World Asthma Day: क्या अस्थमा यानी दमा की बीमारी भारत में एक महामारी का रूप लेने लगी है?
World Asthma Day: अस्थमा जिसे हम सभी दमा रोग से भी जानते हैं। इसकी रोकथाम व जागरूकता के लिए हर साल विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2023 के लिए ‘अस्थमा की देखभाल सभी के लिए’ थीम निर्धारित की गई है।

अस्थमा के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए मई महीने के पहले मंगलवार को 'विश्व अस्थमा दिवस' मनाया जाता है। इस साल यह दिन 2 मई को मनाया जा रहा है। अस्थमा एक श्वसन विकार है। इसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है और हमारे फेफड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। आजकल यह रोग बच्चों में भी होने लगा है। ऐसे में इसके प्रति लोगों में जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से जीआईएनए विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन करता है। जीआईएनए का मतलब द ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा है। यह एक विश्व स्वास्थ्य सहयोगी संगठन है जिसकी स्थापना 1993 में हुई थी।
कब और कैसे हुई शुरुआत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर 339 मिलियन से भी अधिक लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। वहीं 2016 में दुनियाभर में अस्थमा के कारण 417918 मौतें हुई हैं। गौरतलब है कि पहला विश्व अस्थमा दिवस 35 से अधिक देशों में 1998 में बार्सिलोना, स्पेन में पहली विश्व अस्थमा कांग्रेस के संयोजन में मनाया गया था।
इसके बाद जैसे-जैसे अन्य देशों की भागीदारी बढ़ती गई, यह दिन दुनिया भर में अस्थमा जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम बनता गया। इस वर्ष 2023 के लिए 'Asthma Care for All' यानी 'अस्थमा की देखभाल सभी के लिए' थीम निर्धारित की गई है। वहीं बता दें कि साल 2022 में वर्ल्ड अस्थमा डे के लिए ' Closing Gaps In Asthma Care' यानी 'अस्थमा देखभाल में अंतराल बंद करना' थीम रखी गई थी।
भारत में अस्थमा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, सांस की गंभीर बीमारियों के कारण मृत्यु के मामले में चीन के बाद भारत का ही स्थान है। आंकड़ों की माने तो विश्व में अस्थमा के 10 प्रतिशत मामले भारत में ही हैं। साल 2022 में लंग इंडिया जर्नल में प्रकाशित हुई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 3 करोड़ 43 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। एक अनुमान यह भी है दुनियाभर में इस बीमारी से जितने भी लोगों की मौत होती है, उनमें एक बड़ा प्रतिशत भारत का है।
अस्थमा के लक्षण
अस्थमा रोग आमतौर पर एलर्जी से संबधित बीमारी है। इससे सांस लेने में दिक्कत आती है। कोरोना वायरस आने से अस्थमा अटैक की संभावनाएं ज्यादा बढ़ गई हैं, क्योंकि कोरोना से फेफड़ें, गला और नाक प्रभावित होते हैं। इसलिए ऐसे लोग जो अस्थमा से पीड़ित है, उन्हें कोरोना की वजह से अस्थमा अटैक आने की संभावना ज्यादा हो जाती है। अस्थमा से बचने के लिए हमें सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि लक्षण दमा के हैं या नहीं। क्योंकि हर बार सांस फूलना अस्थमा नहीं होता है। इस रोग की सही पहचान के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट अनिवार्य है। अस्थमा कई प्रकार का हो सकता है जैसे एलर्जिक अस्थमा, नॉनएलर्जिक अस्थमा, एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा, ऑक्यूपेशनल अस्थमा, चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा आदि हैं।
दमे से बचने के उपाय
मैक्स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी विभाग के निदेशक ने एक इंटरव्यू में जानकारी देते हुए बताया था कि अस्थमा की बीमारी से निजात पाने के लिए शहद का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही मूंगफली, सेब, वनस्पति तेल जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन अस्थमा को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों सहित इनहेलर को प्रयोग समय पर करना चाहिए। वहीं भारत सरकार द्वारा भी कई ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिससे मरीज को सस्ती या मुफ्त दवाइयां और उपचार मिल रहा है। इसके साथ ही मरीज को सलाह दी जाती है कि वे धूल या मोल्ड जैसे एलर्जी से दूर रहें। उन रसायनों और उत्पादों से दुरी बनाए रखें जो पहले सांस लेने की समस्या का कारण रहे हैं।












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