NAAC Grade: क्या होता है नैक और उसका ग्रेडिंग सिस्टम, जानें स्टूडेंट्स के लिए कितना महत्वपूर्ण
NAAC Grade: यूजीसी की गाइडलाइन के तहत राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) पूरे देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को रेटिंग देती है। नैक के मुताबिक जो भी विश्वविद्यालय और कॉलेज निरीक्षण के दौरान उनके तय किये गये मापदंडों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें ग्रेड हासिल करने में मुश्किल होती है।
यूजीसी के मुताबिक देश में कुल 1113 विश्वविद्यालय हैं। जिसमें 437 के पास ही नैक की ग्रेडिंग हैं। जबकि बाकी 676 के पास नैक का मूल्यांकन नहीं है। इसी तरह पूरे देश में 43796 कॉलेज हैं। इनमें से 9335 के पास नैक की ग्रेडिंग है लेकिन 34461 कॉलेज अभी तक मूल्यांकन करवाने में असफल साबित हुए हैं।

क्या है नैक?
नैक एक ऑटोनोमस बॉडी है, जिसे 1994 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने स्थापित किया था। नैक ग्रेड देने के लिए संस्थानों की परफॉर्मेंस जिस आधार पर तय की जाती है, उसके लिए पैरामीटर्स तय किये गये हैं। यह यूजीसी का एक हिस्सा है। इसका काम देशभर के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को परखना और उनको रेटिंग देना है।
यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नैक से मान्यता प्राप्त करना जरूरी है। अगर किसी संस्थान ने इसकी मान्यता नहीं ली है, तो उसे किसी भी तरह की सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
क्या है नैक ग्रेडिंग सिस्टम?
नैक के तहत चार सालों के लिए ग्रेड दिया जाता है। चार साल बाद फिर से उस शिक्षण संस्था का निरीक्षण कर उसे ग्रेडिंग दी जाती है। लेकिन, इस ग्रेडिंग को पाने के लिए शिक्षण संस्थानों को नैक की गुणवत्ता पर खरा उतरना पड़ता है। इसके लिए सबसे पहले उच्च शिक्षण संस्थान को नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन करना पड़ता है।
आवेदन करने के बाद नैक की टीम उस संस्थान का दौरा करेगी। इस दौरान नैक की टीम उस शिक्षण संस्थान में शिक्षण सुविधाएं, शिक्षकों का शैक्षणिक और शोध कार्य, वहां के रिजल्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों का वेतन, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं (कैंटीन, हॉस्टल, खाना वगैरह) और कॉलेज का माहौल जैसे कई तरह का निरीक्षण करती है। इसी आधार पर नैक की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। इसके बाद उस शिक्षण संस्थान को सीजीपीए दिया जाता है और इसी के आधार पर ग्रेड जारी होते हैं।
बता दें कि नैक ने अस्थाई तौर पर भी ग्रेड देने की भी व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत 2 साल के लिए ग्रेड दी जायेगी। अगर कोई शिक्षण संस्थान दिये गये ग्रेड से संतुष्ट नहीं है तो वह 6 महीनों के भीतर अपनी खामियों को दूर करके दोबारा निरीक्षण करवा सकता है। इसके लिए 10 हजार का शुल्क जमा करना होगा। इसके तहत यह ग्रेड सिर्फ 2 साल के लिए मान्य होता है।
किस आधार पर होती है ग्रेडिंग?
यूजीसी ने ग्रेडिंग पैटर्न को बदल दिया है। पहले चार श्रेणियों में कॉलेजों को रखा जाता था लेकिन अब 8 श्रेणियों में रखा जाने लगा है। नैक 4 सीजीपीए से लेकर 1.5 से कम सीजीपीए के आधार पर शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन करता है। यह सीजीपीए ही तय करता है कि कौन सबसे बेहतर संस्थान है। देखें किस सीजीपीए पर कौन सा ग्रेड मिलता है।
सीजीपीए (संचयी ग्रेड पॉइंट औसत) ग्रेड स्थिति
3.51 - 4.00 A++ मान्यता प्राप्त
3.26 - 3.50 A+ मान्यता प्राप्त
3.01 - 3.25 A मान्यता प्राप्त
2.76 - 3.00 B++ मान्यता प्राप्त
2.51 - 2.75 B+ मान्यता प्राप्त
2.01 - 2.50 B मान्यता प्राप्त
1.51 - 2.00 C मान्यता प्राप्त
छात्रों को क्या होता है इससे फायदा?
नैक द्वारा की जाने वाली रेटिंग से छात्रों को शिक्षण संस्थान के बारे में सही जानकारी मिलती है। छात्रों को संस्थान के बारे में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, बुनियादी ढांचा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी जानकारी हासिल करने में आसानी होती है। नैक ग्रेडिंग के जरिये ही छात्र अपने लिए बेहतर कॉलेज तलाश सकते हैं। इतना ही नहीं, नैक ग्रेड से शिक्षण संस्थानों की पढ़ाई और डिग्रियों का महत्व भी निर्धारित होता है।












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