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Virbhadra Singh Family: हिमाचल प्रदेश में चर्चित वीरभद्र सिंह के परिवार का क्या है राजनीतिक इतिहास?

Virbhadra Singh Family: हिमाचल प्रदेश में सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्तमान कांग्रेस सरकार के कुछ विधायक बगावत पर उतर आए हैं। तो वहीं प्रदेश कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस्तीफा दे दिया जिनके पिता राजा वीरभद्र सिंह प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे थे।

मंत्री पद से इस्तीफे के बाद विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पार्टी और सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही अपने पिता को याद कर भावुक हुए विक्रमादित्य ने शायरी के माध्यम से सुक्खू सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "कितना है बद-नसीब 'ज़फर' दफन के लिए दो गज जमीन भी न मिली कू-ए-यार में"।

Virbhadra Singh Family

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति जो 6 बार राज्य का सीएम रहा, जिसके कारण राज्य में यह सरकार बनी, उन्हें माल रोड पर उनकी प्रतिमा के लिए एक छोटी सी जगह नहीं मिली। वहीं हाल ही में वे बागी विधायकों से भी मुलाकात कर चुके हैं। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सबसे महत्त्वपूर्ण रहे पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटे विक्रमादित्य सिंह के राजनीतिक जीवन की यात्रा भी रोचक रही है।

बुशहर रियासत के घराने से ताल्लुक

साल 1934 में बुशहर रियासत में राजा पदम सिंह और शांति देवी के घर पर वीरभद्र सिंह का जन्म हुआ था। वीरभद्र सिंह की स्कूली पढ़ाई शिमला के मशहूर बिशप कॉटन स्कूल से हुई थी। साल 1947 में वीरभद्र सिंह पिता पदम सिंह की मृत्यु के बाद राजवंश की परंपरा के तहत राज गद्दी पर विराजमान हुए। इस समय वीरभद्र सिंह की उम्र केवल 13 साल थी।

बिशप कॉटन स्कूल से पढ़ाई के बाद सेंट स्टीफन कॉलेज चले गए। जल्द ही वीरभद्र सिंह नेता के तौर पर उभरे। सबसे पहले महासू लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर वो लोकसभा पहुंचे। इसके बाद वीरभद्र सिंह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पांच बार सांसद और छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 8 जुलाई 2021 को वीरभद्र सिंह ने अंतिम सांस ली।

भगवान कृष्ण से जोड़ते हैं संबंध

शायद आप ये बात ना जानते हों कि वीरभद्र सिंह परिवार अपना संबंध भगवान श्री कृष्ण से जोड़ता है। वीरभद्र सिंह स्वयं को भगवान श्रीकृष्‍ण की 122वीं पीढ़ी के सदस्य मानते थे। मान्यता है कि वर्तमान में जहां मां भीमाकाली माता का मंदिर है, वहां पहले शोणितपुर होता था। शोणितपुर राक्षस राजा बाणासुर की राजधानी थी।

किंवदंती के अनुसार कृष्ण के पोते अनिरुद्ध ने बाणासुर की पुत्री उषा का हरण इसी स्थान से किया था। यहीं उनका बाणासुर से युद्ध हुआ था। अनिरुद्ध की विजय के बाद यहां कृष्ण वंशियों ने शासन करना शुरू किया।

वीरभद्र सिंह की बुशहर रियासत का जो पद्म पैलेस है वहां भी जो कलाकृतियां लगाई गई हैं, वे कृष्ण भगवान और उनकी लीलाओं से संबंधित हैं। वहीं अब वीरभद्र सिंह के बाद विक्रमादित्य सिंह भगवान कृष्ण की 123वीं पीढ़ी के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

प्रतिभा सिंह का राजनीतिक सफर

रानी प्रतिभा सिंह का जन्म 16 जून 1956 को शिमला, हिमाचल प्रदेश में हुआ था। उन्होंने 1985 में वीरभद्र सिंह से शादी की । वह उनकी दूसरी पत्नी हैं। प्रतिभा सिंह ने 2004 के लोकसभा चुनावों में महेश्वर सिंह को हराकर संसद में कदम रखा था। इसके बाद मंडी उपचुनाव में 2013 और उपचुनाव 2021 में वे फिर सांसद बनी। वर्तमान में वे प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष हैं।

कैसे शुरू हुई विक्रमादित्य की राजनीति

17 अक्टूबर 1989 को जन्में विक्रमादित्य सिंह की शुरुआती पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल में हुई। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन्स कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद यहीं से हिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुशन भी की। विक्रमादित्य सिंह 2013 से 2018 तक हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।

2017 में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद अब 2022 में हुए चुनाव में भी वो उतरे और प्रदेश कैबिनेट में मंत्री पद ग्रहण किया। विक्रमादित्य ने हिमाचल प्रदेश की ओर से शूटिंग स्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व भी किया है। 2007 में ट्रैप शूटिंग में वे कांस्य पदक जीते थे। वे हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स, कल्चर एंड इनवायरांमेंट एसोसिएशन नामक एनजीओ भी चलाते हैं।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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