ट्रेन में 'नरेंद्र मोदी' और एसी कोच का अटेंडेंट
[अजय मोहन] जम्मू-कश्मीर की वादियों के बीच ललकार रैली में रविवार को एक बार फिर नरेंद्र मोदी गर्जेंगे। वो सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि उमर अब्दुल्ला पर भी जमकर बरसेंगे। इस रैली के बाद कश्मीर की जनता क्या फैसला करती है, यह तो आने वाला समय बतायेगा, लेकिन देश की जनता में किस प्रकार की उम्मीदें उभरने लगी हैं, उन पर चर्चा करने के लिये हम आपको लेकर चल रहे हैं बेंगलुरु से लखनऊ की रेल यात्रा पर, जहां ट्रेन में नरेंद्र मोदी पर गहन चर्चा हुई, जिसका साक्षी बना मैं।
यशवंतपुर से लखनऊ का सफर तय करते वक्त मेरे कम्पार्टमेंट में इलाहाबाद के एक वकील साहब, बहुजन समाज पार्टी के एक नेता, विश्वैश्वरैया इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र, आयकर विभाग के रिटायर्ड अधिकारी मौजूद थे, चर्चा तब शुरू हुई जब ट्रेन के एसी में तकनीकी खराबी को लेकर लोग अटेंडेंट पर बरस पड़े। छोटी सी फॉल्ट थी, जो इलेक्ट्रीशियन ने सही कर दी थी, लेकिन फिर भी लोग अटेंडेंट को कोस रहे थे, तभी अटेंडेट के मुंह से कुछ शब्द निकले, जो कान खड़े करने वाले थे- "बस कुछ दिन की बात और है, सारी व्यवस्था सही हो जायेगी, जब मोदी की सरकार आयेगी।"
बतौर पत्रकार मेरे लिये उस अटेंडेंट के शब्द खबर थे, बसपा नेता के लिये आम जनता की धमकी और एक आम छात्र के लिये उम्मीद की किरण। तभी मैंने तुरंत उससे पूछा, "क्यों मोदी ऐसा क्या कर देंगे?" अटेंडेंट ने जवाब दिया, "नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर रेलवे के वो सभी कर्मचारी नियमित हो जायेंगे, जो कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम कर रहे हैं। फिर चाहे इलेक्ट्रीशन हो या कोई अटेंडेंट, एसी कोच हो या स्लीपर हर जगह आपको सब कुछ व्यवस्थित दिखेगा।"
अटेंडेंट की इस बात पर सफेद सूट में बैठे हुए बसपा नेता ठहाका लगाकर हंसे और बोले, "ये सब भाजपा वाले तुम लोगों को जो सपने दिखा रहे हैं, वो कभी पूरे नहीं होने वाले।" तभी कंपार्टमेंट में बैठे छात्र ने कहा, "मोदी के आने से भले कुछ हो न हो, केजरीवाल के आने से दिल्ली जरूर बदल जायेगी।" तभी एक चौंकाने वाली बात अटेंडेंट के मुंह से निकली, "भईया ये केजरीवाल कौन है?"
केजरीवाल के नाम पर बसपा नेता बोले, "भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन करके, केजरीवाल ने अपनी राष्ट्रीय छवि तो बना ली है, लेकिन नेता कभी नहीं बन पायेंगे। अगर बन भी गये, तो सरकार चलाने का अनुभव कहां से लायेंगे और जब अनुभव नहीं होगा, तो ये लोग भी घूसखोरी शुरू कर देंगे। दिल्ली जैसी है वैसी ही रहेगी। सरकार चलाना तो बहन जी से सीखिये।" तभी वकील साहब बोले, "भाई साहब आपको यूपी में 10 साल मिले, लेकिन आप क्या कर पाये? आपके नेताओं ने भी पैसा कमाने के अलावा क्या किया?"
यह सुनकर बसपा नेता भड़क गये और बोले, "आप जानते ही क्या हैं बसपा नेताओं के बारे में?" वकील साहब की यह बात सुन नेताजी की गुगली हो गई, "आप मुझसे मत पूछिए कि मैं क्या जानता हूं, आपके सतीश मिश्रा मेरे रिश्तेदार हैं और मुझे अच्छी तरह पता है कि मुंबई में उन्होंने कितनी प्रॉपर्टी खड़ी कर ली है। सतीश मिश्रा ही नहीं कई अन्य बसपाईयों ने भी नोएडा, गुड़गांव, मुंबई जैसे शहरों में प्रॉपर्टी खड़ी कर ली है।" यह सुनकर नेताजी की बोलती बंद हो गई।
