जनता की शिकायतों पर नहीं दिया ध्यान, डीएम ने रोक दी अधिकारियों की सैलरी
जनता की शिकायतों को ना सुनना गाजियाबाद के कई अधिकारियों को भारी पड़ गया है। जिलाधिकारी ने 11 अधिकारियों का वेतन रोक दिया है।
गाजियाबाद। जनता की शिकायतों को गम्भीरता से ना लेना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के अफसरों को भारी पड़ गया है। जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने नगर निगम से जुड़े अलग-अलग विभाग एवं प्रशासन और राजस्व विभाग के 11 बड़े अधिकारियों का नवंबर माह का वेतन रोक दिया है।

अपने बोल्ड फैसलों के लेकर गाजियाबाद के लोगों में मशहूर हो चुकीं डीएम निधि केसरवानी ने जनता की ओर से आई ऑनलाइन शिकायतों पर अधिकारियों के ढीले रवैये से नाराज होकर नगर आयुक्त समेत प्रमुख पदों पर बैठे 11 अधिकारियों वेतन रोक दिया है। डीएम के फैसले ने अधिकारियों में खलबली मचा दी है।
नगर आयुक्त अब्दुल समद के खिलाफ डीएम ने पाया कि वो जनता की शिकायतों को कतई गंभीरता से नहीं लेते हैं। तहसील दिवस, जनता दर्शन जैसे मौकों पर लोग ऑनलाइन भी अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, जिस पर मुख्यमंत्री की भी निगाह रहती है।
जिलाधिकारी ने बताया है कि जिन अधिकारियों का वेतन रोका गया है, उनका वेतन तभी रिलीज किया जाएगा जब वो इस बात का प्रमाण देंगे कि सभी शिकायतों को उन्होंने सुना लियै है और कोई शिकायत लंबित नहीं है।
पहले भी चर्चाओं में रहे हीं डीएम निधि केसरवानी
निधि केसरवानी अपने अलग अंदाज में काम करने के लिए पहचान रखती हैं। फिल्मी अंदाज में फैसला लेना उनके काम करने के स्टाइल में शुमार है।
हाल ही में केसरवानी तब चर्चा में आईं थी, जब नोटबंदी के बाद परेशानी का सामना कर रहे गाजियाबाद के लोगों की समस्या का हल निकालने के लिए उन्होंने शासन को पत्र लिखा।
नोट बंदी के बाद से बैंकों में हुई नई करेंसी की किल्लत और लोगों के हंगामे के बाद डीएम ने इस मामले में शासन से हस्तक्षेप करने की सिफारिश की और ग्रामीण इलाकों तक नई करेंसी पहुंचे इसका इंतजाम करने की मांग की है।












Click it and Unblock the Notifications