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Cordyceps Fungus: क्या ‘हिमालयन गोल्ड’ चुराने के लिए चीनियों ने की थी तवांग में घुसपैठ?

कॉर्डिसेप्स फंगस भारत के हिमालय वाले क्षेत्र सहित किंघई-तिब्बती पठार में पाया जाता है। जिसे हिमालयन गोल्ड कहते हैं। इसे पाने के लिए चीन ने तवांग में घुसपैठ की थी।

what is Cordyceps Fungus for chinese forces infiltrate Tawang to steal the Himalayan Gold?

Cordyceps Fungus: तवांग में 9 दिसंबर 2022 को भारत और चीनी सैनिकों के बीच LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर झड़पें हुई थी। जिसके बाद चीनी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, चीन के द्वारा की गयी यह हरकत पहली बार नहीं थी। दरअसल, चीनी सेना LAC पार करके भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने की कोशिशें करती रहती हैं। भारतीय सेना ने भी उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया हैं। इस बीच, भारतीय क्षेत्र में चीन की घुसपैठ को लेकर एक चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आयी हैं। इस रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ कि आखिर चीन ने तवांग में घुसपैठ की हरकत क्यों की?

IPCSC ने किया खुलासा

इंडो-पैसिफिक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (IPCSC) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि भारतीय क्षेत्र में अक्सर चीनी सैनिकों द्वारा घुसपैठ 'कॉर्डिसेप्स' को इकट्ठा करने के लिए की जाती है। अब सवाल यह है कि कॉर्डिसेप्स क्या है? दरअसल कॉर्डिसेप्स चीन में बनने वाली एक महंगी हर्बल दवा है। कॉर्डिसेप्स को 'कैटरपिलर फंगस' या 'हिमालयन गोल्ड' के रूप में भी जाना जाता है। वहीं भारत के कुछ जानकार इसे 'कॉर्डिसेप्स मिलिटेयर्स मशरूम' भी कहते हैं। कॉर्डिसेप्स को चीन में सोने (गोल्ड) से भी महंगा बताया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सैनिकों द्वारा इसी कैटरपिलर फंगस की तलाश में अवैध रूप से अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में घुसपैठ करने की संभावना है।

कॉर्डिसेप्स क्या है?

India Today Group की GNT में छपे एक लेख के अनुसार कॉर्डिसेप्स एक फंगस है जो तिब्बत के पठारीय क्षेत्रों में कुछ कैटरपिलर पर रहती है। सालों से कॉर्डिसेप्स का उपयोग खांसी, पुरानी ब्रोंकाइटिस, सांस संबंधी बीमारी, गुर्दे की बीमारी, बिस्तर में पेशाब करने, पुरुष यौन समस्याओं, एनीमिया, अनियमित दिल की धड़कन, उच्च कोलेस्ट्रॉल, लीवर डिसऑर्डर, चक्कर आना, कमजोरी, कानों का बजना सहित अवांछित वजन घटाने के इलाज और अफीम की लत छुड़वाने के लिए किया जाता है। दरअसल यह कॉर्डिसेप्स के जो फंगस होते हैं वह मृत कीड़ों के मांस पर फलते-फूलते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ये कॉर्डिसेप्स क्रिकेट (झींगुर), रेशमकीट प्यूपा, मीलवर्म, टिड्डे, सफेद-धब्बेदार फ्लावर चेफर लार्वा व अन्य तरह की कीटों पर उगते हैं।

कॉर्डिसेप्स के उत्पादन में आई कमी

रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में कॉर्डिसेप्स की फसल चीन में अच्छी नहीं हुई है और किंघई, चीन के सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्रों में हैं। जबकि कॉर्डिसेप्स की मांग चीन में तेजी से बढ़ी हैं। ज्यादा डिमांड और कम संसाधनों के कारण फंगस की जमकर कटाई की गयी थी और अब इसकी कमी से जूझना पड़ रहा हैं। IPCSC के अनुसार, ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि चीन पहले इसका 43,500 किलोग्राम उत्पादन करता था लेकिन साल 2018 में यह गिरकर 41,200 किलोग्राम हो गया। यानि उत्पादन में लगभग 5.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। वहीं लोकल मीडिया के अनुसार साल 2010 और 2011 में इसका उत्पादन 150,000 किलोग्राम रिपोर्ट किया गया था।

भारतीय 'हिमालयन गोल्ड' पर नजर

इस वजह से चीन की नजर अब भारतीय क्षेत्रों में होने वाले इसी 'हिमालयन गोल्ड' पड़ी है। क्योंकि यह फंगस किंघई-तिब्बती पठार के अलावा भारतीय हिमालय क्षेत्र में भी पायी जाती हैं। एक आंकड़े के मुताबिक इस कॉर्डिसेप्स की कुल कीमत साल 2022 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1,072.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गयी है। गौरतलब है कि चीन, दुनिया में कॉर्डिसेप्स का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है।

किंघई में तो कॉर्डिसेप्स उत्पादक कंपनियां, इसे लाने वालों को लाखों युआन का भुगतान करती है। IPCSC के अनुसार, हिमालय के कुछ क्षेत्र तो अपने जीविकोपार्जन के लिए इस फंगस को इकट्ठा करने और बेचने पर ही निर्भर हैं। ऐसा कहा जाता है कि तिब्बती पठार और हिमालय में घरेलू आय का 80 प्रतिशत तक कैटरपिलर फंगस बेचने से आ सकता है।

भारत में भी इस पर हो रही है खोज

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    बीते साल 2021 के मई महीने में एक खबर आई कि गुजरात के वैज्ञानिकों ने एक मशरुम को उगाया है, जिसकी कीमत लाखों में है। गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डिजर्ट इकोलोजी संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस शोध को अंजाम दिया। संस्थान के डायरेक्टर वी विजय कुमार ने कहा था Cordyceps Militaris को हिमालयी सोना कहा जाता है। उसमें स्वास्थ्य के कई फायदे हैं और यह जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों को रोक सकता है। संस्थान ने इस मशरूम के एंटीट्यूमर पहलू का अध्ययन किया है। शुरुआती जांच से पता चला है कि इस मशरूम का अर्क महत्वपूर्ण नतीजे पेश कर सकता है।

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