Forex Reserves: क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार, आजादी के बाद बढ़ गया 335 गुना

भारत के पास विदेशी मुद्रा का विशाल भंडार है। आपने यह शब्द कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप जानते है कि यह विदेशी मुद्रा भंडार आखिर क्या होता है और कितने प्रकार का होता है?

What are foreign exchange reserves, increased 335 times after independence

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 24 फरवरी 2023 तक $561.26 बिलियन था और एक हफ्ते पहले यानी 17 फरवरी को $566.95 बिलियन था। इसका मतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक हफ्ते में $5.69 बिलियन कम हो गया। हालांकि, यह उतार-चढ़ाव कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि भारत के पास अभी भी विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है और यह आजादी के बाद से 335 गुना बढ़ गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है?
किसी भी देश के केंद्रीय बैंक, जैसे भारत में रिजर्व बैंक में जमा विदेशी करेंसी सहित गोल्ड और एसडीआर को विदेशी मुद्रा भंडार माना जाता है। सामान्यतः इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वित्त को सुविधाजनक बनाने, विनिमय दर स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय झटके या संकट के खिलाफ बफर प्रदान करने के लिए किया जाता है।

दुनिया के सभी देशों के विदेशी मुद्रा भंडार उनकी अर्थव्यवस्था, उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के स्तर और उनकी विनिमय दर व्यवस्था जैसे मुख्य बिंदुओं के आधार पर अलग-अलग होते हैं। ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार वाले देश आर्थिक झटकों या संकटों का सामना करने में सक्षम होते हैं, जबकि कम विदेशी मुद्रा भंडार वाले देश आर्थिक झटकों के प्रति अधिक खतरे में होते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार कितने प्रकार के होते हैं?
फॉरेन करेंसी एसेट (एफसीए) - यह सबसे आम प्रकार का विदेशी मुद्रा भंडार होता है। इसमें केंद्रीय बैंक में रखी गई विदेशी मुद्राओं आती हैं। एफसीए में सिक्योरिटीज, दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों और बैंक ऑफ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड में डिपॉजिट्स, और विदेशी कमर्शियल बैंकों में डिपॉजिट्स शामिल हैं। यह आमतौर पर अलग अलग देशों की मुद्राओं में रखे जाते हैं। आरबीआई के पास कई विदेशी मुद्राएं हैं जैसे अमरीकी डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग, जापानी येन।

स्वर्ण भंडार - केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में सोना भी रखते हैं। सोने को एक सुरक्षित-संपत्ति माना जाता है और इसका उपयोग देश के विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए किया जाता है। मई 2022 में आरबीआई ने एक रिपोर्ट में बताया कि मार्च 2022 के अंत में RBI के पास 760.42 मेट्रिक टन सोना था, जिसमें से 453.52 मेट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के पास था, वहीं 295.82 मेट्रिक टन सोना घरेलू स्तर पर था।

स्पेशल ड्राइंग राइट्स (एसडीआर) - एसडीआर आईएमएफ द्वारा बनाई गई एक संपत्ति है। यह अमेरिकी डॉलर, यूरो, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड, चीनी रॅन्मिन्बी जैसी मुद्राओं को मिलाकर बनाया जाता है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारत का एसडीआर $18.2 बिलियन का है।

रिजर्व ट्रेंच पोजिशन (आरटीपी) - जब भी कोई देश आईएमएफ के साथ जुड़ता है तब उसे कुछ पैसा आईएमएफ में जमा कराना होता है जोकि उस देश का कोटा होता है। देशों द्वारा जमा की गई इस राशि का एक हिस्सा देश के आरटीपी में रखा जाता है, जो आईएमएफ में देश के बचत खाते में सुरक्षित रहता है। आरटीपी वित्तीय जोखिमों के खिलाफ एक बफर या बीमा के रूप में काम करता है और आर्थिक संकट में कोई भी देश अपने आरटीपी का इस्तेमाल कर सकता है। यह भी एक विदेशी मुद्रा भंडार ही होता है। आरबीआई के मुताबिक भारत की आईएमएफ में फिलहाल $5.1 बिलियन की आरटीपी है।

विदेशी मुद्रा भंडार के फायदे
विदेशी मुद्रा भंडार कई कारणों से किसी देश के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। सबसे पहले और मुख्य कारण, यह अंतराष्ट्रीय मंच पर किसी देश की इज्जत को बहुत बढ़ा देता है और भविष्य में किसी देश के लिए लोन लेना आसान बना देता है। किसी देश का अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार विदेशी निवेश को भी आकर्षित करता है, क्योंकि अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश की विदेश में अच्छी छवि बनती है। किसी देश का अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार होने से कई देश उस देश को कम दरों पर उधार भी दे देते हैं। जब किसी देश को अलग एजेंसियों द्वारा क्रेडिट रेटिंग दी जाती है तब उस देश की साख के दिए इस देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी देखा जाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार के कई और फायदे भी होते हैं, जैसे कि आयात के लिए भुगतान करने या विदेशी ऋण चुकाने में मुश्किल नहीं होती। दूसरा, विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है। तीसरा, विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों के खिलाफ एक बफर के रूप में काम करता है। संकट की स्थिति में, जैसे अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि या वित्तीय बाजार में गिरावट, और अन्य आर्थिक संकटों में विदेशी मुद्रा भंडार अर्थव्यवस्था को संतुलित करने का काम करता हैं।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े

  • ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में विदेशी मुद्रा भंडार 1998 से 2023 तक औसतन $272.78 बिलियन रहा।
  • ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1998 से वर्ष 2023 के बीच में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सबसे कम सितंबर 1998 में था, तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $29.048 बिलियन था और भारत का सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार वर्ष 2021 के सितंबर में था, तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $642.45 बिलियन हो गया।
  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार वित्तीय वर्ष 1991-92 में $9.22 बिलियन ही रह गया था, तब भारत को तेल का आयात जारी रखने के लिए सोना गिरवी रखकर डॉलर जुटाने पड़े थे।
  • इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के बाद यानी वित्तीय वर्ष 1951-52 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र $1.82 बिलियन था।
  • ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया में पांचवे स्थान पर आता है।

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