Deepfake: टेलर स्विफ्ट की डीपफेक पिक्चर से यूएस में मचा हंगामा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर बनाई गई मशहूर सिंगर टेलर स्विफ्ट की डीपफेक पिक्चर ने अमेरिका में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई स्विफ्ट की डीपफेक तस्वीर को लेकर कार्रवाई के साथ ही सख्त कानून बनाने की तेज मांग उठी है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर हटाने से पहले सिंगर टेलर स्विफ्ट की डीपफेक तस्वीर को 47 मिलियन लोगों ने देखा था।
टेलर स्विफ्ट ने अपनी डीपफेक इमेज बनाए जाने के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बात नहीं की है, लेकिन डेली मेल ने बताया है कि उनकी टीम उस साइट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है, जिसने एआई जनरेटेड इमेज को पब्लिश और ब्रॉडकास्ट किया था।

अमेरिका में डीपफेक को अपराध घोषित करने की मांग
टेलर स्विफ्ट की डीपफेक तस्वीरों को लाखों बार ऑनलाइन देखे जाने के बाद अमेरिकी राजनेताओं ने डीपफेक इमेज बनाने को अपराध घोषित करने के लिए नए कानूनों की मांग की है। सिंगर टेलर स्विफ्ट की डीपफेक तस्वीरें एक्स और टेलीग्राम समेत कई सोशल मीडिया साइटों पर पोस्ट की गईं।
एबीसी के मुताबिक, व्हाइट हाउस की स्पोकपर्सन कैरिन जीन-पियरे ने डीपफेक तकनीक के खिलाफ कानून पारित करने की मांग की है। कैरिन ने कहा, "हम उन तस्वीरों के प्रसार की रिपोर्टों से परेशान हैं। यह चिंताजनक है"। उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक तस्वीरों और गलत सूचना से बचने के लिए कड़े नियम लागू करने चाहिए। अमेरिकी प्रतिनिधि जो मोरेल ने तस्वीरों के ब्रॉडकास्ट को "भयावह" बताया है।
सोशल मीडिया से डीपफेक तस्वीरों को हटाया गया
सोशल मीडिया नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म एक्स ने एक बयान में कहा कि वह डीपफेक तस्वीरों को हटा रहा है और उन्हें फैलाने में शामिल अकाउंट्स के खिलाफ उचित कार्रवाई भी कर रहा है। एक्स की ओर से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और किसी भी अन्य उल्लंघन को तुरंत ठीक कर रहे हैं। सभी विवादित सामग्री को हटा भी रहे हैं। कई इमेज पब्लिश होने के बाद हटा दी गई, लेकिन उससे पहले एक्स पर 47 मिलियन बार इस पोस्ट को देखा चुका था।
डीपफेक इमेज बनाने में 550 फीसदी की वृद्धि
डीपफेक इमेज किसी के चेहरे या शरीर से छेड़छाड़ करके उसका वीडियो बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग है। साल 2023 में एक स्टडी में पाया गया कि एआई की 2019 में शुरुआत के बाद से छेड़छाड़ की गई इमेज के निर्माण में 550 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा समय में डीपफेक इमेज को साझा करने या बनाने के खिलाफ अमरीका में कोई संघीय कानून नहीं है। हालांकि इससे निपटने के लिए राज्य स्तर पर कई जरूरी कदम उठाए गए हैं।
ऑनलाइन पोस्ट में डीपफेक और पोर्नोग्राफी शामिल
पिछले साल प्रकाशित स्टेट ऑफ डीपफेक रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन पोस्ट किए गए अधिकांश डीपफेक में पोर्नोग्राफी शामिल है। ऐसी सामग्री में 99 फीसदी महिलाएं शिकार हुईं हैं। फिलहाल दुनिया के किसी भी देश में डीपफेक इमेज बनाने को लेकर कोई कानून नहीं बना है। हालांकि भारत में डीपफेक तस्वीरों को लेकर कानून बनाने की बात हो रही है। उम्मीद है कि अमरीका में भी जल्द ही कानून बनाया जा सकता है।
कैसे बनता है डीपफेक?
इमेज और वीडियो दोनों रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एक स्पेशल मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके डीपफेक बनाया जाता है। इसे डीप लर्निंग भी कहा जाता है। इसमें कंप्यूटर को दो वीडियोज या फोटो दिए जाते हैं, जिसे देखकर कंप्यूटर ही दोनों वीडियो या फोटो को एक जैसा बनाता है। यह ठीक उसी तरह है जैसे कोई बच्चा किसी दूसरे की नकल करता है।
डीपफेक इमेज या वीडियोज में हिडन लेयर्स होते हैं, इन्हें सिर्फ एडिटिंग सॉफ्टवेयर से ही देखा जाता है। दरअसल रियल इमेज-वीडियोज को फेक फोटो-वीडियोज में बदलने की एक प्रक्रिया है। डीपफेक फोटो-वीडियोज फेक होते हुए भी रियल नजर आते हैं।
आसान भाषा में कहें तो डीपफेक एक एडिटेड वीडियो होता है। इसमें किसी और चेहरे को दूसरे किसी चेहरे से बदल दिया जाता है। इसे दो नेटवर्क की मदद से बनाया जाता है। इनमें एक इनकोडर होता है और दूसरा डीकोडर नेटवर्क होता है। इनकोडर नेटवर्क सोर्स कंटेंट (असली वीडियो) को एनालाइज करता है। फिर डेटा को डीकोडर नेटवर्क को भेजता है। उसके बाद फाइनल आउटपुट निकलता है जो कि हूबहू असली जैसा होता है। लेकिन हकीकत में वह फेक होता है।












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