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Pakistan Blasphemy Law: क्या है ब्लासफेमी कानून जिसमें पाकिस्तान ने किया विकिपीडिया को ब्लॉक

पाकिस्तान में पहले भी ब्लासफेमी कानून के अंतर्गत टिंडर, फेसबुक, यूट्यूब को प्रतिबंधित अथवा ब्लॉक किया गया था।

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पाकिस्तान ने 4 फरवरी 2023 को विकिपीडिया को ब्लॉक कर दिया। विकिपीडिया पर कुछ ऐसा कंटेंट था जो पाकिस्तान के लिए 'ब्लासफेमस' था। इसके चलते पाकिस्तान ने विकिपीडिया को वो कंटेंट हटाने का 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया, और जब वो कंटेंट 48 घंटों बाद भी नहीं हटाया गया तब विकिपीडिया को पाकिस्तान से ब्लॉक कर दिया गया।

क्या होती है ब्लासफेमी
ब्लासफेमी को साधारण भाषा में ईशनिंदा कहा जाता है। इस्लाम में इसे बेहद संवेदनशील तरीके से देखा जाता है। यह उस भाषण या व्यवहार पर लागू होता है जो किसी धर्म या उसके देवताओं, धार्मिक मान्यताओं, या धार्मिक आस्थाओं के प्रति अपमानजनक या आपत्तिजनक है। दुनिया के कई देशों में खासकर इस्लामिक मुल्कों में ब्लासफेमी एक दंडनीय अपराध है जिसके लिए कारावास और यहां तक कि मौत की सजा भी दी जा सकती है।

पाकिस्तान में ब्लासफेमी पर कानून
पाकिस्तान पीनल कोड (पाकिस्तान दंड संहिता) की धारा 295 से 298 में ईशनिंदा पर जुर्माने से लेकर कारावास और यहां तक की मौत की सजा का प्रावधान है। पाकिस्तान में ब्लासफेमी कानूनों की जड़ें अंग्रेजों के समय से है क्योंकि 1860 में ब्रिटिश भारत में अंग्रेजों ने इंडियन पीनल कोड लागू किया था, जिसमें धार्मिक भावनाओं के अपमान को प्रतिबंधित करने वाले प्रावधान शामिल थे। 1947 में भारत से विभाजन और पाकिस्तान के गठन के बाद, इन प्रावधानों को पाकिस्तान पीनल कोड में शामिल किया गया। 1980 के दशक में पाकिस्तान में इस्लाम की सुरक्षा के लिए ब्लासफेमी कानूनों में विशेष प्रावधान लाए गए थे और ब्लासफेमी कानूनों को और सख्त किया गया था। पाकिस्तान में ब्लासफेमी के लिए मौत की सजा का प्रावधान 1986 में लाया गया था, और 1990 में इन कानूनों में संशोधन किया गया था ताकि अपील पर भी ब्लासफेमी की सजा को खत्म करना और मुश्किल हो जाए।

क्या भारत में ब्लासफेमी के लिए कोई कानून?
भारत में सीधे तौर पर ब्लासफेमी को लेकर कोई कानून नही है। हालांकि, इंडियन पीनल कोड की धारा 295A धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से या समाज के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कार्यों को आपराधिक बनाती है। इस धारा के तहत कारावास की सजा का प्रावधान है और सजा को तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना भी लिया जा सकता है, या दोनों।

किन-किन देशों में है ब्लासफेमी कानून?
दुनिया के कई देशों में ब्लासफेमी के लिए कानून है, और इन देशों में एक मुख्य हिस्सा मुस्लिम देशों का है। जिन देशों में ब्लासफेमी के लिए बहुत कड़े कानून है उन देशों में नाइजीरिया, पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, सोमालिया, मॉरिटानिया, सऊदी अरब, बांग्लादेश, मिस्र, इराक, मलेशिया, मालदीव, सूडान, यमन, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सीरिया, ट्यूनीशिया, यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE), ओमान, आदि शामिल हैं।

ब्लासफेमी कानूनों का दुरुपयोग
कई देशों में ब्लासफेमी कानूनों का गलत इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कई बार ब्लासफेमी कानूनों का इस्तेमाल उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जाता है जो सरकार या धार्मिक संस्थाओं के लिए आलोचनात्मक विचार व्यक्त करते हैं। बहुत जगहों पर इन कानूनों का दुरुपयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान जैसे देशों में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू एवं अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों को निशाना बनाने और उन्हें सताने के लिए ब्लासफेमी कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है। ब्लासफेमी कानूनों को अक्सर भेदभाव करने के तरीके से लागू किया जाता है, क्योंकि बहुसंख्यकों की तुलना में अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के व्यक्तियों को निशाना बनाए जाने की संभावना अधिक होती है।

ब्लासफेमी कानूनों के कुछ आंकड़े और तथ्य

  • PRC की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में दुनिया के हर 10 में से 4 देशों में ब्लासफेमी के लिए कानून थे।
  • PRC की 2022 के रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में दुनिया भर के 198 देशों में से 79 देशों में यानी लगभग 40% देशों में ब्लासफेमी पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून या नीतियां थीं और यही देश वर्ष 2020 में 84 हो गए थे।
  • अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब जैसे देशों में ब्लासफेमी के लिए मृत्युदंड तक की सजा है।
  • वर्ष 2019 में पाकिस्तान में 17 लोगों को ब्लासफेमी के लिए मृत्युदंड दिया गया था।
  • यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लासफेमी के 81% मामले 10 देशों में है और इन देशों में पाकिस्तान, ईरान, रूस, भारत, मिस्र, इंडोनेशिया, यमन, बांग्लादेश, सऊदी अरब और कुवैत शामिल है।
  • मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के 90% देशों में ब्लासफेमी के लिए कानून है।
  • ब्लासफेमी के लिए जितने भी मामले दर्ज होते है उनमें से 27% मामले सोशल मीडिया के माध्यम से ब्लासफेमी के होते है।
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