मोदी सरकार ने दी नई मेट्रो को मंजूरी, देश की एकमात्र गिफ्ट सिटी और महात्मा मंदिर तक भी जाएगी
Gujarat News, गांधीनगर। लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने गुजरात में गांधीनगर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। अहमदाबाद के बाद मेट्रो रेल के दूसरे फेज में, इस मेट्रो के जरिए गिफ्ट सिटी और गांधीनगर में महात्मा मंदिर को कवर किया जाएगा। इस परियोजना में 6800 करोड़ खर्च आने का अनुमान है। जिसमें भी सरकार ने जापान से आर्थिक मदद मांगी है।

गुजरात में नई मेट्रो रेल की जद में होंगी ये जगहें
अहमदाबाद से मेट्रो रेल मोटेरा पहुंचने के बाद मेट्रो ट्रैक गांधीनगर से जोड़ा जाएगा। मोटेरा से मेट्रो ट्रेक तपोवन सर्कल आयेगा, वहां से कोबा सर्कल और फिर गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गिफ्ट सिटी, इन्फोसिटी, सचिवालय, अक्षरधाम मंदिर और अंत में महात्मा मंदिर का रूट तैयार हो जाएगा।

देशी की एकमात्र गिफ्ट सिटी तक जाएगी मेट्रो
28.5 किलोमीटर के इस रूट की एक लाइन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से पीडीपीयू और गिफ्ट सिटी तक जाएगी। इस रूट में 20 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। पिछले हफ्ते भारत सरकार में मेट्रो प्राधिकरण और सार्वजनिक निवेश बोर्ड के बीच हुई बैठक में गांधीनगर को मेट्रो रेल के दूसरे चरण में जोड़ा गया है। केंद्र सरकार ने गिफ्ट सिटी से मेट्रो रेल लेने के लिए कुछ मुद्दे उठाए थे, लेकिन राज्य ने दूसरे चरण की मेट्रो लाइन को छह किलोमीटर को काट दिया है। आखिर में केंद्र सरकार ने संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दे दी है।

इतनी दूरी घट जाएगी
मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण की प्रारंभिक योजना को अक्टूबर 2017 में गुजरात सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था। इस मार्ग की कुल लंबाई 34.59 किलोमीटर थी, जिसमें पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय (पीडीपीयू) से अलग लाइन का निर्माण किया गया था। इसके अलावा, गिफ्ट सिटी के परिसर के भीतर तीन मेट्रो स्टेशन बनाने की योजना थी, लेकिन अब छह किलोमीटर की सड़क कम हो गई है।
डीपीआर में सुधार के अनुसार, गांधीनगर मेट्रो रेल में दो दो ट्रैक होंगे। पहला 22.84 किलोमीटर का ट्रेक मोटेरा को महात्मा मंदिर से जोड़ेगा और दूसरा 5.42 किलोमीटर का ट्रेक गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी और गिफ्ट सिटी को जोड़ेगा।

प्रोजेक्ट 4 साल में पूरा होने की उम्मीद
दूसरे चरण की लागत बढ़कर 6,769 करोड़ रुपये हो जाएगी। बताया जा रहा है कि परियोजना की देरी के कारण कीमत में यह वृद्धि हुई है। वहीं, दूसरे चरण के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी से 3400 करोड़ का ऋण मांगा गया है। इस स्तर पर भूमि और पुनर्वास लागत 194 करोड़ आंकी गई है। यह योजना चार साल में पूरा होने की उम्मीद है।
वर्तमान में, अहमदाबाद मेट्रो परियोजना का पहला चरण 10,773 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है, जो 2021 तक पूरा हो जाएगा। दूसरा चरण 2023 के लिए निर्धारित किया गया है, अर्थात, गांधीनगर को अभी भी मेट्रो रेल के लिए 2023 तक इंतजार करना होगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गुजरात में जिन दो जगह मेट्रो का ऐलान किया था, सूरत उनमें से एक था।












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