छे से हो जाए यही बहुत है। इसलिए मेरे नजर से यह सही नहीं है।

बीए फर्स्ट सेमेस्टर के छात्र विराट विश्वकर्मा ने कहा कि इतने बड़े व्यक्ति ने अगर कुछ कहा है तो सोच समझकर कहा होगा। लेकिन इस मंहगाई में तीन बच्चे पालना बहुत कठिन है। निम्न और मध्यम वर्ग के लिए यह असंभव सा है।
बीए फर्स्ट सेमेस्टर के छात्र अतुल पांडेय ने कहा कि मोहन भागवत जी के बयान का हम सम्मान करते है पर उनके इस विचार से हम कतई सहमत नहीं है। हिंदू परिवार बहुत से ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। तीन क्या वो एक बच्चे का अच्छे से पालन पोषण नहीं कर सकते । ऐसे में तीन बच्चों को पालना कठिन है।
छात्र करण सिंह राणा ने कहा कि मोहन भागवत जी ने अगर कुछ कहा है तो सोच समझ कर कहा होगा। लेकिन मेरा मानना है कि कम बच्चे हैं तो परिवार खुशहाल है।
छात्र अर्पित कसौधन कहते हैं कि मै इस विचार से थोड़ा सहमत हूं। हिंदुओं की संख्या दिन प्रति दिन कम होती जा रही ऐसे में इस पर विचार करने की जरूरत है।












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