Five Eyes Alliance: क्या है फाइव आइज, भारत-कनाडा तनाव में क्यों हो रही है इस अलायंस की चर्चा?

Five Eyes Alliance: कनाडा स्थित अमेरिकी राजदूत डेविड कोहेन ने दावा किया है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या के लिए भारत सरकार की संभावित संलिप्तता का जो आरोप लगाया है, दरअसल फाइव आइज द्वारा दी गई सूचनाओं पर आधारित था। हालांकि भारत ने इस बात से साफ इनकार किया है कि उनका कोई भी प्रतिनिधि इस हत्या में कभी संलिप्त रहा है। खैर यह विवाद अभी और चलेगा। पर यहां जानना काफी दिलचस्प होगा कि आखिकार यह फाइव आईज अलायंस क्या है और यह कैसे काम करता है।

फाइव आईज का मलतब पांच खुफ़िया तंत्रों के बीच सहयोग का गठबंधन है, यानी पांच देशों के खुफिया विभागों की आपसी तालमेल और नेटवर्क का सहयोग। पांच देश जिसमें कनाडा के साथ अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इन सभी देशों के अपने अपने स्वतंत्र खुफिया तंत्र हैं। लेकिन स्वतंत्र इकाई होते हुए भी ये सभी आपस में एक मजबूत सहयोग व तालमेल रखते हैं और एक दूसरे के लिए जरूरी सूचनाओं का आपस में आदान प्रदान करते रहते हैं। इन पांचों देशों की खुफिया एजेंसियां एक दूसरे देश के कानून, शासन के सामान्य सिद्धांत और साझा मुद्दों पर नजर रखते हैं और आवश्यक जानकारी तुरंत एक दूसरे तक पहुंचाते हैं। इनके आपसी समन्वय को ही फाइव आईज कहा जाता है।

What is Five Eyes, why is this alliance being discussed in India-Canada tension?

फाइव आइज अलायंस की जरूरत विश्व युद्ध के समय अनुभव हुई जब ब्रिटेन और अमेरिका ने जर्मन और जापानी कोड को तोड़ने के बाद गुप्त जानकारी साझा करने का निर्णय लिया। अमेरिका और ब्रिटेन की इस साझा कोशिश में कनाडा 1949 में शामिल हुआ, और बाद में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया 1956 में शामिल हुए। फ़ाइव आइज़ अलायंस के सभी सदस्य अपने और अलायंस देश की ख़ुफ़िया जानकारी साझा करने के साथ साथ सुरक्षा चुनौतियों के प्रति भी एक दूसरे को सचेत करते रहते हैं। खास कर चीन के उदय और उसके मजबूत होने के बाद से फाइव आईज एलायंस ज्यादा सक्रिय हैं।

वे फाइव आइज़ एजेंसी ओवर साइट और रिव्यू काउंसिल के माध्यम से एक पैनल के जरिए सदस्य देशों की गैर-राजनीतिक निगरानी और समीक्षा भी करते हैं। इनके बीच विचारों के आदान प्रदान और कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए वार्षिक बैठकें भी होती हैं। फाइव आइज अलायंस कूट भाषा के साथ साथ अन्य भाषाओं में की जा रही गतिविधियों का भी सटीक विश्लेषण कर ठोस सूचनाएं एकत्र करते हैं और उसका इस्तेमाल काउंटर नीति बनाने में करते हैं।

भारत-कनाडा विवाद पर इस अलायंस का रुख

18 सितंबर, 2023 को कनाडा की संसद में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जून में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को 'भारत सरकार के एजेंटों' का हाथ बताया था। जाहिर है कि इस मामले पर ट्रूडो ने 'फाइव आइज' के सहयोगियों को अपने पक्ष में लेने की कोशिश की । लेकिन, 'फाइव आइज' देशों ने अभी तक जितने बयान दिए हैं, वे काफी नपे तुले शब्दों वाले हैं। अमेरिका, यूके और आस्ट्रेलिया तीन देशों ने ट्रूडो के आरोपों पर चिंता जताते हुए इस मामले पर निगाह रखने की बात की है। जबकि न्यूजीलैंड ने इस मामले पर ज्यादा कुछ बोलने से ही मना कर दिया।

क्या 'फाइव आइज अलायंस' देशों की बढ़ सकती है संख्या?

साल 2021 में अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इसमें जोर देकर कहा गया था कि फाइव आइज अलायंस में सहयोगियों की संख्या बढ़नी चाहिए। अमेरिका इस 'फाइव आइज अलायंस' में केवल दक्षिण कोरिया ही नहीं बल्कि भारत, जर्मनी और जापान को भी जोड़ना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए इन देशों के साथ मिलकर काम करना बहुत जरूरी है।

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