World Population Day: 70 वर्षों में भारत 35 करोड़ से 140 करोड़ जनसंख्या पार
World Population Day: वर्ल्ड पॉपुलेशन डे का सुझाव डॉ. केसी जकारिया ने दिया था। उस समय वह विश्व बैंक में सीनियर डेमोग्राफर के रूप में काम कर रहे थे। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल ने 1989 से विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की सिफारिश की। दरअसल, इसी साल 11 जुलाई को विश्व की जनसंख्या 5 अरब हो गयी थी। इसलिए इसे 'फाइव बिलियन डे' के नाम से जाना गया। विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य परिवार नियोजन के महत्व, लैंगिक समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों जैसे विभिन्न जनसंख्या मुद्दों पर लोगों की जागरूकता बढ़ाना है। इन मुद्दों पर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए 1990 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे घोषित कर दिया।
आपको बता दें कि 2011 में वैश्विक जनसंख्या 7 अरब के आंकड़े तक पहुंच गयी थी। 2023 में यह लगभग 8.04 अरब है और 2030 में यह बढ़कर लगभग 8.5 अरब तक पहुंच जायेगी। जबकि वर्ष 2050 में इसके 9.7 अरब और 2100 में 10.9 अरब तक होने की उम्मीद है।

वर्ष 2023 की थीम
हर वर्ष किसी थीम पर आधारित होने वाले विश्व जनसंख्या दिवस की 2023 की थीम "लैंगिक समानता की शक्ति को उजागर करना (Unleashing The Power Of Gender Equality" है। मगर इस थीम को रखने का क्या मकसद है? दरअसल, यह थीम घरेलू हिंसा को रोकने में मदद करेगी। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार 2022 में दुनियाभर की 16% महिलाओं को घरेलू शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ी थी। लैंगिक समानता इस तरह के अत्याचारों को रोकने में मदद करती है। क्योंकि यह एक मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा भी है।
यूनिसेफ के आंकड़ों की बात करें तो विश्व में 4 में से 1 लड़की के पास जरूरी शिक्षा नहीं है। जिस कारण उन्हें रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता। यदि लैंगिक भेदभाव कम हो जायेगा तो महिलाएं अधिक शिक्षित हो पाएंगी। इससे उन्हें रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस थीम को लेकर कहा कि लिंग-आधारित भेदभाव हर किसी को नुकसान पहुंचाता है। जिसमें महिलाएं, लड़कियां पुरुष और लड़के सभी शामिल हैं। महिलाओं में लैंगिक भेदभाव कम करने से सभी लोगों, समुदायों और देशों का उत्थान होता है।'
भारत में जन्मदर व अन्य आंकड़े
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में 2021-22 में 2.03 करोड़ से अधिक बच्चों का जन्म हुआ था। यानी 2021-22 में हर दिन देश में औसतन 56 हजार से ज्यादा बच्चे पैदा हुए। जबकि 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान दो करोड़ के आसपास बच्चों का जन्म हुआ था। यानी 2020-21 की तुलना में वर्ष 2021-22 में 1.32 लाख ज्यादा बच्चों का जन्म हुआ है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इन्फोर्मेशन सिस्टम (HMIS) ने 2021-22 में एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें बताया गया कि भारत में शिशु मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और अंडर-5 मोर्टेलिटी रेट में गिरावट आई है। जबकि भारत में जीवन प्रत्याशा 1970-75 के 49.7 वर्ष से बढ़कर 2012-16 में 68.7 वर्ष हो गयी है।
1950 से अब तक के भारतीय जनसंख्या के आंकड़े
यूनाइटेड नेशंस - वर्ल्ड पापुलेशन प्रोस्पेक्टस के अनुसार 1950 में भारत की जनसंख्या 35.70 करोड़ थी। इसके बाद 2.21 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1951 में 36.49 करोड़ हो गयी। 1961 में यह 45.63 करोड़ थी। जबकि 10 साल बाद भारत की जनसंख्या 56.99 करोड़ पहुंच गयी। साल 1981 में 71.28 करोड़ से आकंडा 1991 में 88.89 करोड़ हो गया। साल 1997 में जनसंख्या 100 करोड़ के पास पहुंच कर 1,002,335,230 हो गई थी। इसके बाद 2001 में यह जनसंख्या का आंकड़ा 1,078,970,907 पहुंचा। साल 2011 में भारत की पॉपुलेशन 125 करोड़ से अधिक हो गई थी। 2021 में यह आंकड़ा 140 करोड़ से अधिक पर था। तो वहीं मौजूदा 2023 में यह आंकड़ा 142 करोड़ है।
चीन और भारत
संयुक्त राष्ट्र संघ में जनसंख्या संबंधी डेटा मामलों के प्रमुख जॉन विल्मॉथ ने 24 अप्रैल 2023 को आंकड़े जारी करते हुए बताया कि भारत, चीन को पीछे छोड़ कर विश्व में सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाने के करीब पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट में उनकी इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया है। जॉन के अनुसार चीन और भारत की कुल आबादी विश्व की कुल आठ अरब जनसंख्या के एक-तिहाई से भी अधिक है। इन रुझानों का मुख्य कारक इन दोनों देशों में प्रजनन स्तर है।
साल 1971 में इन दोनों देशों में प्रजनन का स्तर लगभग समान था। प्रति महिला लगभग छह बच्चों का जन्म हो रहा था। अब साल 2022 तक चीन विश्व में सबसे कम प्रजनन दर वाले देशों में शुमार हो गया है। 1980 के दशक में चीन एक बच्चे की नीति लेकर आया। पर 2016 में उस नीति को समाप्त कर दिया गया है। अब चीन में प्रति महिला दो से तीन बच्चों के जन्म के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वहीं भारत में मौजूदा प्रजनन दर प्रति महिला दो शिशु है।












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