Cotton Candy Ban: क्यों लगा गुड़िया के बाल यानी कॉटन कैंडी पर बैन, क्या है इसका इतिहास?
तमिलनाडु और पुडुचेरी में कॉटन कैंडी बैन हो गई है। इसमें डाले जाना वाला केमिकल इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है।बचपन में सभी की पसंद रही कॉटन कैंडी बेचने पर तमिलनाडु और पुडुचेरी में प्रतिबंध लग गया है।

पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन का कहना है कि गुडिया के बाल किसी मीठे ज़हर से कम नहीं है। इसका सेवन सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है, जिसके कारण इसकी बिक्री पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर क्या आपको इसका इतिहास मालूम है। अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि आखिर ये कॉटन कैंडी क्या होती है, इसकी शुरुआत कहां से हुई, क्यों अब इस पर बैन लगा है।
कॉटन कैंडी का इतिहास
रूई की तरह दिखने वाली कई रंगों में बनी कॉटन कैंडी दुनियाभर में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। कोई इसे फेयरी फ्लॉस के नाम से जानता है तो कोई गुड़िया के बाल तो कोई बुढ़िया के बाल के नाम से इसे जानता है। देश के किसी भी कोने में ये आपको आसानी से मिल जाएगी, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पहली बार ये भारत में नहीं अमेरिका में बनी थी और इसे बनाने वाले एक डॉक्टर थे।
ऐसे बनी थी आपकी फेवरेट कॉटन कैंडी
अमेरिका की National Center for Biotechnology Information की आधिकारिक वेबसाइट https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/ के अनुसार अमेरिका के रहने वाले विलियम जेम्स मॉरिसन एक प्रसिद्ध दंत चिकित्सक, वकील, लेखक थे। वो हमेशा नई और अनोखी चीज बनाने में लगे रहते थे।
साल 1897 में जेम्स मॉरिसन ने अपने एक साथी जॉन सी व्हाटर्न के साथ मिलकर एक ऐसी मशीन बनाई, जो गर्म चीनी को घुमाते हुए कॉटन कैंडी बनाती थी। उस जमाने में ये अपने आप में एक अनूठा अविष्कार था।
तब इस कैंडी को फेयरी फ्लॉस कहा जाने लगा। इसके बाद 1907 में विलियम्स जेम्स मॉरिस ने सेंट लुइस वर्ल्ड फेयर में अपने इस नए आविष्कार को पहली लोगों के बीच रखा और कैंडी बनाकर बच्चों को दी। आपको ये जानकारी हैरान कर देगी कि मेला शुरू होने से आखिरी दिन तक इस कॉटन कैंडी की करीब 68 हजार मशीनें बिक गई थीं।
ऐसे पड़ा कॉटन कैंडी नाम
अब हर नाम के पीछे भी कोई ना कोई कहानी जरुर होती है। फेयरी फ्लॉस नाम से पहचानी गई इस कैंडी का नाम कॉटन कैंडी क्यों पड़ा, तो दरअसल, साल 1921 में विलियम्स जेम्स मॉरिस ने ध्यान दिया कि चीनी को मशीन में घुमाया जाता है जिससे वो रूई जैसा आकार ले लेती है। बस तब उन्होंने इस मिष्ठान का नाम कॉटन कैंडी कर दिया। पर ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा देश है जहां इसे आज भी "फेयरी फ्लॉस" के नाम से जाना जाता है।
वहीं समय के साथ भी इसमें कई बदलाव आए जिसमें साल 1970 में एक कॉटन कैंडी मशीन आई जो पूरी तरह से ऑटोमैटिक थी। इस मशीन को चलाने के लिए किसी व्यक्ति की जरूरत नहीं थी, ये अपने आप ही कॉटन कैंडी बना सकती थी।
अब क्यों लगा बैन?
तमिलनाडु में इस पर रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री एम सुब्रमण्यम ने 17 फरवरी को जारी एक प्रेस रिलीज में इस बात की जानकारी दी। वहीं पुडुचेरी में सरकार ने इसके प्रतिबंध के पीछे का मुख्य कारण कॉटन कैंडी के निर्माण में जहरीले रसायनों का उपयोग किया जाना बताया है। उनका कहना है कि अब इसमें ऐसे कैमिकल डाले जाते हैं जो सेहत के लिए गंभीर नुक़सान पहुंचा सकते हैं।
वहीं पुडुचेरी की राज्यपाल का कहना है कि इसमें रोडामाइन बी नामक केमिकल का प्रयोग किया जाता है जिसका उपयोग कपड़ा उद्योग में किया जाता है। यह जहरीला केमिकल है जो कैंसर का कारण बन सकता है, जिसके चलते इसे बैन किया गया है।












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