Indian Auto Market: तेजी से बढ़ता ऑटो बाजार, फिर भी 8 प्रतिशत भारतीयों के पास ही है कार
देश में भले ही सभी के पास अपना घर नहीं है, लेकिन निजी वाहन हर तीसरे घर में है। यह आंकड़ा बहुत दिलचस्प है कि लगभग 30 करोड़ भारतीय परिवार में 11 करोड़ से अधिक निजी वाहन हैं। हाँ, इनमें अधिकतर दोपहिया वाहन हैं।
अभी ताजा आंकड़ा आया है कि बेंगलुरू ने निजी कारों के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। टॉमटॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2023 तक बेंगलुरु में कुल 23.1 लाख निजी कारें थीं। इसकी तुलना में, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उस दिन तक 20.7 लाख निजी कारें थीं।

24 बिलियन डॉलर का होगा कार बाजार
वैसे तो जुलाई, 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार सड़क परिवहन मंत्रालय के ई-वाहन पोर्टल पर कुल 34 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से निजी कारों की संख्या लगभग 4 करोड़ है। रजिस्टर्ड कुल वाहनों में लगभग 75 प्रतिशत केवल मोटर साइकिलों की संख्या है। साइंस डायरेक्ट ने अपने अध्ययन में यह अनुमान लगाया है कि वर्ष 2050 तक भारत में दोपहिया वाहनों की संख्या लगभग 420 मिलियन और कारों की संख्या लगभग 262 मिलियन हो जाएंगी। भारत में निजी वाहनों की बिक्री 2030 के बाद एक दम से बढ़ जाएगी।
आंकड़ों का संग्रह करने वाली वेबसाईट स्टेटिस्ता के अनुसार 2024 में, भारत में यात्री कारों से कुल अनुमानित राजस्व 22.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह अगले 4 साल (2024-2028) 1.40 प्रतिशत की दर से वार्षिक वृद्धि हासिल कर सकता है। यानि भारतीय कार बाजार 2028 तक 23.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक उचाईं हासिल कर सकता है।
आने वाले दिनों में एसयूवी की मांग सबसे अधिक होने की संभावना है। भारतीय यात्री कार बाजार में स्टाइल, स्पेस और सामर्थ्य के अनुसार कॉम्पैक्ट एसयूवी की मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह भी अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2028 तक कारों के बाजार की यूनिट बिक्री सालाना 32 लाख तक बढ़ सकती है। अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से देखें तो अमेरिका 2024 में 514 बिलियन डॉलर के कार बाजार के साथ विश्व में शीर्ष पर बना रहेगा।
मारुति अभी भी मार्केट लीडर
वित्तीय वर्ष 2023 में मारुति सुजुकी ने लगभग 15 लाख नई कारें बेचीं। इसके बाद हुंडई और टाटा का नंबर आता है। हुंडई ने इस वर्ष 5 लाख 25 हज़ार गाड़ियां बेची तो टाटा ने लगभग 4 लाख 84 हजार। महिंद्रा ने भी लगभग 3 लाख 23 हजार गाड़ियां बेची। बाजार में अपेक्षाकृत नई कंपनी किया ने 2 लाख 32 हजार गाड़ियां बेची। होंडा, रेनॉल्ट, एम जी मोटर और निशान की गाड़ियां लोगों ने ज्यादा पसंद नहीं की।
केवल 8 प्रतिशत लोगों के पास कार
भले ही भारत में वाहनों की संख्या बहुत दिखाई दे, लेकिन यदि जनसंख्या से तुलना करें तो भारत कई देशों से बहुत पीछे है। कार स्वामित्व के मामले में अमेरिका अग्रणी है। यहाँ के 88 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक कार जरूर है। जर्मनी 85 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। यही नहीं अमेरिका में प्रति घर 1.97 वाहन हैं। पर दुनिया का पांचवां सबसे छोटा देश सैन मैरिनो कार के मामले में सबसे आगे है। यहाँ प्रति परिवार के पास 3.26 कार हैं। फ्रांस में 83 प्रतिशत लोगों के पास निजी गाड़ियां हैं तो जापान में 81 प्रतिशत लोगों के पास। ब्रिटेन के भी 74 प्रतिशत लोगों के पास अपने वाहन हैं। और भारत की बात करें तो देश के केवल 8 प्रतिशत लोगों के पास अपनी गाड़ी है। चीन में भी केवल 17 प्रतिशत लोग ही अपनी निजी कार रख पते हैं।
यूपी को लगे पंख
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स द्वारा हाल ही में जारी आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश देश 2023 में देश भर में सबसे अधिक वाहन बिक्री वाला राज्य बन गया है। उसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु का नंबर आता है। कुल वाहनों की बिक्री वाले शीर्ष दस राज्यों की सूची में कर्नाटक चौथे, गुजरात पांचवें, बिहार छठे स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर रहा। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर हैं।
यदि निजी वाहनों के आंकड़े देखें तो इसमें महाराष्ट्र 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। फिर उत्तर प्रदेश 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है। कर्नाटक और गुजरात 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बराबरी पर हैं तो हरियाणा और तमिलनाडु 7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ खड़े रहे।
दोपहिया वाहन के सेगमेंट में वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में अकेले 17 प्रतिशत की प्रभावशाली हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र भी 9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। तमिलनाडु 8 प्रतिशत और बिहार 7 प्रतिशत बिक्री के रेकॉर्ड पर हैं। कर्नाटक में भी कुल दोपहिया वाहन की बिक्री का 7 प्रतिशत हिस्सा रहा। लेकिन वाणिज्यिक वाहन की इकाई में महाराष्ट्र 12 प्रतिशत बिक्री के साथ फिर से अग्रणी रहा, इसके बाद उत्तर प्रदेश 10 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। तमिलनाडु 9 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है, जो कर्नाटक के 8 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है।
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