UP Mafia List: उत्तर प्रदेश में अतीक जैसे कई अपराधी, जानें 10 बड़े नेता माफिया कौन हैं
यूपी में कुल 61 बड़े अपराधियों की एक लिस्ट तैयार की गई है। इसमें मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह जैसे माफियाओं के नाम शामिल हैं।

UP Mafia List: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कोई माफिया किसी को धमका नहीं सकता। यूपी में पहले कानून व्यवस्था खराब थी और अब राज्य में दंगे नहीं होते हैं। बता दें कि 15 अप्रैल 2023 की रात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में सरेआम गोली मारकर की गई हत्या के बाद से यूपी में माहौल गरमाया हुआ है।
दरअसल योगी आदित्यनाथ ने छह साल पहले सत्ता संभालते ही कानून व्यवस्था में सुधार कर प्रदेश की छवि बदलने को प्राथमिकता दी। इसके लिए यूपी पुलिस को भी क्राइम को कंट्रोल करने के लिए खुली छूट दी गई। पिछले महीने मार्च में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जब से योगी मुख्यमंत्री बने है तब से राज्य में कुल 10,713 मुठभेड़ें (एनकाउंटर) हुई हैं। इन मुठभेड़ों में 178 सूचीबद्ध बड़े अपराधियों को जवाबी कार्रवाई में मार गिराया गया।
वहीं अब खबरें सामने आ रही हैं कि अब योगी सरकार माफिया सफाई अभियान चलाने जा रही है। इसके लिए 61 माफियाओं की सूची तैयार की जा रही है। जिसमें यूपी पुलिस ने शराब माफिया, पशु तस्कर, वन माफिया, खनन माफिया, शिक्षा माफिया आदि की सूची बनाई गई है। वैसे आज हम आपको यूपी के 10 ऐसे बड़े माफिया के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनके गुनाहों की लिस्ट जितनी लंबी है, उतना ही बड़ा उनका राजनीतिक करियर भी है। ये माफिया हैं, गैंगस्टर हैं, हिस्ट्रीशीटर हैं, बाहुबली हैं और दबंग के साथ-साथ आतंक का दूसरा नाम भी हैं।
मुख्तार अहमद अंसारी
यूपी के मऊ से 5 बार विधायक रह चुका बाहुबली मुख्तार अहमद अंसारी पिछले करीब 18 सालों से जेल में ही बंद है। मुख्तार पर हत्या, अपहरण, फिरौती, रंगदारी जैसे करीब 4 दर्जन मुकदमें दर्ज हैं। उसकी दबंगई इतनी थी कि वह जेल में बैठे-बैठे चुनाव जीत जाता था और गैंग भी वहीं से चलाता था। साल 2005 में मुख्तार अंसारी ने मऊ में हिंसा भड़काने और बीजेपी नेता कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की हत्या के मामले में गाजीपुर पुलिस के सामने सरेंडर किया था और तभी से वह जेल में बंद हैं। फिलहाल मुख्तार बांदा जेल में बंद है। उसके परिवार की करोड़ों की संपत्ति योगी सरकार ने कुर्क और जब्त कर ली है। साथ ही कई संपत्तियों पर बुलडोजर भी चलाया गया है।
बृजेश सिंह
पूर्वांचल का सबसे बड़ा माफिया डॉन बृजेश सिंह, जिसने यूपी-बिहार ही नहीं बल्कि मुंबई के जेजे अस्पताल में साथियों के साथ मिलकर पुलिस की मौजूदगी में गवली गिरोह के चार लोगों को गोलियों से भून डाला था। बृजेश सिंह के ऊपर 41 मामले दर्ज थे। इसमें से 15 में वह बरी हो चुका है और 3 मुकदमों का ट्रायल चल रहा है। इसमें दो मामलों पर पहले ही जमानत मिल चुकी थी। वहीं एक अन्य मामले में अगस्त 2022 में उसे जमानत मिली थी। तभी 13 साल बाद बृजेश सिंह जेल से बाहर आया। दरअसल आरोप है कि उसने साल 2001 में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र में मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला किया था। इस घटना को लेकर साल 2009 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भुवनेश्वर से बृजेश सिंह को गिरफ्तार किया था, तभी से वह जेल में बंद था। वहीं जेल में बंद होने के बावजूद साल 2016 के एमएलसी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खुद बृजेश सिंह वाराणसी से मैदान में उतरा। तब उसे बीजेपी का समर्थन मिला और उसने जीत हासिल की थी।
राजा भैया
