UP News: देश के प्रमुख शिक्षाविदों में शामिल हुए डीडीयू के प्रोफेसर, मिला यह सम्मान
DDU University News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रेाफेसर अजय कुमार शुक्ल ने देश के शिक्षाविदो में अपनी खास जगह बनाई है। पहले तो उनका चयन देशभर से आए 400 से अधिक नामाकंनों में होता है उसके बाद उन्हें खास अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। यह सम्मान शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु दिया गया है। "चेंजमेकर अवॉर्ड - एकेडेमिया (2025)" सम्मान मुंबई स्थित नोवोटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट होटल में आयोजित "मेकिंग इंडिया एम्प्लॉयबल कॉन्फ्रेंस एंड अवॉर्ड्स" समारोह में दिया गया। यह पुरस्कार इंडिया एजुकेशन फोरम तथा इंडिया एम्प्लॉयर फोरम के संयुक्त तत्वावधान में प्रदान किया गया। चयन प्रक्रिया एक प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल हुआ, जिसमें देश के प्रमुख शिक्षाविद्, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा नीति विशेषज्ञ सम्मिलित थे।

प्रोफेसर अजय शुक्ल ने कहा कि इस सम्मान के लिए मैं इंडिया एजुकेशन फोरम तथा इंडिया एम्प्लॉयर फोरम के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। एक शिक्षक के रुप मैं छात्र छात्राओं सहित समाज के हर वर्ग के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहूंगा। इसके साथ ही मैं हमेशा कुछ नया करने और नया सिखाने के लिए प्रयास करता रहूंगा। मैं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हर क्षेत्र में नए अवसर का और सीखने का प्रोत्साहन दिया ।
जानिए कौन हैं प्रोफेसर अजय शुक्ल
अजय कुमार शुक्ला दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर हैं। जो दो दशक से अधिक समय से शिक्षण कार्य से जुड़े हैं। पिछले 12 वर्षों से प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है तथा उनके शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। अब तक 17 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान की जा चुकी है तथा लगभग इतनी ही संख्या में शोधकार्य प्रगति पर है, जो उनके सक्रिय मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा, कौशल विकास और विद्यार्थियों की प्लेसमेंट को सुदृढ़ करने के लिए कई प्रभावी पहलें कीं, जिनसे विश्वविद्यालय में अकादमिक और औद्योगिक सहयोग की नई परंपरा स्थापित हुई है। आप के सकारात्मक प्रयासों से कई छात्रों ने जीवन में बेहतर मुकाम हासिल कर लिया है। आप ने समकालीन विषयों पर 150 से अधिक व्याख्यान दिए हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के प्रति नई दृष्टि और प्रेरणा प्रदान की है।












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