Gorakhpur News: DDU University के अंग्रेजी विभाग के शोधार्थियों ने किया यह खास काम
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग में शनिवार को "शब्द एंड स्टैंज़ा: बाइलिंग्वल क्रिएटिव वॉइसेस" शीर्षक से एक प्रेरणादायक काव्य सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभाग के शोधार्थियों और छात्रों ने हिंदी और अंग्रेज़ी में स्वरचित कविताओं का पाठ किया, जो उनकी रचनात्मक प्रतिभा और साहित्यिक कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन था।
कार्यक्रम की शुरुआत ज़ेहरा शामशीर की मार्मिक कविता अनहर्ड वॉयसेस से हुई, जिसमें अनसुनी आवाज़ों के संघर्ष को भावपूर्ण अभिव्यक्ति मिली। इसके बाद दिव्या मिश्रा ने अ ब्लाइंड गर्ल के माध्यम से साहस और संघर्ष की अनोखी यात्रा प्रस्तुत की। प्राची रस्तोगी की कविता द साइलेंट फॉल ऑफ ड्रीम्स ने आकांक्षाओं की नाजुकता को प्रभावी ढंग से दर्शाया, जबकि मृणाल मंजरी की एक सवाल यूं ही ने श्रोताओं को विचारमग्न कर दिया।

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ऋचा पल्लवी की कविता फीनिक्स ने आशा और पुनर्निर्माण का प्रतीक पेश किया। स्मृति वर्मा की ग्लिंप्स ऑफ यू ने प्रेम और प्रतीक्षा को सुंदरता से उकेरा। अंबिका की हाऊ कैन आई लव मोर दैन यू ने समर्पण और प्रेम की गहराइयों को छुआ। नंदिनी वर्मा की मेहनत ने परिश्रम के महत्व को रेखांकित किया, और जगदंबा वर्मा की सच्ची श्रद्धांजलि ने कार्यक्रम को एक भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम में बी.ए. की छात्रा पल्लवी शर्मा ने भी अपनी कविता प्रस्तुत की:
"प्रकट होकर सहज शंकर मधुर विषपान करते हैं,
जहाँ पर पूज कर पत्थर को भी भगवान कहते हैं।
रहते हैं जहाँ एक साथ में हर मज़हबों के लोग,
अकेला मुल्क है जिसको हम हिंदुस्तान कहते हैं।"
सत्र का समापन रोहिनी सिंह की खूबसूरत ग़ज़ल से हुआ, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे आयोजन को एक परिपूर्ण समापन प्रदान किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने शोधार्थियों की असाधारण रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल साहित्यिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि छात्रों को अपने विचारों को व्यक्त करने और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में योगदान देने का मंच भी प्रदान करते हैं।उन्होंने यह भी बताया कि इस सत्र में प्रस्तुत कविताओं को संकलित कर एक पुस्तक के रूप में बहुत जल्द प्रकाशित किया जाएगा, जो विभाग के साहित्यिक योगदान को सुदृढ़ करेगी। प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाने के लिए उनमें पुरस्कृत भी किया गया
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने शोधार्थियों और छात्रों को अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह पहल साहित्यिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श कदम है। उन्होंने विभाग की इस अभिनव पहल की प्रशंसा की और शोधार्थियों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में प्रो. हुमा जावेद सब्ज़पोश और डॉ. आमोद राय ने भी विशेष उपस्थिति दर्ज की और प्रतिभागियों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा आयुषी कुशवाहा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन श्रेया पांडे ने प्रस्तुत किया।












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