इतिहास के पन्नों से- किसी ने नहीं ख्याल रखा सर सैयद अहमद के घर का
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। राजधानी दिल्ली का दरियागंज इलाका। बेशक ये इधर का तारीखी इलाका है। इधर ही एक अरसा पहले जन्म हुआ था उस शख्स का जिसने मुसलमानों को तालीम की रोशनी दिखाई थी।
हम बात कर रहे हैं सर सैयद अहमद खान साहब की। पर इससे पहले कि दिल्ली सरकार या मुसलमानों के संगठन इस घर को अपने कब्जे में लेते, इसे बिल्डरों को बेच दिया गया। अब वहां पर फ्लैट बनेंगे। वहां पर उस महान शिक्षाविद की याद में कोई संग्रहालय अब नहीं बनेगा।
दरियागंज में है घर
ये घर दरियागंज के सर सैयद अहमद स्ट्रीट पर है। इसके चंद एक कदमों की दूरी पर परवेज मुशर्ऱफ का जन्म स्थान भी है। उसे नहर वाली हवेली कहा जाता है। सर सैयद अहमद साहब का जन्म इस घर में 17 अक्तूबर 1817 को हुआ था। वे एक धनी परिवार में पैदा हुए थे।
संग्रहालय का वादा
जब दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं तब वे बार-बार वादा करती थीं कि वे सर सैयद अहमद के घर को संग्रहालय में तब्दील करवाएंगी। पर उनका वादा कभी पूरा नहीं हुआ। हालांकि उनके घर का स्वामित्तव तो लगातार कई बार बदला, पर हाल के दौर में इस घर की बेहद खराब हालत था। इसके अंदर भैसें बंधी होती थीं। घर के बाहर एक पत्थर भी नहीं लगा था, जिसमें यह लिखा होता कि इसका उस अजीम हस्ती से किस तरह का संबंध था।
दिल्ली में कुछ साल पहले इस मकान की मरम्मत करने की कोशिशें हुईं। पर बात फाइलों तक ही सिमट कर रह गई। शिक्षाविद मकसबद अहमद ने कहा कि ये अफसोस कि बात है कि सर सैयद अहमद के घर को भी हम संरक्षित नहीं कर सके। इससे ज्यादा शर्म की कोई बात नहीं हो सकती।
एंग्लो एराबिक स्कूल में पढ़े।
बता दें सर सैयद अहमद राजधानी के एंग्लो एराबिक स्कूल में पढ़े। वह तब मदरसा होता है। इसी इस्कूल में ही पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान भी मैनेजर के रूप में रहे।













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