DDU University Gorakhpur ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर की यह खास पहल, होंगे ये फायदे

DDU University Gorakhpur Latest News Hindi Uttar Pradesh: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC) द्वारा "राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020" पर आधारित एक ऑनलाइन उन्मुखीकरण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन 29 जुलाई से 06 अगस्त 2025 तक किया जा रहा है। प्रो. पूनम टंडन कुलपति, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, के संरक्षण में यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा की 5वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर आज, 29 जुलाई 2025 को आरंभ हुआ। इस कार्यक्रम में 60 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शोधार्थी सम्मिलित हैं ने सक्रिय भागीदारी की है।

प्रारंभिक सत्र में स्वागत भाषण देते हुए प्रो. धनंजय कुमार, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग एवं कार्यक्रम संयोजक ने कहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के लिए न केवल नीतिगत समझ विकसित करने का अवसर है, बल्कि वह मंच भी है जहाँ से शैक्षिक बदलाव की शुरुआत होती है। NEP एक मानसिक बदलाव की मांग करती है, और शिक्षक उसकी नींव हैं।

ddu university

मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया (JNCU) के कुलपति प्रो.संजीत गुप्ता ने अपने विचार रखते हुए कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह नीति पाँच स्तंभों पर आधारित है - सुलभता, समानता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व। इसका लक्ष्य 2025 तक सभी छात्रों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक योग्यता सुनिश्चित करना है। साथ ही, यह आलोचनात्मक सोच, संवाद कौशल, रचनात्मकता और चरित्र निर्माण को प्रोत्साहित करती है, और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शैक्षिक विषयों के साथ जोड़ती है।

कार्यक्रम निदेशक प्रो. चंद्रशेखर, यूजीसी-MMTTC, DDU गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर देते हुए कहा इस कार्यक्रम की एक विशेषता यह है

कि इसमें शोधार्थियों को भी प्रतिभाग करने का अवसर दिया गया है। यह आवश्यक है क्योंकि वे भविष्य में शिक्षा प्रणाली के अभिन्न अंग होंगे और शिक्षण उनका प्रमुख उत्तरदायित्व होगा। प्रारंभिक अवस्था में ही उन्हें NEP की गहराई से समझ देना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में प्रतिदिन दो सत्र आयोजित किए जा रहे हैं - प्रथम सत्र दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक एवं दूसरा सत्र अपराह्न 3:45 बजे से 5:15 बजे तक।

प्रथम सत्र में प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रति कुलपति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा की आत्मा में परिवर्तन की बात करती है। यह जरूरी है कि शिक्षकगण नई पीढ़ी को वैश्विक सोच के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जोड़ें। यह कार्यक्रम शिक्षकों को आत्मनिरीक्षण, नवाचार और मूल्यनिष्ठ शिक्षा की दिशा में अग्रसर करता है।

दूसरे सत्र के वक्ता डॉ. रामवंत गुप्ता गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, विभाग बॉटनी, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपने व्याख्यान में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल एक शैक्षणिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और संस्कृति से जुड़ा एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो आने वाली पीढ़ियों के सर्वांगीण विकास को दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को ज्ञान प्राप्ति के साथ-साथ प्रकृति, पर्यावरण और जीवन मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाने पर बल देती है, और यह आवश्यक है किशिक्षकगण इस दायित्व को समझें और अपने शिक्षण में इस समग्र दृष्टिकोण को अपनाएं। डॉ. गुप्ता ने विशेष रूप से स्थायित्वपूर्ण विकास और पर्यावरणीय शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्रों में ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए जो उन्हें प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाए।

यह कार्यक्रम मनोविज्ञान विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के द्वारा समन्वित किया जा रहा है, जिसके संयोजक प्रो. धनंजय कुमार, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग हैं एवं सह-संयोजक डॉ. रश्मि रानी एवं डॉ. प्रियंका गौतम हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+