CAA Protest: 'बेटा नदीम कहां है पता नहीं, घर में खाने को है नहीं केस कैसे लड़ेगे'
गोरखपुर। 20 दिसंबर जुमे की नमाज के बाद गोरखपुर के नखास चौक पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। हजारों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। उसके बाद ताबड़तोड़ छापेमारी का सिलसिला शुरू हुआ। आरोप है कि कई ऐसे लोग भी हैं जिनके घर के सदस्य प्रदर्शन में शामिल भी नहीं हुए उन्हें भी आरोपी बना दिया गया। अब वे सिसककर अपना दर्द बयां कर रहे हैं कि उनके पास खाने को नहीं है, तो वे फिर मुकदमा कैसे लड़ पाएंगे।

'घर में खाने को है नहीं केस कैसे लड़ेगे'
गोरखपुर के कोतवाली इलाके की रहने वाली सितारा देवी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं। सितारा देवी मीडिया से बात करते हुए फफक-फफक कर रो पड़ती हैं। सितारा देवी की मानें तो पति ने दो साल पहले साथ छोड़ा, तो वे लोगों के घरों में चौका-बर्तन करके परिवार का पेट पालने लगीं। लेकिन, 20 दिसंबर को सीएए के विरोध में हुई हिंसा में उसके 17 साल के बेटे नदीम को पुलिस ने आरोपी बनाया दिया। सितारा कहती हैं कि उनके सिर पर दो बेटियों और एक बेटे को पालने की जिम्मेदारी है। बेटा घटना के बाद से कहां है उन्हें पता नहीं है। सितारा का आरोप है कि पुलिस ने उसे बेवजह फंसा दिया है, घटना के समय उनका बेटा नदीम नमाज पढ़ने गया था। वहीं, नदीम की नानी भी अपना दर्द कैमरें पर बयां करते हुए कहती हैं कि उनके पास केस लड़ने के पैसे नहीं हैं। अब वे क्या करें।

'पुलिस की डर से गायब है सैयद सैफ'
उधर, कोतवाली के ठीक सामने रहने वाली हिना सरकार द्वारा संचालित प्रशिक्षण केन्द्र चलाती हैं। जब घटना हुई, तो उनके घर पर प्रशिक्षण लेने के लिए 75 लड़कियां आई हुईं थीं। वे उन्हें प्रशिक्षण दे रही थी। इस दौरान उनका बेटा भी घर पर ही था। पत्थरबाजी के समय उनके घर पर भी पत्थर आए। उनके घर की खिड़की के कांच टूट गए। किसी तरह उन्होंने लड़कियों को उनके घर भेजवाया। वे बताती हैं कि उनके पति दिव्यांग हैं। घटना के बाद बेटे सैयद सैफ अली को भी पुलिस ने आरोपी बना दिया है। अब उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे बेटे का केस लड़ सकें। घटना के बाद से ही डर के कारण वो गायब है।

फ्री में लड़ेगे केस
ऐसे में पीड़ितों के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं एडवोकेट शोएब सिमनानी। शोएब सिमनानी की मानें तो बहुत से ऐसे पीड़ित हैं जिनके फोटो न तो उन 60 लोगों में शामिल हैं, जिनके हाथ में पत्थर हैं और न ही वे पत्थरबाजी की घटना में शामिल रहे हैं। बहुत से ऐसे परिवार भी हैं, जिनके घर में खाने को पैसे तक नहीं हैं। उनके बच्चों को पुलिस ने निर्दोष होने के बावजूद नाम डालकर प्रताड़ित कर रही है। ऐसे लोगों का केस वे निःशुल्क लड़ने के लिए खड़े हुए हैं।












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