टैटू गुदवाना यानी कैंसर को दावत देना
दुनिया भर में युवाओं में टैटू गुदवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में यह ट्रेंड और भी व्यापक रूप जरूर लेगा, क्योंकि छोटे-छोटे बच्चों को टैटू का चस्का उनके माता-पिता खुद लगा रहे हैं। आज च्विंग-गम के साथ मिलने वाले टैटू लगाकर बच्चों को खुश देख मां-बाप खुश हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता है कि टैटू गुदवाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
लंदन की ब्रेडफोर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर स्किन साइंस के निदेशक डेसमंड टोबिन और मेडिकल इंजीनियर कोलिन ग्रांट ने एक अध्यन किया है, जिसमें पता चला है कि डाई का इस्तेमाल कर शरीर की त्वचा को परमानेंट कलर दे दिया जाता है। टैटू के नैनो पार्टिकल त्वचा से होते हुए रक्त में चले जाते हैं। टैटू इंक में पाये जाने वाले कासीनोजेनिक कंपाउंड बेहद हानिकारक होते हैं।
ये तत्व रक्त से होते हुए स्प्लीन और किडनी पर अपना प्रभाव डालते हैं, जब रक्त प्यूरिफिकेशन के लिये वहां पहुंचता है। बार-बार हानिकारक तत्व आने से किडनी डैमेज होने का खतरा बन जाता है। यूरोप में बनने वाली टैटू इंक में इस्तेमाल होने वाले 21 तत्वों में से 13 तो बेहद हानिकारक हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि टैटू बनाने वाली कंपनियों को उन सभी रासायनिक तत्वों को सार्वजनिक करना चाहिये, जो इंक बनाने में इस्तेमाल की जाती है, ताकि टैटू बनवाने वाले लोगों को पता चल सके कि उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। कम से कम नो-स्मोकिंग वॉर्निंग की तरह चेतावनी जरूर दी जानी चाहिये।













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