Evacuation of Indians: कभी अफगानिस्तान, कभी यूक्रेन और अब सूडान, विदेशों में फंसे भारतीयों का बचाव
सूडान में छिड़े गृहयुद्ध के कारण हजारों भारतीय फंस गये हैं, जिसे निकालने के लिए मोदी सरकार एक्शन में आ चुकी है।

यमन संकट हो, अफगानिस्तान संकट, यूक्रेन-रूस जंग का मैदान या कोरोना काल, जब भी दुनिया के किसी हिस्से में फंसे भारतीय लोगों को स्वदेश लाने की बात होती है तो भारत सरकार हरसंभव प्रयास कर अपने लोगों को सकुशल वापस लेकर आती है। इसी तरह एक बार फिर से परदेस में रह रहे भारतीय मुश्किल में हैं और इस बार खतरा अफ्रीकी देश सूडान में है।
सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच चल रहे गृहयुद्ध के कारण वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (21 अप्रैल 2023) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सूडान में सुरक्षा हालात की समीक्षा बैठक की। इस हाई लेवल मीटिंग में सूडान में फंसे 3,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने के लिए प्लान तैयार करने को कहा है।
72 घंटे का है संघर्ष विराम
दरअसल सूडान में ईद से पहले हुए 72 घंटे के संघर्ष विराम की घोषणा की गई। इस बीच पीएम मोदी ने भारतीय नागरिकों की निकासी और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए सभी विकल्पों पर प्लान तैयार करने के आदेश दिये हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों और सूडान में भारत के राजदूत समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।
वैसे 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक दर्जनों बार विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सकुशल वापस लाने में सरकार ने सफलता हासिल की। लेकिन, आज हम आपको कुछ ऐसे ऑपरेशन्स के बारे में बताने जा रहे हैं जब हजारों की संख्या में भारतीय लोग युद्ध या किन्हीं कारणों से विदेशों में फंस गये थे और तब भारत सरकार उन्हें वापस लेकर आईं थी।
2014 (लीबिया)
अगस्त 2014 में लीबिया में दूसरी बार गृहयुद्ध छिड़ गया था। इस वजह से वहां हजारों की संख्या में भारतीय लोग फंस गये थे। तब भारत सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। जिसके तहत लीबिया और माल्टा से फंसे हुए भारतीयों को निकालने के लिए ट्यूनिशिया के जेर्बा तक उड़ानों का संचालन किया गया। उस दौरान 1200 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया था।
2015 (ऑपरेशन राहत)
हूथी विद्रोही लड़ाकों की वजह से यमन की राजधानी सना में अशांति फैल गई थी। इस वजह से वहां रहने वाले हजारों भारतीय फंस गये थे जिसके लिए भारत सरकार की तरफ से 'ऑपरेशन राहत' चलाया गया था। यह ऑपरेशन साल 2015 अप्रैल में चलाया गया था। इस ऑपरेशन का मोर्चा खुद तत्कालीन विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने संभाल रखा था। 10 दिनों तक चले ऑपरेशन में भारतीय सेना के जांबाजों ने 5600 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें 41 देशों के 960 नागरिक भी शामिल थे।
2020 (वंदे भारत मिशन)
कोविड-19 संकट के दौरान दुनियाभर के देशों ने अपनी सीमाओं और एयरलाइनों पर आवाजाही प्रतिबंधित कर दी थी। उस समय भारत सरकार ने चीन, ईरान, इटली में फंसे लाखों भारतीयों को निकाला था। पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन से पहले और उसके दौरान यानि 11 सितंबर 2020 तक वंदे भारत मिशन के तहत, कुल 12 लाख 69 हजार 172 यात्रियों को भारत वापस लाया गया था।
2021 (ऑपरेशन देवी शक्ति)
जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था, तब अफगानिस्तान में अफरा-तफरी मच गई थी। हर कोई तालिबान के खौफ से भागना चाहता था। वहीं हजारों भारतीय नागरिक भी अफगानिस्तान के युद्ध में फंस गये थे, तब ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत भारत सरकार ने अफगानिस्तान से 669 लोगों को निकाला था। इनमें 448 भारतीय और 206 अफगान नागरिक शामिल थे। जिन अफगान नागरिकों को वहां से निकाला गया है, उनमें ज्यादातर हिंदू और सिख समुदाय के लोग शामिल थे।
2022 (ऑपरेशन गंगा)
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध छिड़ गया था। इस कारण हजारों भारतीय लोग यूक्रेन में फंस गये थे। तब भारत सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए 'ऑपरेशन गंगा' चलाया और अपने चार केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी मुल्कों में भेजा ताकि रेस्क्यू को लेकर तुरंत एक्शन ले सकें। वहीं भारत ने रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा सहित यूक्रेन के पड़ोसी देशों के रास्ते से अपने नागरिकों को सुरक्षित रूप से वापस निकाला था।
भारत सरकार ने लगभग 20,000 भारतीयों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा के तहत लगभग 80 उड़ानें चलाई थीं। यहां गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे देशों के नागरिक भी इस दौरान यूक्रेन से भागने के लिए भारतीय झंडे का इस्तेमाल करते थे।












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