थोड़ी देरके लिये कंपार्टमेंट में शांति छा गई। तभी हमारे साथ सफर कर रहे वरिष्ठ नागरिक व रिटायर्ड अधिकारी ने कहा, "देखिये हमारे आपके झगड़ा करने से कुछ नहीं होने वाला इस देश का, अब चाहे सरकार भाजपा की आये या कांग्रेस की देश की सूरत तभी बदलेगी, जब हमारे देश के हर नेता ईमानदारी के साथ काम करेंगे। सांसद-विधायक बनने के बाद कईयों की निजी संपत्ति में दिन-दूनी रात चौगुनी की गति से इजाफा होता है। जबकि आम आदमी दिन रात मेहनत करने के बाद भी जीवन भर इतनी संपत्ति नहीं खड़ी कर पाता, जितनी एक सांसद विधायक पांच साल में खड़ी कर देते हैं।"
तभी अटेंडेंट ने बीच में अपनी बात रखी, "अंकल जी अगर संपत्ति बनानी होती, तो नरेंद्र मोदी पिछले 10 साल से गुजरात के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्होंने अपने बारे में कभी नहीं सोचा। आप देख लीजियेगा, मोदी के आने के बाद सब कुछ बदल जायेगा। खैर छोडि़ये यहां बहस करने से अब कुछ नहीं होने वाला जब चुनाव आयेगा, तब देखियेगा।" यह कहकर अटेंडेंट उठकर चला गया। तभी बगल के कंपार्टमेंट से एक बिजनेसमैन आकर बैठ गया।
थोड़ी देर शांति के बाद मैंने राहुल गांधी का मुद्दा छेड़ दिया, तो सबसे पहला रिएक्शन वकील साहब का आया। बोले, "न वो कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, वो उसके लायक ही नहीं हैं, अरे पीएम बनने के लिये दम होना चाहिये। पार्टी के नेता तो उनकी बात मानते नहीं, बाहर वाले क्या मानेंगे।" मैंने कहा, "लेकिन कांग्रेस का युवा चेहरा तो है न।" तभी नेता जी बोले, "अरे साहब राहुल गांधी तो सिर्फ अपनी मां की बदौलत राजनीति में हैं और सांसद अपने पिता की बदौलत, वरना उन्हें कौन पूछता।" नेता जी की बात पर सहमति व्यक्त करते हुए रिटायर्ड अधिकारी ने कहा, "सही कहा आपने, मुझे तो लगता है कि कांग्रेस को जहां से वोट मिलने भी वाले होंगे, वहां राहुल की वजह से कट जायेंगे। भाषण तक तो देना नहीं आता। अब सोनिया गांधी के दम पर ही कांग्रेस चल रही है।"
बीटेक छात्र ने कहा, "भाषण तो आजकल सिर्फ मोदी का चल रहा है, वो जहां आ जाते हैं, छा जाते हैं।" बसपा नेता ने कहा, "अरे नहीं वो भी अब एक ही बात बार-बार रिपीट करने लगे हैं, जितने दावे वो कर रहे हैं, उनमें कई तो हवा में होते हैं।" वकील साहब बोले, "देखिये साहब अगर मोदी की सरकार आयी, तो इसका मतलब यह नहीं है कि देश एक दिन में बदल जायेगा। भाई मोदी अपनी गुजरात वाली जो भी टेकनीक देश पर लागू करने की कोशिश करेंगे, उसे भाजपा के अन्य नेता समझेंगे कि नहीं यह बड़ी बात होगी। खैर इस पर बहस करने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि हुइये वही जो राम रचि राखा।" अगला स्टेशन भोपाल था, नेजा जी वहीं उतर गये और मेरे साथ-साथ कंपार्टमेंट के बाकी लोग रात के खाने के इंतजाम में जुट गये, क्योंकि इस ट्रेन में पैंट्री कार नहीं थी।
इस चर्चा में नेता जी ने बसपा की तैयारियां का भी जिक्र किया और कहा कि मायावती इस समय जोर-शोर से जुटी हुई हैं, लगातार बैठकें चल रही हैं। अभी तो सिर्फ टिकट फाइनल करने का काम चल रहा है। साथ ही अखिलेश सरकार को भी जमकर कोसा। यूपी सरकार की तमाम खामियां भी गिनाई गईं। वकील साहब मस्त मौला टाइप के आदमी थे, तो चर्चा के बीच-बीच में कविताएं सुनाते रहे, छात्र के कान में हेडफोन लगा था, तो वो बीच-बीच में गाने सुन रहा था और अटेंडेंट ड्यूटी पर था, तो वो ज्यादा देर तक इस बहस में रुक नहीं सकता था।
इस छोटे से सफर में जो 10 बातें निकलकर आयीं, उन्हें आप स्लाइडर में देख सकते हैं।

