DDU University के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में वैल्यू एडेड कोर्स के अंतर्गत हुई यह खास पहल
DDU University Gorakhpur News Uttar Pradesh: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित हो रहे वैल्यू एडेड कोर्स के अंतर्गत आज पाँचवें दिन के व्याख्यान में दो महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल जो कि वर्तमान में, सीएसआईआर- सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई, भावनगर मे मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं तथा हैलोफाइट बायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी डिवीजन के डिविजनल चेयर के पद पर कार्य कर रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल ने सीएसआईआर-रमन रिसर्च फेलोशिप के अंतर्गत ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर प्लांट फंक्शनल जीनोमिक्स, एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया में शोध कार्य किया है। उन्होंने "हैलोफाइट्स से प्राप्त एम वाई बी ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स की मदद से पौधों में एबायोटिक स्ट्रेस मे सहनशीलता को बढ़ावा देने में जैविक इंजीनियरिंग की भूमिका" विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक इंजीनियरिंग तकनीकों के माध्यम से इन एम वाइ बी जीनों को कृषि फसलों में स्थानांतरित कर ऐसे ट्रांसजेनिक पौधों का विकास किया जा सकता है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर वृद्धि और उत्पादन दे सकें।

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दूसरे सत्र में विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, लाइफ साइंस एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर ने प्रतिभागियों को एक अत्यंत समृद्ध शैक्षणिक व्याख्यान दिया। डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी आधुनिक संरचनात्मक जीव विज्ञान का एक क्रांतिकारी उपकरण बन चुका है, जिसकी सहायता से प्रोटीन, एंजाइम एवं वायरस जैसे सूक्ष्म जैव-अणुओं की संरचना को आणविक स्तर पर समझा जा सकता हैं। उन्होंने अपने शोध कार्यों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार इस तकनीक का उपयोग कर उन्होंने मानव हाइड्रोजन सल्फाइड मेटाबॉलिज्म से संबंधित एंजाइमों की संरचना को उच्च विभेदन के माध्यम से जानकर, जिससे उनके कार्य और रोगों में उनकी भूमिका को बेहतर समझा जा सकता है।
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उनका व्याख्यान न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि युवाओं के लिए अनुसंधान की प्रेरणा का स्रोत भी था। व्याख्यान के अन्त मे छात्रों ने कई टापिक से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर डॉ. यादव ने सरल और सटीक भाषा में दिया।
इस अवसर पर बायोटेक्नोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजर्षि कुमार गौड़ ने उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के विशिष्ट-सत्र छात्रों के अकादमिक विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ आचार्य, प्रो. दिनेश यादव, प्रो. शरद कुमार मिश्र, डा. गौरव सिंह एवं डा. पवन कुमार दोहरे उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन विभाग के पीएचडी शोधार्थी राजीव रंजन एवं मनीष सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दिया गया, जिन्होंने वक्ता एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए व्याख्यान मे सभ प्रतिभागियों को भी धन्यवाद ज्ञापन किया।












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