Janmashtami Special: रूस,फ्रांस,घाना, जर्मनी,सहित कई देशों के इस्कान भक्त अब गोरखपुर में

श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को है।गोरखपुर स्थित गीता वाटिका राधा-कृष्ण मंदिर के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है

गोरखपुर,15 अगस्त: श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को है।गोरखपुर स्थित गीता वाटिका राधा-कृष्ण मंदिर के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।इससे प्रभावित होकर 190 देशों में फैले इस्कान भक्तों में कई देशों के भक्त 17 अगस्त को गोरखपुर आ रहे हैं।वह यहां एक सप्ताह तक रहेंगे और भगवान श्री कृष्ण की अराधना करेंगे।

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इस्कान के संस्थापक भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का गोरखपुर आगमन हो रहा है।वह इससे पहले भी गोरखपुर आ चुके हैं। पहली बार वे अमेरिका जाने से पहले भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार से मिलने आए थे। अब इस्कान के सन्यासी फिर गोरखपुर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ के विदेशी संन्यासी भारतीय परिधान में एक सप्ताह तक पूरे शहर में जगह-जगह 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे' का गान करेंगे, झूमेंगे और यहां के लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

विदेशी मेहमान 17 अगस्त को शहर में आ जाएंगे और 23 अगस्त तक इस्कान के तारामंडल केंद्र में निवास करेंगे। इन मेहमानों में नाइजीरिया (पश्चिमी अफ्रीका) से दामोदर स्वामी महाराज भी शामिल हैं। वह अफ्रीका महाद्वीप के प्रथम सन्यासी एवं इस्कान के गुरु हैं। इसके अलावा रूस, फ्रांस, घाना, नाइजीरिया, जर्मनी, अर्जेंटीना, भूटान एवं बांग्लादेश से इस्कान भक्तों का आगमन हो रहा है।

क्या है इस्कान
अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कॉ "हरे कृष्ण आन्दोलन" के नाम से भी जाना जाता है। इसे 1966 में न्यूयॉर्क नगर में भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद ने प्रारम्भ किया था। देश-विदेश में इसके अनेक मंदिर और विद्यालय है।विश्व के 190 देशों में इस्कान के 800 से अधिक मंदिर, गुरुकुल और गोशालाएं हैं। इस्कान भगवान कृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं का पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार करता है।

पांच एकड़ में बनेगा मंदिर
शहर में इस्कान का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महेसरा ताल के पास पांच एकड़ जमीन मिल चुकी है। शीघ्र ही संस्था के नाम से जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। इसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। इस्कान का केंद्र तारामंडल में बनाया गया है।

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