Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में सौ साल बाद बन रहा यह दुर्लभ संयोग, ज्योतिषाचार्य की इन बातों का रखें ध्यान
Pitru Paksha 2025 Latest News in Hindi Uttar Pradesh: पितरों को समर्पित पितृ पक्ष की शुरुआत सितंबर माह की 7 तारीख को हो रही है। वहीं इसका समापन 21 सितंबर, रविवार को हो रहा है। इस पक्ष में पितरों का तर्पण, श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। लेकिन इस बार पितृ पक्ष के शुरुआत में ही सूतक काल लग रहा। इसके साथ ही 100 साल बाद एक दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने ज्योतिषाचार्य डॉक्टर
अर्चना शुक्ला से खास बातचीत की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की।
पूर्णिमा तिथि से शुरू
उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर समाप्त होता है। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के रूप में हो रही है। वहीं प्रतिपदा 8 सितंबर, द्वितीया 9 सितंबर, तृतीया 10 , चतुर्थी 11, पंचमी - षष्ठी 12 सितंबर, सप्तमी 13, अष्टमी 14, मातृणवमी 15, दशमी 16, एकादशी 17, द्वादशी 18, त्रयोदशी 19, चतुर्दशी 20 व सर्व पितृ अमावस्या 21 सितंबर को है।

सूतक काल
उन्होंने बताया कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर 2025 को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा और इसकी समाप्ति 8 सितंबर 2025 को रात 1:26 बजे होगी। कुछ अन्य जानकारी के अनुसार, सूतक काल दोपहर 1:57 बजे से शुरू होगा, क्योंकि ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और सूतक काल इसके 9 घंटे पहले शुरू होता है।
सूतक काल के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
- शुभ कार्य: पूजा, हवन, यज्ञ, मूर्ति स्थापना, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।
- भोजन: सूतक काल में भोजन पकाना या खाना नहीं चाहिए। खाने पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते या दूर्वा डालना चाहिए।
- भगवान की मूर्तियों का स्पर्श: सूतक काल के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए और मंदिरों के कपाट बंद कर देने चाहिए।
- बाल और नाखून काटना: सूतक काल के दौरान बाल काटने या नाखून काटने से बचना चाहिए।
सूतक काल में करें यह काम
सूतक काल के दौरान भगवान के मंत्रों का जप करना और अपने इष्ट देवता का स्मरण करना चाहिए। इससे सूतक काल के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है।
सौ साल बाद दुर्लभ संयोग
आस्था और विज्ञान दोनों ही लिहाज से यह पितृ पक्ष बेहद खास होने जा रहा है। इस अवधि में 7 से 8 सितंबर को जहां चंद्रग्रहण लग रहा है वहीं इसके समापन यानी 21- 22 सितंबर को सूर्य ग्रहण लग रहा है। जो एक दुर्लभ संयोग है और सौ साल बाद बन रहा है।












Click it and Unblock the Notifications