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3 दिन मशक्कत के बाद भी ट्रेन में सीट नहीं मिली, श्रमिक ने बचत के पैसों से खरीदी कार और परिवार के साथ पहुंचा घर

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गोरखपुर। गाजियाबाद में रहकर पेंटर का काम करने वाले लल्लन को काफी कोशिशों के बाद भी जब श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सीट नहीं मिली तो उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। लल्लन बैंक गए और अपनी बचत के 1.9 लाख रुपए निकाले। इनमें से 1.5 लाख में सेकेंड हैंड कार खरीदी। परिवार समेत 14 घंटे के सफर के बाद वह गोरखपुर अपने घर पहुंचे गए। लल्लन और उनका परिवार फिलहाल क्वारंटाइन है। लल्लन का कहना है कि गोरखपुर में रोजी मिली तो गाजियाबाद कभी नहीं जाउंगा।

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श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भी नहीं मिली सीट

श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भी नहीं मिली सीट

यूपी के गोरखपुर जिले के पीपीगंज थाना क्षेत्र के कैथोलिया गांव के रहने वाले लल्लन कई साल से गाजियाबाद में रहकर पेंट और पालिश का काम करते थे। यही काम कर वह परिवार चला रहे थे। इसी बीच कोरोना का संक्रमण फैला और देशभर में लॉकडाउन हो गय। कामकाज बंद हो गया। लल्लन के पास भी कोई काम नहीं बचा। लल्लन अब घर लौटना चाहते थे। श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं तो लल्लन के मन में उम्मीद जगी। लल्लन ने तीन दिन मशक्कत की, लेकिन ट्रेन में उसे और परिवार को सीट नहीं मिल सकी। फिर उसने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया।

संक्रमित होने के डर से बस में नहीं गए

संक्रमित होने के डर से बस में नहीं गए

लल्लन ने कहा, ''25 मार्च को जब लॉकडाउन का ऐलान किया गया तो लगा कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन लॉकडाउन बढ़ता गया। मैंने और परिवार ने घर वापस जाने का फैसला किया। बस और ट्रेनों में सीट पाने के लिए बहुत कोशिश की, लेकिन सीट नहीं मिली। बसों में इतनी भीड़ रहती थी कि डर लगने लगा। सोचा अगर इस तरह बिना सोशल डिस्टेंसिंग के गए तो कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं।''

सेविंग्स से खरीदी कार और पहुंचे गांव

सेविंग्स से खरीदी कार और पहुंचे गांव

लल्लन ने बताया कि जब उन्हें श्रमिक ट्रेनों में भी सीट नहीं मिल पाई तो उन्होंने खुद की कार खरीदने का फैसला किया। वह बैंक गए और बैंक में जमा अपनी सारी बचत का पैसा निकाला। इससे कार खरीदी और परिवार के साथ उसी कार में गांव लौटा। लल्लन 29 मई को परिवार के साथ कार से गाजियाबाद से रवाना हुए थे। 14 घंटे की यात्रा के बाद गोरखपुर पहुंचे। लल्लन ने कहना है कि भले ही उनका पैसा खर्च हो गया हो, लेकिन कम से कम उनका परिवार तो सुरक्षित है।

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English summary
man fails to get seat on Shramik train buy car to return home in gorakhpur
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