DDU University और उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय के बीच हुआ MOU, होगा यह बड़ा फायदा

Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता गोरखपुर और बस्ती मंडलों में खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लखनऊ स्थित उद्यान भवन में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत डीडीयूजीयू को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण नीति, 2023 के अंतर्गत थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसी (टीपीआईए) के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।

*एमओयू का उद्देश्य*
यह साझेदारी विश्वविद्यालय को खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का व्यापक निरीक्षण करने और नीति दिशानिर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाती है। डीडीयूजीयू द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर, निदेशालय पात्र उद्यमों को अनुदान और अन्य लाभ प्रदान करेगा।

DDU
उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2023 की प्रमुख विशेषताएं राज्य में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने, निर्यात क्षमताओं को मजबूत करने और एक सुदृढ़ खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:

1. पूंजी अनुदान: संयंत्र, मशीनरी और सिविल कार्यों के लिए व्यय का 35% अनुदान, अधिकतम ₹5 करोड़ तक।
2. महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन: ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पावर यूटिलिटीज पर 90% अनुदान।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर अनुदान: कोल्ड चेन और मूल्य वर्धन संरचना के लिए 50% तक, अधिकतम ₹10 करोड़।
4. छूट और रियायतें: भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क, मंडी शुल्क, स्टांप शुल्क और बाहरी विकास शुल्क पर छूट।
5. निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन: नेपाल, बांग्लादेश और भूटान को छोड़कर अन्य देशों को निर्यात पर 25% माल ढुलाई सब्सिडी।
*भूमिकाएं और जिम्मेदारियां-*
एमओयू के तहत, निदेशालय डीडीयूजीयू को निरीक्षण के लिए उद्यमों की सूची, दिशा-निर्देश और रिपोर्टिंग प्रारूप उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां निम्न होंगी:
• गुणवत्ता मानकों के अनुसार निरीक्षण करना।
• निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना।
• निष्पक्षता, पारदर्शिता और व्यावसायिकता सुनिश्चित करना।

*भुगतान की शर्तें*
नीति के मानकों के अनुसार, विश्वविद्यालय को निरीक्षण सेवाओं के लिए दो किश्तों में भुगतान किया जाएगा, ताकि उद्यमों के लिए समयबद्ध और कुशल निरीक्षण सुनिश्चित हो सके।
इस प्रक्रिया में फूड टेक्नोलॉजी, एमएससी होम साइंस और अन्य कृषि आधारित विभागों के छात्र भी निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने में शामिल किए जाएंगे।

*कुलपति का वक्तव्य*
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा, "यह समझौता विश्वविद्यालय की उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करके खाद्य प्रसंस्करण नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे और राज्य को खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के केंद्र के रूप में विकसित करने में सहयोग करेंगे।"
यह समझौता डीडीयूजीयू की शोध, नवाचार और व्यावहारिक सेवाओं के केंद्र के रूप में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है और सरकार के विकासात्मक लक्ष्यों के साथ तालमेल स्थापित करता है।

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