Praggnanandhaa: कौन है शतरंज का नया सितारा रमेशबाबू प्रगनानंद, जानें उनकी कहानी
Praggnanandhaa: रमेशबाबू प्रगनानंद ने शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास लिख दिया है। सिर्फ 18 साल की उम्र में रमेशबाबू ने फिडे शतरंज विश्व कप टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने 21 अगस्त, 2023 को सेमीफाइनल मैच में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारूआना को टाईब्रेक में हरा दिया। अब शतरंज विश्व कप के फाइनल में प्रगनानंद का सामना विश्व के नंबर एक खिलाड़ी मैगनस कार्लसन से होगा। आइये, जानते हैं शतरंज के नए स्टार रमेशबाबू प्रगनानंद के बारे में कुछ खास बातें, जिन्होंने भारत की धाक शतरंज में फिर से जमा कर देशवासियों को विश्व में गौरवान्वित महसूस कराया।
क्या है रमेशबाबू प्रगनानंद की कहानी
10 अगस्त, 2005 को चेन्नई, तमिलनाडु में जन्मे रमेशबाबू प्रगनानंद एक भारतीय शतरंज खिलाड़ी हैं। जिन्हें देश की सबसे प्रतिभाशाली प्रतिभाओं में से एक माना जाता है। रमेश बाबू के पिता स्टेट कॉर्पोरेशन बैंक में काम करते हैं, और उनकी मां नागलक्ष्मी एक गृहिणी हैं। उनकी एक बड़ी बहन वैशाली आर हैं, जो शतरंज खेलती हैं। पांच साल की उम्र से यह शतरंज प्रतिभा शतरंज खेल रही है। वो भी एक महिला ग्रैंडमास्टर है। 19 साल की वैशाली ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शतरंज में उनकी रुचि एक टूर्नामेंट जीतने के बाद बढ़ी और इसके बाद उनका छोटा भाई भी इस खेल को पसंद करने लगा। आज वैशाली भारत में शतरंज की मशहूर खिलाड़ी है।

रमेशबाबू की बहन ने सिखाया था चेस खेलना
मीडिया ने रमेशबाबू प्रगनानंद की बड़ी बहन वैशाली के हवाले से लिखा कि जब मैं लगभग छह साल की थी, तो काफी कार्टून देखती थी। तब मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं टेलीविजन से चिपकी नहीं रहूं। इसलिए उन्होंने मेरा नाम शतरंज और ड्राइंग की क्लास में लिखा दिया। बहन को चेस खेलता देख प्रगनानंद भी उससे प्रभावित होकर शतरंज को महज तीन साल की उम्र में अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था। क्योंकि बहन चेस खेलने की ट्रेनिंग लेती थी तो उनकी बहन ने ही उन्हें चेस खेलना सिखाया था।
प्रगनानंद के पिता रमेशबाबू न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताते हैं कि हमने वैशाली को शतरंज से जोड़ा जिससे कि उसके टीवी देखने के समय को कम किया जा सके। दोनों बच्चों को यह खेल पसंद आया और इसे जारी रखने का फैसला किया। हमें खुशी है कि दोनों खेल में सफल रहे हैं। इससे भी अहम बात यह है कि वे शतरंज खेलने का लुत्फ उठा रहे हैं।
रमेशबाबू प्रगनानंद की उपलब्धियां
सात साल की उम्र में ही प्रगनानंद ने विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप जीती थी। तब सात साल की उम्र में इससे उन्हें फेडरेशन इंटरनेशनेल डेस एचेक्स (FIDE) मास्टर की उपाधि मिली। इसके बाद 2015 में उन्होंने चैंपियनशिप का अंडर-10 डिविजन जीता। वहीं 10 साल की उम्र में उन्होंने शतरंज के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय मास्टर का खिताब भी हासिल किया। ऐसा करने वाले वह उस समय सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे। इसके बाद 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने, ऐसा करने वाले वह उस समय के दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे।
बता दें कि 16 वर्षीय प्रगनानंद शतरंज के इतिहास में न केवल दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर हैं, बल्कि इसे हासिल करने वाले इतिहास में सबसे कम उम्र के भारतीय भी हैं। शतरंज के खेल में सबसे प्रतिष्ठित उपाधि ग्रैंडमास्टर है। इस उपाधि को प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को 2,500 की शास्त्रीय या मानक FIDE रेटिंग प्राप्त करनी होती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में तीन ग्रैंडमास्टर मानदंड भी प्राप्त करने होते हैं। महज 12 साल की उम्र में इस असाधारण प्रतिभा ने यह खिताब हासिल कर लिया था।
कार्लसन को 16 साल की उम्र में हराया था
वहीं 'चेस डॉट कॉम' की वेबसाइट के मुताबिक 22 फरवरी 2022 को सिर्फ 16 साल की उम्र में प्रगनानंद तत्कालीन विश्व चैंपियन मैगनस कार्लसन को हराने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गये थे। जब उन्होंने एयरथिंग्स मास्टर्स रैपिड शतरंज टूर्नामेंट में एक रैपिड गेम में कार्लसन को हराया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि नंबर एक चेस खिलाड़ी मैगनस कार्लसन को प्रगनानंद ने केवल 39 चाल में परास्त कर दिया था। उनसे पहले यह कमाल केवल विश्वनाथन आनंद और पी हरिकृष्णा ही कर पाये थे। हालंकि, सबसे कम उम्र में विश्व चैंपियन को हराने का यह रिकॉर्ड 16 अक्टूबर 2022 तक था, जब इसे एक अन्य भारतीय गुकेश डी द्वारा तोड़ा गया।
जब विश्वनाथन आनंद से भिड़े प्रगनानंद
नवंबर, 2018 में टाटा स्टील चेस इंडिया 2018 चैंपियनशिप के दौरान भारत के 5 बार वर्ल्ड चैंपियन रहे विश्वनाथन आनंद से प्रगनानंद का सामना हो चुका है। हालांकि, तब प्रगनानंद को विश्वनाथन आनंद से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन, उस वक्त दिये एक इंटरव्यू में विश्वनाथन आनंद ने कहा कि भविष्य में प्रगनानंद रमेशबाबू अच्छा करेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे। मैं इसके लिए आश्वस्त हूं। हालांकि बता दें कि भारतीय ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद 5 बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। वे पहली बार 1988 में ग्रैंडमास्टर बने थे। उन्होंने 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 में खिताबी जीत दर्ज की थी।
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