इतिहास के पन्नों से- ये आकाशवाणी है
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) खबरिया चैनलों की भीड़ और कोलहाल में कभी-कभी हमे भूल जाते हैं कि एक दौर में भारतीयों के जीवन में आकाशवाणी से मिलने वाली खबरों का क्या मतलब था। दिल्ली के संसद मार्ग स्थित आकाशवाणी भवन अपने आप में पूरा इतिहास समेटे हैं।
इसके पास से गुजरने पर समझ आता है कि इधर से ही दशकों देवकीनंदन पांडे, विनोद कश्यप,जयदेव त्रिदेवी, अशोक वाजपेयी, मेल्विल डिमेलो जैसी शख्सियतों ने खबरें पढ़ीं। इधर ही एक दौर में महान कमेंटेटर जसदेव सिंह भी काम करते थे। इधर तेजी बच्चन जी, अमृता प्रीतम जी और विष्णु प्रभाकर जैसे साहित्य के संसार दिग्गज काम करते थे।
गांधी जी से नेहरु
इसी इमारत से गांधी जी, पंडित नेहरु, मोहम्मद अली जिन्ना ने भी संदेश दिए। और कौन भूल सकता है नेहरु जी द्वारा देश की स्वाधीनता के अवसर पर दिया गया संदेश? क्या कोई भूलेगा जब उन्होंने बापू की हत्या के बाद इधर से देश को उनकी मृत्यु की जानकारी दी थी?
आकाशवाणी का अर्थ
आकाशवाणी को पहले आल इंडिया रेडियों ही कहा जाता था। 1936 में मैसूर के धाक़ड़ विद्वान और चिंतक एम.वी.गोपालस्वामी ने इस शब्द को गढ़ा। आकाशवाणी का अर्थ है आकाश से मिला संदेश। पंचतंत्र की कथाओं में इस शब्द का जिक्र मिलता है। देश के स्वतंत्र होने के बाद आल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी ही कहा जाने लगा।
केन्द्र दिल्ली
हालांकि भारत में रेडिया का सफर जुलाई 1923 में शुरू होता है मुंबई से, पर इसका केन्द्र तो आगे चलकर दिल्ली ही हो गया। शुरूआती दौर में तो आकाशवाणी से अंग्रेजी और हिन्दी में ही खबरें और दूसरे कार्यक्रम पेश होते थे। फिर इसका विस्तार हुआ। आगे चलकर आकाशवाणी से विविध भारती, युववाणी और दूसरी सेवाएं चालू हुईं।
दिल्ली में आकाशवाणी की बिल्डिंग गोलाकार है। हालांकि इसे बने हुए दशकों हो गए है, पर इसमें अब भी पुरानेपन का अहसास नहीं होता। हां, इसकी लिफ्टों पर चढ़कर आपको समझ आता है कि मामला पुराना है। लिफ्टों पर लिफ्ट की कंपनी के नाम के नीचे उसके बम्बई और कराची का भी उल्लेख है।













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