1965 की जंग से जुड़े इन तथ्यों को पढ़ने के बाद आप करेंगे IAF पर नाज
बैंगलोर। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग न सिर्फ भारतीय सेना की बहादुरी की कहानी है बल्कि इंडियन एयरफोर्स की गाथा भी बयां करता है। यह युद्ध भारत और पाक दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा एरियल वॉर भी बना था। आजादी की लड़ाई के बाद दोनों के लिए ही पहला मौका था जब दोनों देशों ने इस तरह से हवा में शक्ति प्रदर्शन किया था। इस युद्ध में भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही आक्रामक और रक्षात्मक रवैया अपनाया था।
एयर फोर्स को मिले थे अचानक आदेश
भारत और पाक के बीच एक सितंबर 1965 से हवा में जंग की शुरुआत हुई थी। उस समय इंडियन एयरफोर्स को पाक सेना के खिलाफ हवाई हमलों के लिए अचानक आदेश मिले थे। पाक ने उस समय तक ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम को लांच कर दिया था।
इंडियन एयरफोर्स की 45 स्क्वाड्रन को भारतीय ट्रूप्स की मदद के लिए एयर सपोर्ट के लिए आदेश दिया गया था। यह वहीं स्क्वाड्रन है जिसे हाल ही में पुणे से पठानकोट शिफ्ट किया गया है।
इंडियन एयरफोर्स की ओर से चार एयरक्राफ्ट्स का प्रयोग किया और तीन मिशन को अंजाम दिया गया। हर मिशन के लिए एक खास टास्क तय किया गया था।
हमलों के बाद भी नहीं टिक सका पाक
पाक को जैसे ही इसकी भनक लगी उसने भी अपनी एयर फोर्स को इसका जवाब देने के लिए तैनात कर दिया था। इस वजह से इंडियन एयरफोर्स को अपने चार वैंपायर एयरक्राफ्ट्स से हाथ धोना पड़ गया था।
उस जंग में इंडियन एयर फोर्स ने बिना रुके 200 मिशंस को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इंडियन एयरफोर्स के फॉलैंड ग्नैंट्स और इसकी 23 स्क्वाड्रंस ने पाक के खिलाफ हवा में जंग को बहादुरी से अंजाम दिया था।
आगे भी मिली इंडियन एयर फोर्स को मदद
इंडियन एयरफोर्स ने जिस रणनीति से 65 के युद्ध में पाक पर दबाव बनाया, उसने उसे आगे भी काफी मदद की। 1971 के युद्ध के समय पाक की फौज इसी वजह से भारतीय वायुसेना के आगे टिक नहीं सकी थी। इंडियन एयर फोर्स ने अपनी सभी कमियों को भी दूर किया।
भारत और पाक के दावे
भले ही उस समय भारतीय वायुसेना के आगे पाक वायुसेना टिक न सकी हो लेकिन पाक इस बात को कभी नहीं मानता है। पाक का कहना है कि उसने भारत के 59 से 110 एयरक्राफ्ट्स को नुकसान पहुंचाया और जंग में उसके 18 से 43 तक एयरक्राफ्ट्स बेकार हो गए तो वहीं भारत हमेशा पाक के इन दावों को खारिज कर देता है।













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