मैंने चुपके से सुनीं कॉल सेंटर वाले लड़के-लड़की की बातें!
[अजय मोहन] हेडलाइन पढ़ते ही आपने मुझे कोसा होगा, कि मैंने किसी की पर्सनल बातें सुनी क्यों? हां आपका हक भी है यह कहने का! लेकिन आपने इस हेडलाइन में यह सोचकर ही क्लिक किया है, कि जरूर इसमें मसालेदार चटपटी बातें होंगी। हां चटपटी बातें तो हैं, लेकिन........। लेकिन का जवाब मैं नहीं दूंगा, वो आपको नीचे पढ़ना पड़ेगा।
10 जुलाई 2015 को सुबह 11:59 बजे मेरे फोन की घंटी बजी। ट्रू कॉलर से पता चला कि यह कॉल गाजियाबाद, दादरी, उत्तर प्रदेश से आ रही है। मैंने कॉल रिसीव की और कहा हैलो... उधर से कोई जवाब नहीं आया। अचानक सुनायी दिया, "मैं अलवी हो गया यार नाम तेरा पढ़के...." बस फिर क्या था, मैंने फोन को अपने कानों से लगा दिया। तब मैंने एक लड़का और एक लड़की के बीच क्या सुना आपके सामने रख रहा हूं। चूंकि मैं न लड़के को जानता हूं न लड़की को, इसलिये दोनों को काल्पनिक नाम दे रहा हूं- अनिमेश और गुंजन।
कॉल सेंटर के अंदर फोन की घंटियों के साथ हो रहे शोर के बीच हुईं ये बातें....
अनिमेश- मैं अलवी हो गया यार... नाम तेरा पढ़के, नाम तेरा पढ़के।
गुंजन- तू चुप नहीं रह सकता है।
अनिमेश- इतने शोर में तुझे मेरा गाना ही सुनायी दे रहा है, बाकियों की बक-बक से डिस्टर्ब नहीं हो रहा?
गुंजन- बाकी दूर हैं, तू तो मेरे सिर पर बक-बक कर रहा है।
अनिमेश- सुबह से मूड खराब है, गाना गाकर मूड अच्छा कर रहा हूं।
गुंजन- मूड खराब है, तो बाहर जा बक-बक क्यों कर रहा है।
अनिमेश- नहीं यार दो दिन से सारी कॉल ब्लैंक जा रही हैं, पता नहीं टार्गेट कैसे पूरा होगा।
गुंजन- मेरा भी यही हाल, सिर्फ एक बंदे ने बात की। उसे आज कॉल करना है।
अनिमेश- ब्लू आइज़, हिपनो टाइज़....
गुंजन- तू गाना बंद कर तो मैं कल वाले बंदे को कॉल करूं।
अनिमेश- करले-करले, ऐसे बंदे रोज-रोज नहीं मिलते। अच्छे से समझइयो अपना हेल्थ प्लान।
गुंजन- नहीं यार, मुझे डाउट है...
गुंजन फिर से- लेकिन अगर इस हफ्ते कुछ नहीं बिका, तो...
अनिमेश- तो क्या करेगी तू... सैलरी ही तो रुकेगी और क्या होगा।
गुंजन- नहीं बात सैलरी की नहीं है, मैं सोच रही थी पापा को कुछ पैसे दे दूं टोनू की फीस के लिये।
अनिमेश- तु तो इमोशनल हो गई।
गुंजन- एक्चुली स्कूल वाले जुलाई में 30 हजार फीस मांग रहे हैं, पापा को वही टेंशन है।
अनिमेश- तु कहां से दे पायेगी 30 हजार?
गुंजन- हां पता है, लेकिन कुछ तो दे सकती हूं, शायद पापा का बोझ कम हो जाये।
अनिमेश- चल तू परेशान मत हो मेरे से ले लियो कुछ पैसे। बाद में लौटाण देना।
गुंजन- नहीं तेरे पास पैसे कहां से आयेंगे...
बस कॉल कट गई
इस कॉल को सुनने के बाद सबसे पहले मैं इस लड़की को सैल्यूट करना चाहूंगा, जो अपने पिता का बोझ कम करने की सोच रही है। फिर उस लड़के की तारीफ जो अपनी सहयोगी के हर सुख-दु:ख में उसके साथ खड़ा है। मुझे नहीं पता कि गुंजन अपने पिता को कितने पैसे देगी, अनिमेश उसे पैसे देगा भी या नहीं, लेकिन एक बात समझ में आ गई। कि गुंजन अकेली बेटी नहीं है, जो अपने पिता के दर्द को समझती है, देश की करोड़ों बेटियां हैं जो चाहती हैं कि वो अपने पिता का सहारा बन सकें।
और अनिमेश जैसे हरफन मौला लड़कों पर भी हमें गर्व होना चाहिये, जो कम सैलरी में नौकरी करने के बावजूद दूसरों का भला सोचते हैं। अनिमेश कम से कम उन लड़कों से लाख गुना अच्छा है, जो लड़कियों की मदद करने के बजाये उनकी आबरू लूटने के चक्कर में रहते हैं। Hats off to Gunjan and Animesh!!!













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