खुले कुएं और बिजली की बाड़ की वजह से गुजरात में अब नहीं मरेंगे शेर, 182 की जा चुकी है जान
Gujarat News, गांधीनगर। सासन गिर जंगल क्षेत्र में शेरों की अप्राकृतिक मौतें रोकने के लिए गुजरात सरकार अब कुछ ठोस कदम उठाने जा रही है। इसके लिए यहां फॉरेन डिपार्टमेंट के अफसरों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अफसरों को चेतावनी में कहा गया है कि शेरों की जान लापरवाही की वजह से नहीं जानी चाहिए। खुले कुएं और बिजली की बाड़ के कारण शेर बेमौत मरते हैं, जिसके लिए सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे।

..ताकि बेमौत नहीं मरें शेर, इसलिए ये कर रही सरकार
सरकार ने सूबे में खुले कुओं पर पेरापेट बनाने का काम शुरू कराया है। इसकी जिम्मेदारी स्थानीय एनजीओ और कुछ निजी कंपनियों को सौंपी गई है। वहीं, जहां बिजली की बाड़ हैं, उन्हें भी हटाने की कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही इस इलाके में ट्रेनों की रफ्तार भी कम कर देने की सूचना जारी की गई है। वन विभाग अधिकारियों को संबंधित रणनीति के तहत ही काम करने के आदेश दिए गए हैं।

अप्राकृतिक मौतों की घटनाएं यहां सबसे ज्यादा
उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, शेरों की अप्राकृतिक मौतों की रोकथाम के लिए कार्रवाई शुरू की गई है। वैसे तो सासण गिर में शेरों की कुदरती मौत होती ही है, मगर बेमौत भी बहुत से शेर मारे गए हैं। बीते 3 सालों में सूबे में 182 शेर बेमौत मर गए। जिनमें मौत की बड़ी वजह खुले कुएं, बिजली की बाड़ और ट्रेन दुर्घटना होना थी।

हाईकोर्ट ने सरकार को दिए थे ये निर्देश
गुजरात उच्च न्यायालय ने सरकार को शेरों की मौत के सामने गंभीर कदम उठाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद सरकार की ओर से गिर फ़ॉरेस्ट में रेलवे को निर्देश दिया गया कि वे गुड्स-ट्रेनों की गति कम करें, ताकि शेरों को चोट न लगे और न ही वे मर सकें। इसके अलावा यात्रियों के लिए वाहनों की गति भी तय की गई है। वनविभाग अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अक्सर शेर कुएं में गिरते हैं। इसके अलावा गुड्स-ट्रेन से टकरा जातें है। खेत में की गई फेसिंग का करंट भी उनकी जिंदगी छीन लेता है। वन क्षेत्र में प्रवासी वाहनों से टकराने की वजह से भी शेरों की जान गई हैं।

वायरस की वजह से 24 शेरों की मौत
हाल ही में वायरस के कारण 24 शेरों की मौत हो जाने का आंकड़ा सामने आया था। वहीं, रिपोर्ट में ये भी सामने आया था कि सासन गिर के पास 20,000 से अधिक कुएं हैं। अब इन कुएं की पेरापेट का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि, गुजरात में शेरों के शिकार पर पूरी तरह रोक है। इसी वजह से पिछले कई वर्षों में ऐसी कोई घटना सामने आई नहीं है।












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