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Jagdish Tytler: कौन हैं जगदीश टाइटलर, जिन पर हैं सिख विरोधी दंगों का आरोप

4 अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में आरोपी कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर को अग्रिम जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश विकास ढुल ने टाइटलर को सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए यह निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे और सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि 26 जुलाई को विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विधि आनंद गुप्ता ने टाइटलर को 5 अगस्त को कोर्ट में पेश होने का समन जारी किया था।

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इसे देखते हुए टाइटलर ने 1 अगस्त को अग्रिम जमानत के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2 अगस्त को कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने टाइटलर की अग्रिम जमानत के अनुरोध पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि गवाह बहुत ही मुश्किल से सामने आए हैं और अगर टाइटलर को जमानत दे दी गई तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

कोर्ट ने टाइटलर की अग्रिम जमानत पर सुनवाई पूरी करने के बाद 4 अगस्त को फैसला सुनाने का निर्णय किया था। इसके बाद, टाइटलर ने 5 अगस्त को अदालत में जमानती बॉन्ड भरा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होनी है। सीबीआई ने टाइटलर के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 (दंगा भड़काने), 109 (भीड़ को उकसाने) और 302 (हत्या) के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।

क्या है मामला?
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सिख अंगरक्षकों ने कर दी थी। इस हत्या के विरोध में दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। सरकारी आंकड़ों की मानें तो इन दंगों में तीन हजार के लगभग लोग मारे गए थे। हालांकि, लोगों का कहना है कि सिख विरोधी इन दंगों में 10-15 हजार लोग मारे गए थे। 1 नवंबर 1984 को दिल्ली की आजाद मार्केट स्थित गुरुद्वारा पुल बंगश को भीड़ ने आग लगा दी थी, जिसमें सरदार ठाकुर सिंह, गुरचरण सिंह और बादल सिंह नामक तीन सिखों की जलकर मौत हो गई थी। आरोप है कि जगदीश टाइटलर ने आजाद मार्केट में जमा भीड़ को गुरुद्वारे को जलाने के लिए उकसाया था।

इस मामले में कब-क्या हुआ?
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा साल 2000 में गठित जस्टिस जी.टी. नानावटी आयोग ने 2005 में अपनी रिपोर्ट में 1984 के सिख विरोधी दंगों में जगदीश टाइटलर की भूमिका का उल्लेख किया। इसके बाद, सीबीआई ने टाइटलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। तब टाइटलर मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद टाइटलर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, वे कांग्रेस में सक्रिय रहे और कई कमेटियों के सदस्य बनते रहे।

सितंबर 2007 में सीबीआई ने पहली बार कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें सीबीआई ने कहा था कि इस मामले का मुख्य गवाह जसबीर सिंह लापता हैं। लेकिन जसबीर सिंह का कहना था कि सीबीआई ने कभी उनसे पूछताछ ही नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और इस मामले की फिर से जांच करने का आदेश दिया।

सीबीआई ने अप्रैल 2009 में एक बार फिर से क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की। इस रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि पुल बंगश में जब गुरुद्वारे को जलाया गया उस समय टाइटलर वहां मौजूद ही नहीं थे और वे इंदिरा गांधी के निवास स्थान तीन मूर्ति भवन में मौजूद थे। 2013 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को फिर से खारिज कर दिया और फिर से जांच के आदेश दिए। मार्च 2015 में सीबीआई ने सिख विरोधी दंगों में जगदीश टाइलर की भूमिका से इंकार किया और कड़कड़डूमा कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश की। 2016 में सीबीआई ने टाइटलर से सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका के बारे में चार घंटे तक पूछताछ भी की।

मई 2023 में सीबीआई ने जगदीश टाइटलर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई ने अप्रैल महीने में टाइटलर की आवाज के सैंपल की फोरेंसिक जांच कराई थी। सीबीआई ने इसी सैंपल को चार्जशीट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उल्लेखनीय है कि सिख नेता मंजीत सिंह जीके ने 2018 में एक स्टिंग वीडियो जारी किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि इस वीडियो को उन्हें दिल्ली के एक कारोबारी ने डाक के जरिए भेजा है। वीडियो में टाइटलर भीड़ को उकसाते दिख रहे हैं। हालांकि, वीडियो की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। लेकिन आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। सीबीआई के लिए यही अहम सबूत बना। यहां यह बता दें कि मृतक बादल सिंह की पत्नी लखविंदर कौर अदालत में लगातार सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करती रही हैं। इसी वजह से अदालत ने बार-बार सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।

कौन हैं जगदीश टाइटलर?
जगदीश टाइटलर का जन्म गुजरांवाला, पाकिस्तान (तब अविभाजित भारत) में 11 जनवरी 1944 को हुआ था। बचपन में उनका नाम जगदीश कपूर था। टाइटलर का लालन-पालन प्रख्यात शिक्षाविद् जेम्स डगलस टाइटलर ने किया था, जोकि दिल्ली पब्लिक स्कूल और समर फील्ड्स स्कूल सहित कई स्कूलों के संस्थापक थे। अर्थात् जगदीश टाइटलर जेम्स डगलस टाइटलर के दत्तक पुत्र हैं। ऐसा कहा जाता है कि जेम्स के प्रभाव में आकर उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया और अपना उपनाम टाइटलर रख लिया।

2011 में उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर में टाइटलर के प्रवेश को लेकर एक बड़ा विवाद पैदा हो गया। क्योंकि, जगन्नाथ मंदिर में सिर्फ हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, टाइटलर ने ईसाई धर्म अपनाने को खारिज किया और कहा कि उन्होंने जेम्स डगलस टाइटलर के प्रति अपना आभार प्रकट करने के लिए अपना उपनाम बदला है। जगदीश टाइटलर की शादी दिल्ली में जन्मी स्कॉटिश मां और आयरिश पिता की बेटी जेनिफर टाइटलर से हुई है।

कांग्रेस के संगठन में सक्रिय और संजय गांधी के वफादार जगदीश टाइटलर पहली बार 1980 में दिल्ली सदर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए फिर 1984 के लोकसभा चुनाव में भी उनकी जीत हुई और केंद्रीय मंत्री बने। 1991 में उन्होंने एक बार फिर से लोकसभा का चुनाव जीता और नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री बने। 2004 में भी वे लोकसभा के सांसद बने और मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री बने। लेकिन नानावटी आयोग की रिपोर्ट में नाम आने के चलते उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जगदीश टाइटलर को चुनावी मैदान में उतारा था। लेकिन भारी विरोध के बाद कांग्रेस ने उनका टिकट वापस ले लिया। फरवरी 2023 में कांग्रेस ने जगदीश टाइटलर को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का प्रतिनिधि बनाया। हालांकि, इसका भी जमकर विरोध हुआ।

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