Ramanujacharya: सीएम योगी ने रामानुजाचार्य की प्रतिमा का किया अनावरण, जानिए कौन थे 'वेदांत प्रवर्तक'?

Who Was Ramanujacharya: बुधवार को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने संत रामानुजाचार्य 1000वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा 'मर्यादा मूर्ति' को अयोध्या के अम्मा जी मंदिर में स्थापित किया। आपको बता दे कि ये मूर्ति चार फीट की है। इस खास मौके पर सीएम ने संत के बताए गए सिंद्धातों का भी जिक्र किया। मालूम हो कि रामानुजाचार्य की प्रतिमा मकराना मार्बल से बनी है। संत रामानुजाचार्य को 'वेदांत प्रवर्तक' कहा जाता है। वो दार्शनिक और समाज सुधार के रूप में लोकप्रिय हैं जिन्होंने भक्ति परंपरा का महत्व लोगों को समाझाया था। उनका जन्म तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 1017 में हुआ था और उन्होंने पूरे देश में समानता और सोशल जस्टिस की बात कही थी। उन्होंने वेदांत दर्शन पर काफी काम किया था।

 Ramanujacharya

यही नहीं भक्ति आंदोलन को एक तरह फिर से समाज में स्थापित करने वाले वो ही थे। वो रामदास, त्यागराज, कबीर और मीराबाई को प्रेरणा श्रोत कहे जाते हैं। उन्होंने अपने भक्ति संदेश में यही कहा कि 'केवल असली पूजा वो ही है जिसमें आप मन से अपने ईष्ट देव से जुड़ते हैं। भजन-कीर्तन सब अपनी जगह सही है लेकिन जब तक आप अपने ध्यान से प्रभु से ना जुड़े तब तक भक्ति अधूरी है। ऐसा माना जाता है कि अपने इसी भक्ति की वजह से उन्हें मां सरस्वती ने साक्षात दर्शन दिए थे।'

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उन्होंने हमेशा लोगों की समानता की बात कही और यही बताया कि इंसान अपने कर्मों से बड़ा या छोटा होता है। उन्होंने हमेशा कहा भक्ति की वजह से इंसान बंधन और मोह से मुक्त होता है और जिस दिन उसकी समझ में ये आ जाता है, उसी दिन उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने अपनी भक्ति को तीन स्तर में बांटा था-ब्रह्म अर्थात् ईश्वर, चित अर्थात् आत्मा और अचित अर्थात् प्रकृति तत्व। उन्होंने हमेशा कहा कि ईश्वर सत्य और सगुण हैं, वो हर किसी के साथ मौजूद है।

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उन्होंने ही गीता पर भाष्य लिखा था और अपने 'वेदांत सार' में उन्होंने ही भक्ति को ही शक्ति करार दिया है। उन्होंने महिलाओं के विकास के लिए भी काम किया और हमेशा कहा कि समाज में समानता होनी चाहिए। इंसान को उसके ज्ञान के आधार पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए, कोई इंसान सर्वज्ञाता नहीं होता है लेकिन वो ज्ञान प्राप्त करके ज्ञानी जरूर बन सकता है। 120 वर्ष की अवस्था में संत रामानुजाचार्य ने अपने शरीर का त्याग किया था। आपको बता दें कि संत रामानुजाचार्य की इसी साल 5 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन हैदराबाद में भी 216 फुट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई थी।

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