Super Soldiers: चीन समेत ये देश बना रहे हैं सुपर सोल्जर, जानिये क्या है पूरी हकीकत
सुपरपावर बनने की चाह में चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस अपने सैनिकों में बायोलॉजिकल बदलाव कर रहे हैं। इस बदलाव के बाद जो सैनिक तैयार होंगे उन्हें सुपर सोल्जर कहा जायेगा।

Super Soldiers: 2011 में एक हॉलीवुड फिल्म आई थी 'कैप्टन अमेरिका'। फिल्म में दर्शाया गया था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक जब नाजी जर्मन सेना द्वारा मारे जा रहे थे, तब अमेरिकी वैज्ञानिकों ने स्टीव रोजर्स नाम के एक सैनिक को 'सुपर सोल्जर सीरम' लगाया। उससे उस सैनिक की लम्बाई, ताकत और फुर्ती तेजी से बढ़ जाती है और फिर वह साधारण सा सैनिक सीरम के असर से असाधारण बन जाता है और अकेले ही पूरी जंग में हार-जीत का फैसला कर देता है। कुछ यही सोच लेकर अब चीन और रूस भी अपने सैनिकों को सुपर सोल्जर बनाने में जुटे हुए हैं।
कैसे हुआ इस फिल्मी 'हकीकत' का खुलासा
साल 2020 में अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि चीन की सेना (People's Liberation Army) ने सैनिकों को सुपर सोल्जर बनाने के लिए इंसानों पर जैविक परीक्षण को शुरू कर दिया है। चीन की मंशा है कि इससे सैनिकों की क्षमता को किसी भी आम इंसान से ज्यादा किया जा सके।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के निदेशक रहे जॉन रैटक्लिफ ने 'वॉलस्ट्रीट जर्नल' में लिखे अपने लेख में स्पष्ट रूप से चेताया था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने लिखा था कि खुफिया विभाग स्पष्ट मानता है कि बीजिंग का इरादा अमेरिका और बाकी दुनिया पर आर्थिक, सैन्य और तकनीक के लिहाज से दबदबा बनाने का है।
'चीन बना रहा सुपर सोल्जर'
जॉन रैटक्लिफ ने अपने इसी लेख में खुलासा किया था कि चीन अपने सैनिकों पर कई जैविक परीक्षण कर रहा है। जिससे उन्हें अधिक ताकतवर बनाया जा सके। हालांकि, रैटक्लिफ के इस खुलासे पर सीआईए (Central Intelligence Agency) ने कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। जबकि ब्रिटेन ने स्वीकार किया था कि चीन ऐसा कर रहा है। तब चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस आलेख को खारिज करते हुए कहा कि यह चीन की छवि सहित चीन-अमेरिकी संबंधों को नुकसान पहुंचाने की उम्मीद में गलत सूचना, राजनीतिक कटुता और झूठ फैलाने वाला एक कदम है।
वैसे, साल 2021 में भी ऐसी कुछ रिपोर्ट सामने आई थी कि जिस तरह से प्रयोगशालाओं में जानवरों के हाइब्रिड बच्चे बनाने की तैयारी हो रही है, अब उसी तरह चीन अपनी प्रयोगशालाओं में इंसान और बंदर को मिलाकर एक ऐसी हाइब्रिड नस्ल तैयार करने की कोशिश कर रहा हैं, जिसका इस्तेमाल सैन्य शक्ति के तौर पर वह अपने दुश्मनों के खिलाफ कर सके।
क्या होती है जीन एडिटिंग और क्रिशपर तकनीक
चीन ने तो अभीतक इसपर कोई अधिकारिक स्वीकृति नहीं दी है लेकिन अलग-अलग समय में इस विषय पर कई शोध जरुर हुए हैं। जैसे साल 2019 में दो अमेरिकी शिक्षाविदों के रिसर्च पेपर में कहा गया कि चीन की सेना 'जीन एडिटिंग', एक्सोस्केलेटन और मानव-मशीन सहयोग जैसी तकनीकों की खोज में जुटी हुई हैं। तब इस दावे ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया था।
