Gorakhpur News: डीडीयू यूनिवर्सिटी और लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल के बीच हुआ खास एमओयू, होगा यह फायदा
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, नेपाल ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल लुंबिनी गया। लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुबरन लाल बज्राचार्य ने गर्मजोशी से प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म, विधि, प्रबंधन, कृषि वानिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और सतत विकास में ट्विन एवं डुअल डिग्री कार्यक्रम के शुरुआत करने पर सहमति हुई।एमओयू का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम के अनुरूप छात्र इंटर्नशिप के साथ-साथ छात्र और संकाय सदस्यों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करना है।दोनों विश्वविद्यालय करुणा, ज्ञान और जागरूकता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित एक गतिशील अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो पूनम टंडन ने कहा कि यह एमओयू दोनों विश्वविद्यालयों का अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रोफेसर पूनम टंडन ने अकादमिक अनुसंधान में विश्वविद्यालयों की साझी भूमिका पर प्रकाश डाला तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार आगे बढ़ने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की बात कही। कुलपति ने जोर देते हुए कहा कि इस सहयोग का प्राथमिक लक्ष्य क्षमता निर्माण में नेपाल और भारत के बीच अंतर को पाटना है।
इस अवसर पर प्रोफेसर बज्राचार्य ने अकादमिक मोर्चे पर दोनों विश्वविद्यालयों को एकसाथ आने पर उत्साह व्यक्त करते हुए शिक्षा एवं अनुसंधान में साझा हितों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के डॉ. तिलक राम आचार्य, रजिस्ट्रार; डॉ. माणिक रत्न शाक्य, डीन, बौद्ध अध्ययन संकाय; डॉ. हरि शरण चन्खू, डीन, मानविकी और सामाजिक विज्ञान संकाय; प्रोफेसर डॉ. बिमलेंद्र कुमार, आईसीसीआर के अध्यक्ष प्रोफेसर; और डॉ. कुमार खड़का, समन्वयक, सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिलेशन्स मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों में प्रोफेसर मनीष श्रीवास्तव, निदेशक रैंकिंग सेल; डॉ. रामवंत गुप्ता, निदेशक इंटरनेशनल सेल; और प्रोफेसर राजर्षि कुमार गौड़, प्रमुख, जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने सहभागिता की।












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