ढोल-शहनाई बजाकर बच्चों को स्कूल बुलाता है ये शिक्षक, गाकर और नाचकर कराता है पढ़ाई

Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात के साबरकांठा जिले में एक शिक्षक ढोल-शहनाई बजाकर बच्चों को स्कूल बुलाता है। स्कूल में वह बच्चों को खुद गीत गाकर और नाचकर पढ़ाई कराता है। ऐसा करने के पीछे की वजह वह बच्चों की स्मरण शक्ति बेहतर होना बताता है। यह शिक्षक आदिवासी क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात है। इसलिए, बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के लिए उसने अनूठा तरीका अपनाया है। इस शिक्षक के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब देखे जा रहे हैं।

आदिवासी इलाके में बच्चों की ऐसे पढ़ाई कराता है शिक्षक

आदिवासी इलाके में बच्चों की ऐसे पढ़ाई कराता है शिक्षक

शिक्षक की पहचान विशाल पंड्या के तौर पर हुई है, जो कि छोटा उदयपुर में बोडेली तालुका में बतौर सीआरसी समन्वयक तैनात हैं। उनका कहना है कि उन्होंने छुट्टी के दौरान बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए ढोल और शहनाई का सहारा लिया है। छत्राली गाँव में जहाँ आदिवासी आबादी है, वहां विशाल पंड्या माता-पिता समझाते हैं कि वैकेशन के दौरान बच्चे कुछ समय के लिए स्कूल में आएं। वे यहीं पढ़ें-नाचें और गाएं।

'स्कूल में बैठकर वक्त बर्बाद नहीं करना'

'स्कूल में बैठकर वक्त बर्बाद नहीं करना'

विशाल पंड्या का मानना है कि शिक्षक को आराम से स्कूल में बैठकर वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए। वहीं, विशाल पंड्या के वीडियो देखने वाले लोग कहते हैं कि बच्चों को शिक्षित करने के लिये माता-पिता और सरकार से ज्यादा ऐसे शिक्षक जागरूक हो रहे हैं। नई पीढ़ी का यह शिक्षक स्कूल में सरकार के पैसे बेजां बरबाद नहीं कर रहा है। उसमें बच्चों को शिक्षा देने की लगन है। जब गुजरात सरकार निरक्षरता को दूर करने के लिए स्कूल में एडमिशन से जुड़े और लड़कियों के लिये शिक्षा अभियान चलाती है, तब ऐसे शिक्षकों की जरूरत बढ़ जाती है।

गांव के सरपंच और माता-पिता कर रहे सपोर्ट

गांव के सरपंच और माता-पिता कर रहे सपोर्ट

विशाल बच्चों के माता-पिता से अनुरोध करते हैं कि वे छुट्टियों के दौरान केवल दो घंटे के लिए अपने बच्चों को स्कूल भेजें। गर्मियों की छुट्टी में बच्चों के खेलने का समय होता है, लेकिन विशाल पंड्या ने बच्चों और उनके माता-पिता से दिन में से केवल दो घंटे मांगे हैं। वे इन दो घंटों में बच्चों की शिक्षा की नींव को प्राप्त करने का इरादा रखते हैं, ताकि बच्चा फेल न हो पाये। हालांकि, गांव के सरपंच और माता-पिता इस शिक्षक का स्वागत करते हैं और बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो रहे हैं।

अपनी छुट्टियों की नहीं, बच्चों के भविष्य की चिंता है

अपनी छुट्टियों की नहीं, बच्चों के भविष्य की चिंता है

गौरतलब है कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर कम है, इसलिए शिक्षक इसमें सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं। छुट्टी के समय में केवल दो घंटे के लिए बच्चों को स्कूल भेजने का शिक्षक का प्रयास अच्छा बताया जा रहा है। अगर शिक्षक बच्चों को पढ़ाएगा तो उसकी भी छुट्टियों पर असर पड़ेगा। हालांकि, समाज को शिक्षा देने की ठान लेने वाले शिक्षक को छुट्टी की नहीं बच्चों के भविष्य की चिंता है।

लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी सभी जानकारी यहां पढ़ें

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+