Asthma: सर्दियों में अस्थमा, जानें कैसे है बचना!
Asthma: सर्दियों में अस्थमा पीड़ितों की हालत ज्यादा खराब हो जाती है। ठंडी और शुष्क हवा के साथ अचानक कोहरे और भारी वातावरण के कारण सांस लेने में दिक्कत का अहसास होता है।
साथ ही सांस की नली में जलन भी हो सकती है। सीने में अधिक बलगम पैदा हो सकता है और उसे निकालने के क्रम में जोर जोर से खाँसना भी पड़ सकता है।

हमेशा घर के अंदर रहने से या हीटर चलाने से श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ सकती हैं। पहले से अस्थमा से जूझ रहे लोगों के लिए सर्दियों में यह बीमारी अनियंत्रित हो जाती है।
क्यों होता है अस्थमा का अटैक
मेडिकल साइंस के अनुसार फेफड़ों के वायुमार्ग में तरल पदार्थ की एक परत होती है, जो ठंडी हवा के संपर्क में आने से वाष्पित हो जाती है और वायुमार्ग में सूजन हो जाती है। जिससे सर्दी या फ्लू जैसे श्वसन संक्रमण होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है और अस्थमा का अटैक आने लगता है। जिसे हम तेज खांसी और सांस फूलने जैसे विकार के रूप में महसूस करते हैं। छाती में दर्द सा उठता है और सीने में जकड़न के साथ घरघराहट भी होती है।
अस्थमा के कारण
अस्थमा का मूल कारण वायरस हैं, जो धूल, फफूंद या पालतू जानवरों के बाल या सिगरेट के धुएं से उत्पन्न होते हैं। घर के अंदर धूम्रपान करने वालों को अक्सर खांसी की शिकायत रहती है। उनके साथ रहने वाले घर के अन्य सदस्यों में भी अस्थमा फैलने का खतरा हो सकता है। कई बार एलर्जी और भौगोलिक स्थान भी अस्थमा होने का कारण बन सकती हैं।
अस्थमा से बचने के उपाय
वैसे किसी भी बीमारी की चिकित्सा सिर्फ और सिर्फ डाक्टरी परामर्श के अनुसार ही करनी चाहिए, फिर भी कुछ सावधानियाँ रख कर और जीवन शैली में बदलाव लाकर अस्थमा का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।
सांस के अंदर ठंडी हवा के प्रवेश को बचाने के लिए सर्दियों में चिकित्सक मुंह और नाक को स्कार्फ से ढक कर रखने की सलाह देते हैं।
संभव हो सके तो कमरे का तापमान इतना जरूर मेनटेन करें कि अपेक्षाकृत थोड़ी गर्म हवा सांस के अंदर जाए ताकि फेफड़े के वायुमार्ग को खोलने में मदद मिल सके। इसके लिए घर में ह्यूमिडिफ़ायर बेहतर उपकरण है। यदि घर में पालतू जानवर हैं तो उनके साथ कम समय व्यतीत करें और हो सके तो उसे अपने बेडरूम से दूर ही रखें।
ठंड के मौसम में नाक से ही सांस लें, क्योंकि मुंह से सांस लेने से ठंडी और शुष्क हवा सीधे वायुमार्ग में आती है, जिससे ब्रोन्कियल नलियों में मौजूद बलगम सूख जाती है और अस्थमा भड़क सकता है। बार-बार हाथ धोने और सैनिटाइज़र का उपयोग से भी सर्दियों की बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर कहीं बाहर जाना तो नाक और मुंह को स्कार्फ या फेस मास्क से जरूर ढकें।
व्यायाम और अच्छा खान पान जरूरी
व्यायाम, वार्मअप और स्ट्रेचिंग अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए जरूरी है। यदि बाहर बहुत ठंड है तो अपने कमरे में ही चलें या फिर घर में ट्रेडमिल का उपयोग करें। वार्मअप के लिए म्यूजिक या गानों पर नृत्य भी कर सकते हैं। इससे फेफड़े ठंड में भी बेहतर काम कर सकते हैं।
सर्दी के मौसम में लोग पानी कम ही पीते हैं, लेकिन अस्थमा वालों के लिए हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है। ढेर सारा गुनगुना पानी के अलावा सूप और डिकैफ़िनेटेड चाय भी पी सकते हैं।
अस्थमा से पीड़ित लोगों को ताजे फल और सब्जियों से भरपूर संपूर्ण आहार खाने से फायदा हो सकता है। अमेरिकन थोरैसिक सोसाइटी (एटीएस) की रिपोर्ट में कहा गया है कि मोटापा अस्थमा के लिए एक प्रमुख कारण हो सकता है। इसलिए संतुलित आहार लेने और वजन का संतुलन बनाए रखने वाला भोजन ही सर्दियों में लिया जाना चाहिए। विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे दूध और अंडे, बीटा कैरोटीन युक्त सब्जियाँ, जैसे गाजर और पत्तेदार सब्जियाँ, मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे पालक और कद्दू के बीज अस्थमा के रोगियों के लिए अनुशंसित आहार हो सकते हैं।












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