जीन एडिटिंग एक ऐसी तकनीक है जिससे प्रकृति द्वारा बनाई गई रचनाओं में बदलाव किया जा सकता हैं। इस तकनीक के जरिए ही डीएनए (DNA) में बदलाव संभव होता है। गौरतलब है कि दुनियाभर में कई जीवों पर जैविक प्रयोग कर नई नस्लें तैयार की जा रही हैं। जीन एडिटिंग तकनीक से न सिर्फ जीवों बल्कि पौधों एवं सब्जियों पर भी प्रयोग कर इनकी नई किस्में बनाई जा रही हैं। अब इसी तकनीक से चीन अपने सैनिकों के DNA में बदलाव कर उन्हें इंसानों से ज्यादा शक्तिशाली बनाना चाह रहा है ताकि वो जंग में बिना थके और बिना खाये-पीये लंबे समय तक युद्ध लड़ सकें।
साल 2012 में फ्रांस की दो महिला वैज्ञानिकों - इमैनुएल शार्पेटिए और जेनिफर डॉडना ने मिलकर 'क्रिशपर' नाम की एक तकनीक का पता लगाया था। इन वैज्ञानिकों का दावा था कि क्रिशपर के माध्यम से इंसान के डीएनए में बदलाव कर मनचाहा बच्चा पैदा किया जा सकता है। ऐसा बच्चा जो कभी बीमार नहीं पड़ेगा। चीन इसी तकनीकी से अपने लिए 'सुपर सोल्जर' बना रहा है।
चीन के अलावा और कौन से देश इस 'खिलवाड़' में शामिल हैं
सुपर सोल्जर बनाने की होड़ में केवल चीन ही इकलौता देश नहीं है। जो देश चीन पर आरोप लगा रहे हैं वे खुद भी इस दौड़ में शामिल हैं। इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस सहित रूस भी शामिल हैं। हालांकि, इस मामले पर खुलकर किसी ने नहीं कुछ कहा है, इसलिए गुपचुप तरीके से इस कवायद को अंजाम दिया जा रहा है। वैसे अभी तक कोई भी देश सुपर सोल्जर तैयार नहीं कर सका है।
साल 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सुपर सोल्जर को लेकर कहा था कि अमेरिका अब 'आयरन मैन' बनाने जा रहा है। आयरन मैन एक ऐसा सुपर सोल्जर होगा जो एक सुरक्षात्मक सूट पहना होगा। जिसे टैक्टिकल असॉल्ट लाइट ऑपरेटर सूट (Tactical Assault Light Operator Suit) के रूप में जाना जाता है। हालांकि, तकरीबन 5 साल बाद इस पर काम रोक दिया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया कि इसमें कुछ खास डेवलमेंट नहीं हो रहा था। इसलिए इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया।
रूस पर भी यह आरोप लग चुके हैं कि वह सुपर सोल्जर बनाने की कोशिश कर रहा है। जबकि रूस ने कभी अधिकारिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया। साल 2017 में रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हथियार के क्षेत्र में हो रही उन्नति को देखते हुए यह जरूर कहा था कि मानवता जल्द ही ऐसा कुछ तैयार कर लेगी, जो परमाणु बमों से भी ज्यादा खतरनाक होगा।
बात अगर ब्रिटेन और फ्रांस की करें तो यह दोनों देश भी पीछे नहीं हैं। साल 2019 में ब्रिटेन की डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (DARPA) ने जेनेटिक एडिटिंग के जरिए सुपर सोल्जर बनाने का दावा किया था। इसके बाद साल 2021 में ब्रिटिश सरकार ने जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी के लिए 8,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी कर दी थी। वहीं 2021 में फ्रांस की मिलिट्री एथिक्स कमेटी ने भी अपने सैनिकों के DNA में बदलाव करके उन्हें सुपर सोल्जर बनाने की अनुमति दी है।
भारत इन प्रयोगों में कहां है?
भारत में सुपर सोल्जर को लेकर कोई जैविक परीक्षण का खुलासा नहीं हुआ है। दरअसल, भारत में इंसानों पर ऐसे प्रयोग प्रतिबंधित हैं। इतना जरुर है कि डीएनए का प्रयोग कर नाक, हाथ, कान अथवा शरीर के दूसरे बाह्य अंगों का क्लोन तैयार करने संबंधी शोध भारत में हो रहे हैं।
यह भी पढ़ें: Sovereign Gold Bond (SGB): क्या है गोल्ड बॉन्ड स्कीम, कैसे करें इसमें निवेश, जानिये इसके लाभ












Click it and Unblock the Notifications