Right to Health: राजस्थान का राइट टू हेल्थ बिल, आयुष्मान भारत योजना से कितना कारगर होगा?
आईएमए ने 'राइट टू हेल्थ' बिल को ‘राइट टू डेथ’ करार दिया था। दरअसल, विरोध इस बात को लेकर था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं को भी इस बिल के जरिये निजी अस्पतालों में लागू कर दिया जायेगा।

Right to Health: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार का राइट टू हेल्थ बिल विधानसभा में पारित हो गया है। पिछले कई दिनों से राज्य के निजी अस्पतालों से जुड़े डॉक्टर इस कानून को लेकर हड़ताल पर चल रहे थे। पिछले दिनों सरकार से बातचीत के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए हैं। सरकार और डॉक्टरों के बीच आठ सूत्री मांगों पर सहमति बनने के बाद अब राज्य में यह राइट टू हेल्थ बिल लागू हो जायेगा। गौरतलब है कि गहलोत सरकार ने राइट टू हेल्थ बिल सितंबर 2022 में विधानसभा में पेश किया था। लेकिन तब यह पारित नहीं हो सका। अभी हाल ही में विधानसभा सत्र में यह बिल पारित हो गया।
इस बिल के पारित होने के बाद राज्य में आम नागरिकों को चिकित्सा का अधिकार मिलेगा। इस कानून को लेकर सीएम गहलोत को बहुत उम्मीदें हैं। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना देशभर में लागू है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने की बात दोहराते रहे हैं। मई 2022 में भी सीएम गहलोत ने पीएम मोदी से आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया था। दरअसल, सीएम गहलोत का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना से आमजन को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुष्मान भारत योजना और राइट टू हेल्थ बिल में अंतर
आयुष्मान भारत, केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना है। जिसके तहत केंद्र सरकार लाभार्थी को गोल्डन कार्ड उपलब्ध करवाती है। इस कार्ड के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोग अस्पताल में जाकर मुफ्त इलाज का लाभ ले सकते हैं। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अप्रैल 2018 को लागू की थी। इसके अंतर्गत लाभार्थी को 5 लाख रुपए तक के स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलती है।
वहीं, केंद्र सरकार की इस योजना की सफलता में सबसे बड़ी बाधा इसकी पात्रता को लेकर है। दरअसल, देश में 2011 की जनगणना के आधार पर केवल सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है। जबकि राजस्थान में गहलोत सरकार द्वारा पारित राइट टू हेल्थ बिल प्रत्येक आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार देता है। राजस्थान ऐसा पहला राज्य है, जहां यह व्यवस्था लागू होने जा रही है।
राइट टू हेल्थ बिल से मिलने वाले लाभ
इस कानून के तहत राजस्थान के प्रत्येक नागरिक को किसी भी स्वास्थ्य संस्थान, स्वास्थ्य देखभाल प्रतिष्ठान और नामित देखभाल स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक शुल्क या शुल्क के पूर्व भुगतान के बिना आपातकालीन उपचार और देखभाल का अधिकार होगा। आपातकाल में इलाज का खर्चा संबंधित मरीज द्वारा वहन नहीं करने पर पुनर्भरण राज्य सरकार करेगी। इससे तहत राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की गारंटी मिलेगी। पैसों के अभाव में किसी की जान नहीं जायेगी और अस्पताल इलाज के लिए मना नहीं कर सकते। यही नहीं, सड़क दुर्घटना में घायलों को फ्री ट्रांसपोर्ट, फ्री इलाज और बीमा कवर जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
राइट टू हेल्थ बिल का विरोध क्यों हुआ
राजस्थान में इस बिल की घोषणा होते ही इस बिल को विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदेशभर में निजी अस्पतालों से जुड़े डॉक्टरों ने इसे लेकर अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राइट टू हेल्थ बिल की घोषणा के बाद सबसे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस बिल को लेकर विरोध जताया।
एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि इस बिल में निजी अस्पतालों की अनदेखी की गयी है। आईएमए ने इस बिल को 'राइट टू डेथ' करार दिया। दरअसल, विरोध इस बात को लेकर था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं को भी इस बिल के जरिये निजी अस्पतालों में लागू कर दिया जायेगा। बिल को लेकर विरोध दर्ज करा रहे संगठनों का कहना था कि सरकारी स्कीम को निजी अस्पतालों पर जबरन थोपा गया तो अस्पताल बंद होने की कगार पर आ जायेंगे। बिल में इमरजेंसी की कोई परिभाषा नहीं दी गई है। कोई भी मरीज इमरजेंसी बताकर बिना पैसों के इलाज लेगा? इससे निजी अस्पतालों को भारी नुकसान होगा।
राइट टू हेल्थ बिल जनहित का फैसला
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहना कि इस बिल से आम जनता और डॉक्टर दोनों को ही फायदा होगा। वहीं राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने विधानसभा में इस बिल को जनता के हित में करार दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि इस विधेयक में सभी सदस्यों और चिकित्सकों के सुझाव शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी सदस्यों के सुझाव पर इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजा था।
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बहरहाल, चिकित्सकों की हड़ताल और कई वार्ताओं के दौर के बाद राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर तमाम गतिरोध खत्म हो गए हैं। गहलोत सरकार इस बिल को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। अब देखने वाली बात होगी कि आम जनता को इससे कितना लाभ मिल पाता है।
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