प्रतापगढ़ जिले के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया जो कुंडा विधानसभा क्षेत्र से लगातार सात बार निर्दलीय विधायक बन चुका है। पूर्वांचल में राजा भैया को एक बाहुबली विधायक और माफिया के तौर पर जाना जाता है। राजा भैया के खिलाफ कुंडा के साथ-साथ महेशगंज, प्रयागराज, रायबरेली के ऊंचाहार और लखनऊ में हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, अपहरण, गबन, भ्रष्टाचार समेत अन्य कई संगीन धाराओं में 47 मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, कुछ मुकदमों में राजा भैया को कोर्ट से तो राहत मिल चुकी हैं। बता दें कि साल 2003 में जब राजा भैया की कोठी पर छापा पड़ा, तब उसके 600 बीघा तालाब में जांच के दौरान कई नरकंकाल बरामद हुए थे। वहीं जब-जब मायावती की यूपी में सरकार आती राजा भैया को जेल जाना पड़ा है।
विजय मिश्रा
भदोही के बाहुबली पूर्व विधायक रहे विजय मिश्रा पर गैंगस्टर एक्ट के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) का भी मामला चल रहा है। विजय मिश्रा की भदोही और प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक लगभग 55 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। विजय मिश्रा ज्ञानपुर से विधायक रह चुका है। वर्तमान में वह आगरा जेल में बंद है। विजय मिश्रा पर संपत्ति पर कब्जा करने और एक युवती का रेप करने के अलावा कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
राजन तिवारी
कभी श्रीप्रकाश शुक्ला का साथी रहा राजन तिवारी मूल रूप से गोरखपुर का रहने वाला है। राजन तिवारी बिहार में दो बार विधायक रह चुका है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजन ने लखनऊ में बीजेपी की सदस्यता भी ली थी। इसपर काफी विवाद हुआ जिसके बाद उसे साइडलाइन कर दिया गया। इससे पहले वह बीएसपी में था। बता दें कि अगस्त 2022 को उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने 17 सालों से फरार पूर्व विधायक राजन तिवारी को भारत-नेपाल सीमा पर पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल इलाके से गिरफ्तार किया था। गोरखपुर पुलिस को 1998 में पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी से संबंधित एक मामले में तलाश थी। तिवारी पर गैंगस्टर अधिनियम में मामला दर्ज है।
सुधीर कुमार सिंह
बसपा नेता व गोरखपुर जिले में पिपरौली के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और माफिया सुधीर सिंह पर दर्ज आपराधिक मामलों की एक लंबी लिस्ट है। बीते विधानसभा चुनाव में सहजनवां विधानसभा क्षेत्र से सुधीर बसपा का उम्मीदवार भी था। हालांकि, वह जीत नहीं सका। उस पर हत्या के प्रयास, हत्या समेत 26 मुकदमे दर्ज हैं।
रिजवान जहीर
सपा नेता व पूर्व सांसद रिजवान जहीर बलरामपुर का रहने वाला है। यूपी पुलिस के अनुसार पूर्व सांसद रिजवान जहीर के ऊपर 14 मुकदमे दर्ज हैं। जिसमें हत्या समेत गंभीर आरोप हैं।
दिलीप मिश्रा
बसपा व सपा का नेता रह चुका दिलीप मिश्रा एक बाहुबली और यूपी पुलिस की लिस्ट का टॉप माफिया रह चुका है। मौजूदा समय में फतेहगढ़ जेल में बंद है। उसने 12 जुलाई 2010 को प्रयागराज में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर स्कूटी में छिपाकर रखे गए रिमोट बम से जानलेवा हमला किया गया था। दिलीप मिश्रा पूर्व में ब्लाक प्रमुख भी रह चुका है।
अनुपम दुबे
बसपा नेता अनुपम दुबे के खिलाफ 41 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे पहले साल 1996 में कन्नौज के गुरसहायगंज कोतवाली प्रभारी रामनिवास यादव की ट्रेन में गोली मारकर हत्या करने के बाद वो चर्चाओं में आया था। अनुपम दुबे फिलहाल मैनपुरी की जिला जेल में बंद हैं। उस पर एनएसए समेत हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी जैसे 50 से ज्यादा मामले फर्रुखाबाद, मैनपुरी, कन्नौज, कानपुर में दर्ज हैं। अनुपम दुबे ने साल 2017 में हरदोई की सवायजपुर विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वो जीत नहीं सका।
हाजी इकबाल
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पूर्व एमएलसी व खनन माफिया व बाहुबली हाजी इकबाल उर्फ बाला सहारनपुर का रहने वाला है। वह लखीमपुर खीरी, गोरखपुर और सीतापुर की कई चीनी मिलों को खरीदने वाली कंपनी का डायरेक्टर भी है। हाजी इकबाल के खिलाफ लखनऊ के गोमतीनगर थाने में कंपनी एक्ट के अलावा अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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