गठबंधन की चर्चाओं की बीच अरविंद राजभर ने दिखाए तेवर, बोले- 'BJP के सिंबल पर नहीं लड़ेगे चुनाव'

Ghazipur News: लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी है। राजनीतिक पार्टियां अपने कुनबे और बढ़ाने की कोशिश में जुट गए है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर जल्द ही सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।

ऐसा दावा भी किया जा रहा है कि बीजेपी गाजीपुर लोकसभा उपचुनाव में ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर पर दांव लगा सकती है। साथ ही, ऐसी भी चर्चा है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजभर को योगी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे दावों को खुद ओम प्रकाश राजभर और अरविंद राजभर ने गलत बताया है।

Arvind Rajbhar

अरविंद राजभर ने कहा कि यह खबर गलत है सुभासपा कभी भी बजेपी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ेगी। कहा कि लड़ाने के लिए हमारी पार्टी के पास झण्डा और चुनाव चिन्ह और जनसमर्थन पर्याप्त है। तो वहीं, गठबंधन की चल रही अटकलों के बीच राजभर के बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर का बड़ा बयान सामने आया है।

अरविंद राजभर ने कहा कि अगर बीजेपी उनकी पार्टी की शर्तों को मान लेती है तो लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने पर कोई गुरेज नहीं हैं। हालांकि, इस बीच उन्होंने यह बात भी साफ कर दी कि वह खुद या उनकी पार्टी का कोई भी नेता किसी भी सूरत में बीजेपी के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ेगा।

इस दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान के निर्णय को भी नहीं मानूंगा और मैं बीजेपी के सिंबल पर किसी शर्त पर चुनाव नहीं लड़ूंगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसी चर्चाएं है कि सुभासपा के कुछ नेताओं को बीजेपी अपने टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है।

राजभर ने मीडिया से बातचीत के दौरान उन मीडिया रिपोर्ट्स को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें बीजेपी से गठबंधन की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बढ़ते राजनीतिक रसूख से विपक्षी राजनीतिक दल परेशान हैं। यह सभी लोग जानते हैं कि पूर्वांचल में सुभासपा की अच्छी राजनीतिक पकड़ है।

राजभर ने बीजेपी से गठबंधन की बात पर कहा कि अभी तक दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच इस संबंध में कोई गंभीर बातचीत नहीं हुई है। ऐसे में गठबंधन की बात बेमानी है। कहा कि बीजेपी के साथ जिन शर्तों पर 2017 में गठबंधन हुआ था। जब तक उनपर फिर से सहमति नहीं बनती और गठबंधन के अन्य शर्तों पर गंभीर चर्चा नहीं होती तब तक गठबंधन को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

इस दौरान उन्होंने कहा कि 2019 में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें घोसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। हमने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अगर भाजपा उन्हें पार्टी के सिंबल पर लड़ने को लेकर राजी हो जाती, तो बेशक चुनाव लड़ते। बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने को वे तैयार नहीं हुए थे। मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद ने दावा किया कि अन्य दलों में उनकी पार्टी और भाजपा के गठबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग भी हमारे से गठबंधन करने को लेकर हमसे संपर्क में हैं। वे कह रहे हैं कि पुरानी बातों को भुलाकर बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए गठबंधन नए सिरे से किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने गाजीपुर लोकसभा उपचुनाव में संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर उम्मीदवार बनाए जाने पर किए गए सवाल पर खुशी जताई।

अरविंद ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि जो लोग भी उनकी पार्टी के राजनीतिक ताकत को कम आंकते थे, उन्हें जवाब मिल गया है। सुभासपा आज ऐसी स्थिति में है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी के लोकसभा कैंडिडेट के तौर पर उनके चुनाव लड़ाने की चर्चा हो रही है।

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