Iran Girls Poisoned: ईरान में स्कूली लड़कियों को क्यों दिया जा रहा जहर
ईरान में लड़कियों की शिक्षा को बंद करने के मकसद से स्कूली छात्राओं को जहर देने का मामला सामने आया है। गौरतलब है पिछले कुछ महीनों में ईरान के कई शहरों में ऐसी दर्जनों घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

Iran Girls Poisoned: एक तरफ जहां ईरान में महीनों से महिलाओं द्वारा हिजाब पहनने को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ईरानी लड़कियों से जुड़ा एक और मामला हैरान करने वाला है। दरअसल ईरान के उप-स्वास्थ्य मंत्री यूनुस पनाही ने 26 फरवरी को कहा कि कुछ लोग लड़कियों की शिक्षा को बंद करने के मकसद से इस्लाम के पवित्र शहर कोम में स्कूली छात्राओं को जहर दे रहे हैं। उपस्वास्थ्य मंत्री यूनुस पनाही ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि जहर जानबूझकर दिया गया था।
हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि लड़कियों को जहर देने का काम पिछले कुछ सालों से श्रृंखलाबद्ध तरीकों से होता आ रहा है। वहीं ज्यादातर मामले महिला छात्रावासों से ही सामने आ रहे हैं।
500 हाई स्कूलों को किया गया टारगेट
ईरान की 'वीमेन एनसीआर' की वेबसाइट के मुताबिक 30 नवंबर के बाद से लगभग 500 हाई स्कूलों के विद्यार्थियों, खासकर लड़कियों को जहर देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह एक श्रृंखलाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसके बावजूद, ईरानी अधिकारियों ने इस मुद्दे के महत्व को कम करके आंका है, लेकिन संसदीय स्वास्थ्य समिति के एक सदस्य ने सवाल किया है कि ये घटनाएं केवल गर्ल्स हाई स्कूलों में ही क्यों होती हैं और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर क्यों नहीं होती हैं?
बोरुजेरड में लड़कियों को जहर
ईरानी सरकारी एजेंसी मेहर के मुताबिक 25 फरवरी 2023 को ईरान के एक शहर बोरुजेरड में भी अहमदीह गर्ल्स हाईस्कूल में 44 छात्राओं को जहर दिया गया था। इससे पहले भी बोरुजेरड स्थित गर्ल्स हाईस्कूल की 62 छात्राओं को चक्कर आना, कमजोरी और सुस्ती के लक्षणों के चलते अस्पताल ले जाया गया था।
गौर करने वाली बात है कि कोम और बोरूजर्ड में ही नहीं बल्कि ईरान के दूसरें शहरों जैसे इस्फहान और चारमहल-ए बख्तियारी में भी लड़कियों को जहर देने की घटनाओं की पुष्टि हो चुकी है।
दिसंबर 2022 में छात्रों को दिया गया जहर
ईरान नेशनल स्टूडेंट यूनियन ने दिसंबर 2022 में दावा किया था कि कम-से-कम 1200 छात्र-छात्राओं को प्रशासन की ओर से जहरीला खाना खिलाया गया था। दरअसल, एक दिन बाद ही सरकार के खिलाफ एक प्रदर्शन होना था। प्रदर्शन से पहले सैकड़ों छात्रों की तबीयत बिगड़ गई और छात्रों को फूड प्वॉइजनिंग के साथ पूरे शरीर में दर्द महसूस होने लगा। वहीं कई छात्र तो गंभीर रूप से बीमार पड़ गये। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए खराजमी और अर्क विश्वविद्यालय में छात्रों ने कैफेटेरिया में खाना खाना ही बंद कर दिया था। तब अधिकारियों द्वारा कहा गया कि जलजनित बैक्टीरिया के कारण फूड प्वॉइजनिंग की समस्या हुई है। जबकि छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए जानबूझकर खाने में जहर दिया गया था।
यहां गौर करने वाली बात ये है कि इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, खारजमी यूनिवर्सिटी, अल्लामेह तबाताबाई यूनिवर्सिटी और अराक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के कई छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालयों की कैंटीन में भोजन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने 16 दिसंबर को कैंटीन में भोजन के बहिष्कार का आह्वान किया था।
मई 2022 में भी दिया गया जहर
23 मई 2022 को भी राजधानी तेहरान के टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के छात्रावास में जहर देने का मामला सामने आया था। ईरान फ्रंट पेज की रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान के आपातकालीन चिकित्सा सेवा के निदेशक याह्या सालेह तबरी ने बताया कि हमें छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की खबर मिली। मौके पर पांच एंबुलेंस सहित दो एम्बुलेंस बसों को भेजा गया। तबरी के अनुसार यह घटना पश्चिमी तेहरान के मरजदारन बुलेवार्ड में नसीबेह टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के छात्रावास में हुई। इसमें तकरीबन 42 छात्राओं ने जहरीला भोजन खाया था।
2019 में 200 छात्र पहुंचे अस्पताल
'रेडियो फ्री यूरोप' की एक खबर के मुताबिक 15 अक्टूबर, 2019 को भी तेहरान की विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 200 से अधिक छात्रों को विश्वविद्यालय की कैंटीन में जहरीला भोजन खाने के बाद अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद छात्रों ने धरना प्रदर्शन भी किया।
वहीं अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए (ISNA) के मुताबिक विश्वविद्यालय के अधिकारियों की रिपोर्ट में जहर खाने वालों की संख्या 70 बताई गई है, लेकिन एक छात्र नेता ने बताया कि पिछले दो दिनों में 87 लड़कियों सहित कम से कम 197 छात्रों को अस्पताल भेजा गया है। जहरीले खाने के कारण सबसे अधिक छात्राएं प्रभावित हैं।
ईरान में हो रहा हिंसक प्रदर्शन
16 सितंबर 2022 को ईरान में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद वहां हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गये। महसा अमीनी को तेहरान की मोरैलिटी पुलिस ने कथित तौर पर 'ठीक से हिजाब' न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया और बाद में उनकी मौत हो गई। ईरान के सख्त नियमों के अनुसार, महिलाओं के लिए हिजाब या हेडस्कार्फ पहनना अनिवार्य है। इसके बाद से ही प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई को गलत बताते हुए अपना विरोध जारी रखा हुआ है। साल 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यहां की सरकार के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
24 जनवरी 2023 को ईरान इंटरनेशनल में छपी एक खबर के मुताबिक अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के एक आंकड़े के हवाला से बताया गया है कि 17 सितंबर 2022 से 23 जनवरी 2023 तक 525 प्रदर्शनकारी मारे गये हैं, जिनमें 71 बच्चे शामिल हैं। वहीं गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 20,000 है, जबकि शासन ने अब तक चार लोगों को मार डाला है और दर्जनों को 'मोहरेबेह यानि मौत की सजा' सुनाई गई है। जिसका अर्थ ईरानी शासन के शब्दकोश में 'ईश्वर से लड़ना' है और 'पृथ्वी पर भ्रष्टाचार' है।
यह भी पढ़ें: China Iran Relations: ईरान और चीन के मजबूत होते रिश्ते, जानें भारत पर क्या होगा असर
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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