MMMUT: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के निदेशक ने बताया अनुसंधान का सही मतलब,जानिए क्या कहा?
MMMUT Gorakhpur Latest News Uttar Pradesh: मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आज 'वैल्यू बेस्ड रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इन द लाइट ऑफ डिजिटल एज' विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला के आमंत्रित वक्ता के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, उत्तर क्षेत्र, जम्मू के निदेशक डॉ दिलीप कुमार रहे।
कार्यशाला में उपस्थित शोध छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए डॉ दिलीप कुमार ने कहा कि अनुसंधान सिर्फ डिग्री या प्रमोशन पाने का तरीका नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसा होना चाहिए जिससे समाज को लाभ हो। उन्होंने कहा कि अच्छा शिक्षक वह है जिसमें गंभीरता हो और समझाने की क्षमता हो। सिर्फ ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है बल्कि छात्रों में सोचने और समझने की काबिलियत पैदा करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान ऐसा हो जो मुक्त करे, कर्म ऐसा हो जो बांधे नहीं। उन्होंने कहा कि शोध पत्र प्रकाशन मात्र एक उप उत्पाद है, महत्वपूर्ण यह है कि हमारा शोध ईमानदार ढंग से नैतिकता का पालन करते हुए किया गया हो। हर शोध छात्र को बोलने और सुने जाने का मौका मिलना चाहिए नहीं तो धीरे धीरे शोध समुदाय में संवाद की कमी होने लगेगी।

उन्होंने कहा कि आजकल उद्योग जगत का शिक्षण संस्थानों पर भरोसा कम हो गया है जोकि चिंताजनक है। विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शोध एवं विकास सेल को इस दिशा में प्रयास कर इस भरोसे को फिर से स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर शोधार्थी अलग अलग होता है, हर व्यक्ति की सोचने समझने की शक्ति अलग अलग होती है। इसलिए हर छात्र को संवेदनशीलता से गाइड करना चाहिए। उन्होंने शोध संस्कृति को सशक्त करने के पांच सरल मंत्र क्रमशः संपर्क, समयदान, नेतृत्व, कर्म, और ज्ञान बताए। उन्होंने कहा कि ऐसा शोध करें जो सच्चाई, समाज, और शिक्षा के हित में हो।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो जे पी सैनी ने कहा कि हर शोधार्थी को अपना शोध पूरी निष्ठा से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता और समाज हिट होना चाहिए। उन्होंने सहयोगात्मक शोध पर दिए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शोध समस्या का केंद्रबिंदु समाज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसीलिए विश्वविद्यालय ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को शोध में आवश्यक रूप से जोड़े जाने की नीति बनाई है। अब सभी शोध छात्र इन सतत विकास लक्ष्यों को केंद्र में रखकर शोध समस्या का चुनाव करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध और विकास के लिए कटिबद्ध है। इसलिए विश्वविद्यालय अपनी प्रयोगशालाओं का उच्चीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता युक्त शोध कार्य के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी लेकिन शोध में पारदर्शिता, नैतिकता, और औचित्य होना चाहिए।
इसके पूर्व, मुख्य वक्ता एवं कुलपति ने वाग्देवी एवं पंडित मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का आरम्भ किया। अधिष्ठाता शोध प्रो राकेश कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया और स्वागत वक्तव्य दिया। इस अवसर पर प्रो आर के यादव, डॉ नवदीप सिंह, प्रो पी के सिंह, प्रो यू सी जायसवाल, प्रो एस पी सिंह, प्रो डी के द्विवेदी, प्रो बी के पांडेय, प्रो संजय मिश्र, प्रो एस के श्रीवास्तव, प्रो ए के मिश्र, प्रो पी पी पांडेय सहित विभिन्न अधिष्ठाता, शिक्षक एवं शोध छात्र मौजूद रहे।












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