आम आदमी की उम्मीद नरेंद्र मोदी
जिस तरह रेलवे का अटेंडेंट मोदी के रूप में अपने सपनों को साकार होते देख रहा है, उससे यह साफ है कि कहीं न कहीं देश के आम आदमी की उम्मीदें मोदी से गंभीरतापूर्वक जुड़ चुकी हैं।

मोदी के नाम पर खलबली
बसपा नेता के हाव-भाव साफ दर्शा रहे हैं, कि नरेंद्र मोदी के नाम पर बसपा समेत कई अन्य पार्टियों में खलबली मची हुई है।

केजरीवाल की लोकप्रियता
वह अटेंडेंट गाजियाबाद का रहने वाला था और दिल्ली इतनी करीब होते हुए भी वह केजरीवाल को नहीं जानता था। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि चतुर्थ श्रेणी में काम करने वाले लाखों लोगों अभी केजरीवाल की पहुंच से कितनी दूर हैं। केजरीवाल तो दूर, देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जो अभी आम आदमी पार्टी तक को नहीं जानते।

कमाई का अच्छा जरिया नेतागिरी
जिस तरह खुद को बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा का रिश्तेदार बताने वाले वकील साहब ने जिस तरह नेताओं की कमाई और संपत्ति का जिक्र किया, उससे यह साफ है कि नेतागिरी इस समय कमाई का सबसे अच्छा जरिया है।

भाजपा नेता कर रहे हैं वादे
अटेंडेंट ने कहा कि उसकी नौकरी परमानेंट हो जायेगी। इससे साफ है कि भाजपा के कार्यकर्ता आम लोगों के बीच ऐसे वादे कर रहे हैं, कि मोदी के आने से उनकी नौकरी नियमित हो जायेगी, पैसा अच्छा मिलने लगेगा, आदि। क्योंकि न तो भाजपा और न मोदी ने अभी तक लोकसभा चुनाव का मेनिफेस्टो जारी किया है।

राहुल गांधी पर नाराजगी
इस चर्चा से यह साफ है कि आम जनता की राहुल गांधी के लिये नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब लोगों ने उन्हें अच्छे नेताओं की श्रेणी में गिनना बंद कर दिया है।

यूपी का हाल बेहाल
हमनें ज्यादा चर्चा नहीं की, लेकिन जितनी भी बात यूपी की हुई और ट्रेन के यूपी में प्रवेश के बाद जो मुझे अहसास हुआ, उससे यह साफ है कि यूपी में फिलहाल कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं आया है।

सोनिया पर विश्वास कायम
चर्चा से यह साफ है कि सोनिया गांधी अभी भी कांग्रेस की किसमत को बदल सकती हैं। यानी 2014 में वो कुछ ऐसा कर सकती हैं, जिससे मोदी की उम्मीद खत्म हो जाये।

बदलना होगा मोदी को भाषण
आम जनता के बीच अब यह चर्चा होने लगी है कि मोदी हर मंच से एक ही भाषण पढ़ने लगे हैं, लिहाजा अगर कुछ नया करना है तो मोदी को हर मंच पर कुछ नया लाना होगा।

ट्रेन, बस, नुक्कड़, चौराहों पर मोदी
यह तो महज एक वाक्या था, ऐसी चर्चाएं इन दिनों हर ट्रेन, बस, नुक्कड़, चौराहों, गली, मोहल्लों, ऑफिसों में हो रही है। जहां पर चर्चा राजनीति पर होती है, वहां मोदी का नाम जरूर आता है।












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