Positive India: प्याज की कीमत ने नहीं नेताओं के शोर ने बिगाड़ा है खाने का जायका

Positive India में आज हम बात करेगें आसमान छूती प्याज की कीमतों की, जिसे लेकर इस समय सड़क से लेकर संसद तक में हाहाकार मचा हुआ है।

मालूम हो कि महाराष्ट्र स्थिति एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी में प्याज का थोक भाव 57 रुपये किलो तक पहुंच गया है तो वहीं दिल्ली के खुदरा बाजारों में 80 रुपये किलो के भाव पर प्याज बिक रहा है।

क्या है प्याज के मंहगे होने का मुख्य कारण?

एक तरफ तो भारी बारिश के कारण प्याज की फसलें बर्बाद हुई हैं जिसके काऱण प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ रहा है तो वहीं दूसरी ओर मार्केट के जमाखोरों की वजह से भी प्याज महंगा हो रहा है जिसकी वजह से ही दिल्ली के खुदरा बाजारों में 80 रुपये किलो के भाव पर प्याज बिक रहा है।

ताजा स्थिति

देश के लगभग अस्सी प्रतिशत घरों की रसोई में प्याज का इस्तेमाल होता है, ऐसे में जो लोग चुटपुट मार्केट से सब्जियां खरीदते हैं वहां सब्जी वेंडर मनमाने दामों में प्याज बेच रहे हैं जिसकी वजह से लोग काफी आक्रोशित हो रहे हैं, उनका गुस्सा और भड़ास सरकार पर फूट रहा है।

गुस्सा और भड़ास सरकार पर

हमारे देश के राजनेता तो हर चीज पर राजनीति करते हैं, जिससे ना तो समस्या हल होती है और ना ही कोई समाधान निकलता है। किसी भी परेशानी का हल केवल हो-हल्ला मचाने से तो होता नहीं है, इसके लिए आपको कुछ प्रयत्न करने होते हैं, इसलिए केन्द्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ खास तरीके निकाले हैं जिन्हें आम जनता को जानना बेहद ही जरूरी है लेकिन अफसोस महंगाई के शोर में महंगाई के रोकने वाली आवाज दबकर रह जा रही है।

आईये आपको बताते हैं कि बढ़ती कीमतों पर नकेल कसने के लिए क्या है सरकार की योजनाएं...

  • प्‍याज के आयात के लिए सरकार द्वारा एक निर्णय ले लिया गया है और 10,000 मीट्रिक टन प्‍याज के लिए एक निविदा भी जारी की गई है जो 27 अगस्‍त, 2015 को खुलेगी।
  • घरेलु बाजार में प्‍याज की उपलब्‍धता को बढ़ाने के लिए, प्‍याज के न्‍यूनतम निर्यात मूल्‍य को आने वाले समय में प्रति मीट्रिक टन 700 अमरीकी डॉलर तक बढ़ाने का फैसला किया गया है।
  • प्‍याज के मूल्‍यों की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है।
  • प्‍याज के मूल्‍यों बढ़ते मूल्‍यों पर नियंत्रण बनाने के लिए उठाए गये कदमों की समीक्षा के लिए कृषि मंत्रालय और दिल्‍ली सरकार के एसएफएसी, नैफेड, एमएमटीसी, वाणिज्‍य विभाग के साथ 24 अगस्‍त, 2015 को उपभोक्‍ता मामले के सचिव द्वारा फिर से एक बैठक की जा रही है।
  • बाजार में हस्‍तक्षेप करने के लिए, लघु किसान कृषिव्‍यवसाय संकाय और नैफेड ने 5857 मीट्रिक टन प्‍याज खरीदी है।
  • आवश्‍यक वस्‍तुओं के मूल्‍यों को नियंत्रण में रखने के लिए मूल्‍य स्थिरता कोष से धन उपलब्‍ध कराया गया है।
  • एसएफएसी ने भी दिल्‍ली सरकार के लिए 2511 मीट्रिक टन प्‍याज खरीदी है जिससे उसका कुल प्‍याज भंडार 8368 मीट्रिक टन हो गया है।
  • एसएफएसी 30 रूपए किलो की दर से सफल को प्‍याज की आपूर्ति कर रही है और वह इसे 39 रूपए किलो के भाव से उपलब्‍ध करा रहे हैं।
  • एसएफएसी डीएमएस के 120 दुग्‍ध बूथों के माध्‍यम से 35 रूपए किलों के भाव से प्‍याज उपभोक्‍ताओं को बेच रही है।
  • प्‍याज के मूल्‍यों में हुई वृद्धि का कारण कुल उत्‍पादन में कमी है जो वर्ष 2013-14 के 194.02 लाख टन के मुकाबले 2014-15 में 189.23 लाख टन पर आ गया है।
  • इस प्रकार उत्‍पादन में कुल 4.79 लाख टन की कमी हुई है। इस कमी का प्राथमिक कारण खराब मौसम और बिना मौसम की बारिश रही है जिसका प्रभाव प्रमुख फसलों पर पड़ा है।
  • आवश्‍यक वस्‍तुओं के मूल्‍यों पर नियंत्रण में रखने के लिए कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्‍त कदम उठाने की भी बात है।
  • केन्‍द्र सरकार ने 2 जुलाई 2016 तक प्‍याज के भंडार की सीमा लागू करने के लिए राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को अधिकार प्रदान किए हैं।

अक्टूबर से होगा सस्ता

बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा है कि अक्टूबर से पहले प्याज सस्ता होने की उम्मीद नहीं है, नासिक और आसपास के क्षेत्रों में जहां प्याज की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, वहां से आवक कम हो गयी है लेकिन अगर सरकार के बनाये नियम तेजी से अमल में आये तो सस्ता होने वाला महीना अक्टूबर के बजाये सितंबर भी हो सकता है।

पॉजिटिव इंडिया

अक्सर यह कहा जाता है कि मर्ज का इलाज अगर सही समय पर शुरू हो जाये तो इंसान को कभी भी परेशानी नहीं हो सकती है इसलिए आप फुंसी को फोड़ा ना बनने दें और समय-समय पर अपने शरीर का मेडिकल चेकअप कराते रहें ठीक उसी तरह अगर मौसम की वजह से बर्बाद हो रही फसलों के बारे में हम पहले से सोचेंगे तो हमें कभी भी परेशानी नहीं होगी।

फुंसी को फोड़ा ना बनने दें

हर समय सरकार को कोसने से तो काम चलेगा नहीं, सरकार अपना काम कर रही है और आप अपना कीजिये, किसी भी अफवाहों और राजनीतिकरण का शिकार हुए बिना सरकार की ओर से बनायी गई योजनाओं और नियमों का अक्षरश: पालन कीजिये, निश्चित रूप से आपके भोजन का जायका कभी नहीं बिगड़ेगा, ना तो आपके सलाद से और ना ही सब्जी से आपका मनपसंद प्याज गायब होगा।

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