Inner Core of Earth: क्या है पृथ्वी की आंतरिक कोर जिसने घूमना बंद कर दिया है
हमारी पृथ्वी तीन परतों से बनी हुई है। इसके सबसे निचले परत में कुछ अजीब हो रहा है, जिसका असर मानव जीवन पर भी पड़ सकता है!

Inner Core of Earth: हजारों किलोमीटर अंदर, पृथ्वी के आंतरिक भाग में बहुत कुछ अजीब हो रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आंतरिक कोर (पृथ्वी के सबसे अंदर और बीच का भाग) बाकी ग्रह की तुलना में तेजी से घूमता है, लेकिन पिछले एक दशक में एक स्टडी के अनुसार पृथ्वी के आंतरिक कोर ने हाल ही में घूमना बंद कर दिया है।
साथ ही उसने अपने घूमने की दिशा को ही उलट दिया है। यह स्टडी एक प्रकार से पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता और इसकी परतों के बीच की चल रही अंतःक्रियाओं (घटनाओं) की समझ के लिए एक महत्वपूर्ण खोज मानी जा रही है।
पृथ्वी तीन हिस्सों में बंटी है?
बात अगर धरती की परतों की करें तो इसको तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जिनमें क्रस्ट (सबसे ऊपर), मेंटल (दूसरा परत) और कोर (सबसे अंदर का हिस्सा) शामिल हैं। बता दें कि भूकंपीय तरंगों की स्टडी के दौरान ग्रह (पृथ्वी) के केंद्र में स्थित आंतरिक कोर की पहली बार साल 1936 में पहचान की गई थी। जानकारी के मुताबिक इसकी चौड़ाई लगभग 7,000 किलोमीटर है और यह एक एक तरल लोहे के खोल के चारों ओर एक ठोस लोहे की सतह से बनी है।
साल 1996 में प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर' के अध्ययन के अनुसार, पिछले तीन दशकों के दौरान भूकंपीय तरंगों को पृथ्वी के आंतरिक कोर के माध्यम से गति करने में लगने वाले समय में थोड़ा लेकिन लगातार परिवर्तन हुआ है। आंतरिक कोर का घुमाव, जो मेंटल और क्रस्ट की तुलना में लगभग 1 डिग्री प्रति वर्ष तेज है, उसको इस विचरण का कारण माना जाता है।
दिन-रात के समय में हो सकता है बदलाव?
बीजिंग में पेकिंग विश्वविद्यालय के भूकंपविज्ञानी यी यांग और शियाओडोंग सोंग ने एक स्टडी की है। इस स्टडी के मुताबिक आंतरिक कोर ने 2009 में घूमना बंद कर दिया है और अपने घूमने की दिशा बदलने की प्रक्रिया में हो सकता है। नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कोर का घूमना दिन की लंबाई में बदलाव से प्रभावित होता है और पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में कितना समय लगता है, इसमें मामूली बदलाव (दिन-रात की प्रक्रिया) कर सकता है।
बता दें कि आंतरिक कोर ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र को बनाए रखने और पूरे ग्रह के घूर्णन की गति को प्रभावित करने में भूमिका निभाता है। वहीं लॉस एंजिल्स में दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के भूकंपविज्ञानी जॉन विडाले का कहना है कि मुझे लगता है कि हम इसका पता लगाने की कगार पर हैं, लेकिन मैं पक्का नहीं हूं।
पेकिंग विश्वविद्यालय की टीम ने ज्यादातर साल 1995 और 2021 के बीच के भूकंपों का विश्लेषण किया है। इनके शोध से पता चला कि 2009 के आसपास ही किसी समय कोर ने घूमना बंद कर दिया। दरअसल, कोर का घूमना दिन की लंबाई में परिवर्तन से संबंधित है और इससे पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में लगने वाले सटीक समय में थोड़े बदलाव हो सकते हैं। यह ग्रह की विभिन्न परतों क्रस्ट, मेंटल और कोर के बीच के संबंध पर निर्भर करता है।
विश्वविद्यालय के जांच किए गए आंकड़े संकेत देते हैं कि आंतरिक कोर 'सबरोटेशन' की ओर वापस जाने की प्रक्रिया में भी हो सकता है। यदि ऐसा है तो शायद चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण बल के साथ कुछ तो हो रहा है जो आंतरिक कोर के घूर्णन पर असर डाल रहा है। आंतरिक कोर में हो रही इस भू-भौतिकीय घटनाओं को हम पृथ्वी पर एक दिन की लंबाई में वृद्धि या कमी से जोड़ सकते हैं।
ऐसे घूमती है पृथ्वी और होता है दिन-रात
गौर करने वाली बात यह है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर लम्बवत 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसी वजह से पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के मौसम आते हैं। अपने अक्ष पर यह 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है जिससे इस पर दिन और रात होते हैं। वहीं पृथ्वी की दो गतियां हैं 'घूर्णन' और 'परिक्रमण'। घूर्णन (Rotation) को दैनिक गति भी कहते हैं जबकि परिक्रमण (Revolution) को वार्षिक गति कहते हैं। सच यह है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूरब की ओर घूमती रहती है जिसे पृथ्वी की दैनिक गति कहते हैं। एक घूर्णन पूरा करने में पृथ्वी 23 घंटे, 56 मिनट और 4.09 सेकेंड का समय लेती है। पृथ्वी की दैनिक गति की वजह से ही दिन और रात होते हैं।
इससे क्या हो सकता है नुकसान?
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पेकिंग विश्वविद्यालय की शोध टीम का मानना है कि पृथ्वी की परतों के बीच गतिशील अंतःक्रियाएं हो रही हैं, वे ग्रह के अतीत, वर्तमान और भविष्य को कैसे प्रभावित कर सकती हैं, इस बारे में गहन जांच की आवश्यकता है। इन अंतःक्रियाओं को समझना, पूरे ग्रह को समझने के लिए आवश्यक है। वैसे फिलहाल हमारे पास ऐसा कोई फैक्ट या सबूत नहीं है कि आंतरिक कोर के घूर्णन में परिवर्तन होने से सतह पर रहने वाले लोगों को यह कैसे नुकसान पहुंचाएगा।
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